बिलासपुर। आशीर्वाद वैली के बिल्डर ने जमीन की चोरी कर अपने ही उपभोक्ताओं को लाखों का चूना लगाया है। बिल्डर ने प्लाट की जो साइज बताकर सौदा किया उन सभी प्लाटों में बड़ी चतुराई के साथ कटौती कर दी है। विडंबना तो ये है की वहां मकान खरीदने वालों को पता ही नहीं है की बिल्डर उनको लंबा चुना लगाकर निकल गया है।
किसी भी कालोनी के बिल्डर और डेवलपर अपने ही उपभोक्ता को कैसे चुना लगाकर संपत्ति बटोरते है इसकी बानगी देखना है तो रायपुर रोड में बने आशीर्वाद वैली देख आइए। यहां पर बिल्डर ने प्लाट की साइज में कटौती करके उपभोक्ताओं को चुना लगाकर करोड़ों रुपए अपनी जेब में डाल लिए। विडंबना तो ये है कि कालोनी में मकान खरीदने वाले कम जमीन और ज्यादा पैसा देकर भी मौन है। बिल्डर के खिलाफ बोलने की हिम्मत कोई नही कर पा रहा है। दरअसल आशीर्वाद बिल्डकॉन को 13 मई 2014 को 11 शर्तों के साथ भवन निर्माण की अनुमति दी गई थी। इसके अनुसार 15.49 एकड़ में ए टाइप 48 प्लाट, बी टाइप 86 और सी टाइप 26 प्लाट काटकर मकान बनाने की अनुमति दी गई थी। बिल्डर ने कालोनी का जो ले आउट बनाकर शासकीय विभागों में जमा किया है उसमे प्लाट की साइज A टाइप का 21 सौ स्क्वेयर फिट, बी टाइप का 1481 स्क्वेयर फिट और सी टाइप के प्लाटों की साइज 1267 स्क्वेयर फिट बताया गया है। कालोनी में मकान का सौदा करते समय भी बिल्डर ने अपने ग्राहकों को यही साइज बताकर सौदा किया। यही नहीं जब रजिस्ट्री हुई तब भी दस्तावेजों में यही साइज दर्ज है। लेकिन बिल्डर बड़ी चालाकी से ए और सी साइज के प्लाट में कटौती कर दी है। ए टाइप के प्रत्येक प्लाटों में 130 स्क्वेयर फिट की कटौती करके 48 प्लाटों से लगभग पांच हजार स्क्वेयर फिट जमीन चुरा लिए। इसी तरह सी टाइप के प्रत्येक प्लाट से करीब 300 स्क्वेयर फिट की कटौती कर 63 प्लाट से लगभग 19 हजार स्क्वेयर फिट जमीन की चोरी कर ली। मजेदार बात तो ये है की लोगों मकान खरीदकर अपने अपने मकान में रहने भी लगे है। लेकिन बिल्डर ने उन्हें जो चुना लगाया है उसका उनको भनक तक नहीं। कालोनी में मकान खरीदने वालों ने ज्यादा जमीन का पैसा दिया और उनके हाथ काम जमीन लगी। दूसरी ओर काम जमीन में कम निर्माण करके मटेरियल चार्ज और लेबर चार्ज भी बचा लिए। यदि वास्तविक जमीन में बिल्डर मकान का निर्माण करता तो मकान खरीदने वालों को जमीन भी ज्यादा मिलती और बिल्डर का निर्माण लागत भी ज्यादा होता। लेकिन जमीन की चोरी करके बिल्डर न केवल जमीन बचाया बल्कि अपनी निर्माण लागत भी घटा लिया।
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