बिलासपुर। भाजपा नेता और बिल्हा जनपद पंचायत के पूर्व उपाध्यक्ष विक्रम सिंह जिला पंचायत के सामान्य सभा की बैठक में फर्जी तरीके से शामिल हो रहे थे। बैठक में विवाद होने के बाद रजनीश सिंह ने प्रतिनिधि बनाए जाने को लेकर एक पत्र जारी किया है जो एक महीने पहले की है। अब सवाल ये उठ रहा है की पिछले तीन साल से विक्रम सिंह किस हैसियत से बैठक में शामिल हो रहे थे।
जिला पंचायत सामान्य सभा की बैठक में हंगामा करना विक्रम सिंह को भारी पड़ रहा है। क्योंकि जिला पंचायत अध्यक्ष ने उनकी कुंडली खंगाली तो पता चला कि वो पिछले तीन साल से सामान्य सभा की बैठक में फर्जी तरीके से शामिल हो रहे थे। सामान्य सभा की बैठक में वो बेलतरा रजनीश सिंह के प्रतिनिधि बनकर बैठक में शामिल हो रहे थे। जबकि रजनीश सिंह ने उसे अपना प्रतिनिधि बनाने के लिए जिला पंचायत में कोई पत्र ही जारी नहीं किया है। 24 नवंबर की बैठके में हंगामा करने के बाद जब अध्यक्ष ने अधिकारियों से उनकी नियुक्ति पत्र के बारे में जानकारी मांगी तो बेलतरा विधायक का कोई पत्र नहीं मिला। जबकि जिला पंचायत में बिल्हा विधायक धरम लाला कौशिक, सांसद श्रीमती ज्योत्सना महंत और कोटा विधायक श्रीमती रेणु जोगी के प्रतिनिधि नियुक्ति करने का पत्र तो मिला लेकिन बेलतरा विधायक का कोई पत्र नहीं मिला। मतलब साफ है कि विक्रम सिंह फर्जी तरीके से सामान्य सभा की बैठक में शामिल हो रहे थे।
बताया जा रहा है की जैसे ही अध्यक्ष द्वारा नियुक्ति पत्र खोजबीन और पूछताछ करने की जानकारी विक्रम सिंह को हुई तो आनन फानन में रजनीश सिंह के लेटरपैड पर प्रतिनिधि बनाने का पत्र जारी किया गया है। लेकिन यह नियुक्ति पत्र 2 नवंबर 2022 को जारी किया गया है। जबकि विक्रम सिंह तीन साल से बैठक में शामिल हो रहा है। यही नहीं ये नियुक्ति पत्र भी गुपचुप तरीके से जमा किया गया है। इस पत्र को जिला पंचायत के रिकार्ड में लाने के लिए जिला पंचायत में पदस्थ एक अधिकारी की भूमिका संदिग्ध है। इस पत्र को लेकर अब आगे चलकर जांच हो सकती है। क्योंकि जिला पंचायत के कुछ सदस्यों को लग रहा है की वह अधिकारी भाजपा के एजेंट के रूप काम कर रहा है और जिला पंचायत की गोपनीय जानकारी भी वह भाजपा नेताओं को उपलब्ध करा रहा है।
जिला पंचायत में 14 दिसंबर की सामान्य सभा की बैठक में बैठक व्यवस्था को लेकर भाजपा नेता विक्रम सिंह और अशोक कौशिक ने जमकर हंगामा मचाया था। जिसके चलते समान सभा की बैठक को करीब 45 मिनट तक रोकना पड़ा था। दोनो ने विधायक प्रतिनिधियों का अपमान करने का आरोप लगाते हुए जमीन में बैठ गए थे। इसके बाद भाजपा नेताओं ने अन्य सदस्यों के साथ बैठक का बहिष्कार कर दिया था। हालांकि विक्रम सिंह और अशोक कौशिक को छोड़कर बाकी सदस्य बैठक में लौट आए थे।
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