बिलासपुर। सरकार की नीतियों से निर्माण कार्य से जुड़े ठेकेदारों में आक्रोश पनप रहा है। बुधवार को बैठक करके ठेकेदारों ने अपनी समस्या सरकार के सामने रखने का निर्णय लिया है। समस्या का समाधान नही होने पर आंदोलन का रास्ता अख्तियार करने का फैसला लिया गया है।

बुधवार को छत्तीसगढ़ ठेकेदार संघ की एक बैठक आयोजित की गई और ठेकेदारी को लेकर सरकार के निर्णय पर विस्तार से चर्चा किया गया। संघ ने अपनी समस्याओं को पांच बिन्दु के रूप में शासन के सामने रखने का फैसला किया है। बैठक के बाद संजीव तिवारी अनिल अग्रवाल,सौरभ मिश्रा समेत कई ठेकेदारों ने बताया कि कोरोना काल से लेकर अब तक ठेकेदारों की स्थिति बद बदतर हो चुकी है। बावजूद इसके राहत देने के बजाए नए – नए नियम बनाकर ठेकेदारों को परेशान करने पर तुली हुई है। ठेकेदारों का कहना है कि रायल्टी दरों में कटौती उन्हें स्वीकार हैं। लेकिन बाजार दर में कटौती किया जाना उचित नहीं है। वर्तमान समय में यदि पत्थर, रेत, मिट्टी और मुरूम में यदि बाजार दर के अनुसार कटौती होती है तो ठेकेदारों को घर बेचकर निर्माण कार्य करना पड़ेगा। यह जानते हुए भी कि ठेकेदारों को कई प्रकार के टैक्स का सामना करना पड़ता है। ऊपर से निर्माण कार्यों का रखरखाव की भी जिम्मेदारी ठेकेदारों की है। ऐसी परिस्थिति में निर्माण कार्य करना संभव नहीं है। ठेकेदारों ने बताया कि लोक निर्माण विभाग में पांच साल, जल संसाधन विभाग में रखरखाव मियाद 10 साल है। जो पूरी तरह से अव्यवहारिक है। जबकि एडीबी ,पीएमजीएसवाय योजना के निर्माण कार्यों का रखरखाव विभाग से किया जाता है। ठेकेदार संघ की मांग है कि रखरखाव की आर्थिक जिम्मेदारी सरकार करे। ठेकेदारों ने नाराजगी जाहिर करते हुए कहा कि पीडब्लूडी विभाग में थर्ड पार्टी चेकिंग की शर्त है। हमारी मांग है कि चेकिंग समय पर किया जाए। इसके अलावा सुरक्षा निधि को थर्ड पार्टी चेकिंग के दायरे से अलग रखा जाए। साथ ही काम खत्म होते ही सुरक्षा निधि को तत्काल रीलीज किया जाए। इस दौरान ठेकेदारों ने बेरोजगार युवकों को मौका दिए जाने को लेकर खुशी जाहिर की। ठेकेदारों ने बताया कि समें सुधार की काफी कुछ संभावना है। शर्तों के अनुसार बेरोजगार युवक ई.पंजीयन के बाद एक साल तक ब्लाक स्तर पर पचास लाख रूपए का निर्माण कार्य करवा सकते हैं। जबकि बस्तर क्षेत्र में यही काम मैन्यूल टेण्डर प्रक्रिया के तहत किया जा रहा है। हम चाहते हैं कि पूरे प्रदेश में मैन्यूल टेण्डर प्रक्रिया को शुरू किया जाए। इसका फायदा बेरोजगार नए ठेकेदारों को होगा नाराजगी जाहिर करते हुए ठेकेदारों ने बताया कि ठेकेदारों को निर्माण कार्य के बाद लोकनिर्माण विभाग में भुगतान के लिए नाक से लेकर चप्पल घिसटना पड़ता है। इसलिए शासन से हमारी मांग है कि किसी भी कार्य के पूर्ण होते ही तत्काल भुगतान की व्यवस्था की जाए। ठेकेदारों ने पांच सूत्रीय मांग पर जोर देते हुए कहा कि यदि प्रशासन ने हमारी मांग को गंभीरता नहीं लिया गया तो मजबूर होकर संगठन को ठेकेदारों के हित में संंवैधानिक कदम उठाने को मजबूर होना पड़ेगा।
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