बिलासपुर। शहर के रेत चोर तुराकाडीह पुल का पाया हिलाने के बाद अब फोरलेन पुल के पाया हिलाने की तैयारी में है। रोज यहां से सौ ट्रेक्टर रेत निकाला जा रहा है। विडंबना तो ये है की ये रेत चोर न तो खनिज विभाग को डर रहे है और न ही उन्हें पुल के बर्बाद होने की चिंता है।
शहर के बहुत से धनपति अरपा की रेत चोरी करके करोड़पति बने है। यही कारण है की सत्ता बदलने के साथ रेत चोरों के भी चेहरे बदल जाते है। भाजपा की सरकार दर्जनभर रेत चोर करोड़ों बनाए अब कांग्रेस की सरकार आई तो दर्जनभर दूसरे रेत चोर नए आ गए। इन रेत चोरों को न तो कानून का डर है और न ही अधिकारियों का डर है। यही कारण है की बेखौफ होकर सुबह से शाम तक रेत निकालकर बेच रहे है। चिंता की बात तो ये है की अभी जहां से रेत निकाला जा रहा है वह फोरलेन पुल से चंद कदम की दूरी पर है। यदि इसी तरह रेत निकलता रहा तो पुल के पाए को हिलने में ज्यादा वक्त नहीं लगेगा। इसके पहले भाजपा सरकार के समय रेत चोरों ने पुरकाडीह पुल के पाए को हिला चुके है। बाद में लाखों रुपए खर्च कर पुल के पाए की मरम्मत की गई। खनिज विभाग के अधिकारी शिकायत के बाद जब मौके पर पहुंचते हैं तो रेत माफिया अपनी गाड़ी और पोकलेन लेकर फरार हो जाते हैं। जानकारी देते चलें कि करीब 8 साल पहले तुर्काडीह पुल के पास भी रेत माफियों ने उत्खकन कर शासन को करोड़ों रूपयों का नुकसान पहुंचाया है। माफियों ने रेत का इतना उत्खनन किया कि पुल का पीलर बेस भी दिखाई देने लगा था। संभावित खतरे को देखते हुए जिला प्रशासन ने पुल से आवागमन बन्द कर दिया। लाखों रूपयों से मरम्मत के बाद पुल को खोला गया। कमोबेश सेन्दरी स्थित पुल की भी यही स्थिति होने वाली है। पुल से नेशनल हाइवे की फोर लेन सड़क गुजरती है। दूर से ही आसानी से देखा जा सकता है कि मात्र पचास मीटर की दूरी पर प्रतिदिन सुबह 5 बजे से दोपहर तक सैकड़ों हाइवा रेत मुफ्त में उत्खनन किया जाता है। कोई कार्रवाई भी नही होती है। इसके चलते रेत माफियों के हौसले बुन्द है। गुरूवार को करीब साढ़े 9 बजे मौके पर पाया गया कि रेत माफिया अपने आदमियों को खड़ा कर दो पोकलेन से ताबड़तोड़ रेत का उत्खनन करवा रहा है। इतना ही नहीं रेत परिवहन के लिए रास्ता भी तैयार किया जा रहा है। स्थानीय किसान ने बताया कि उनकी जमीन से जबरदस्ती रेत परिवहन के लिए रास्ता तैयार किया जा रहा है। चूंकि माफिया रसूखदार है। इसलिए मुंह बन्द रखने में ही जान की खैर है। कुछ पैसे भी मिल जाते हैं। रेत उत्खनन करने वालों ने बताया कि प्रतिदिन 100 हाइवा रेत निकालते हैं। एक हाइवा रेत तीन हजार रूपयों में बंटता है। पुलिस को भी खिलाना पड़ता है। सरपंच को भी देना पड़ता है। रेत उत्खनन करने वाले यह भी बताया कि बिना सरपंच और नेता के आशीर्वाद बिना इस समय अरपा से रेत निकालना मुश्किल है। बहरहाल फोर लेन पुल से चन्द कदम दूर सेन्दरी स्थित अरपा नदी से करीब 100 हाइवा रेत का उत्खनन रोजाना किया जा रहा है। नागरिकों में इस बात को लेकर गहरा आक्रोश है। स्थानीय लोगों ने बताया कि य़दि रेत का अवैध उत्खनन नही रोका गया तो उग्र आंदोलन करेंगे। हम फोर लेन पुल को तुर्काडीह पुल नहीं बनने देंगे। मामले में जिला प्रशासन प्रमुख कलेक्टर से भी शिकायत करेंगे।
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