बिलासपुर। आंख, हृदय, किडनी, प्रेग्नेंट महिला, लीवर और मोटापे में मधुमेह का कनेक्शन और इससे होने वाले दुष्प्रभाव की जानकारी देने को लेकर बिलासपुर में 2 दिनों तक प्रख्यात डॉक्टरों की कार्यशाला आयोजित की जा रही है। पूरे हिंदुस्तान से करीब 3 सौ पचास एमडी डॉक्टर यहां आकर कार्यक्रम में हिस्सा लेंगे और अपने अनुभव के साथ ही मधुमेह को नियंत्रित करने आवश्यक जानकारी देंगे। इस संबंध में गुरुवार को प्रेस क्लब में डॉ प्रवीण कालवीट, डॉ अविजीत रायजादा, डॉ विजय कूपटकर और डॉ पवन अग्रवाल ने पत्रकारों से चर्चा करते हुए दो दिवसीय कार्यक्रम की जानकारी दी। उन्होंने बताया की पांचवी राज्य स्तरीय “एनुवल कॉन्फ्रेंस ऑफ रिसर्च सोसायटी फॉर द स्टडी ऑफ डायबिटीज इन इंडिया” विषय पर 4 और 5 फरवरी को होटल कोर्टयार्ड मैरियट में कॉन्फ्रेंस का आयोजन किया गया है। जिसमें प्रदेश के अलावा देश भर से करीब 350 एमडी डॉक्टरों की टीम आ रही है, जो अपने-अपने अनुभव और इलाज को लेकर अपनी बातें रखेंगे। उन्होंने बताया कि छत्तीसगढ़ में यह पहली बार बड़ा कॉन्फ्रेंस डायबिटीज को लेकर अयोजित किया जा रहा है जिसमे 20 राष्ट्रीय स्तर के विशेषज्ञ जिनमे डॉ बंशी साबू, राष्ट्रीय और IDF सार्क देशों के अध्यक्ष B M मक्कड़, डायबटीज़ सोसायटी के राष्ट्रीय अध्यक्ष आ रहे हैं। पटना से अजय कुमार दिल्ली से डॉ मक्कड़, विनोद मित्तल, मुंबई से मंगेश तिवास्कर और विजय नेगालुकर, बंगलुरु से डॉ अरविंद, श्रीनगर से डॉ अब्दुल जरगर, लखनऊ से अनुज माहेश्वरी और नरसिंह वर्मा के अलावा नागपुर से डॉ सुनील गुप्ता, प्रकाश खेतान और सुनील अम्बुलकर आ रहे हैं। इसमें खास बात यह भी है कि 50 पीजी डॉक्टर भी इसमें जानकारी लेने शामिल होंगे। इस दौरान टाइप वन के 21 बच्चों को ग्लूकोमीटर उपलब्ध कराया जाएगा। डायबिटीज क्यों और कैसे होता है इसकी रोकथाम के लिए क्या-क्या उपाय किए जा सकते हैं इस संबंध में सभी विशेषज्ञ डॉक्टर अपनी अपनी राय रखेंगे। चेन्नई, बेंगलुरु, पटना, लखनऊ सहित अन्य राज्यों से आकर डॉक्टर लोगों को जागरूक करेंगे। डायबिटीज का ट्रीटमेंट सस्ता हो और सब तक पहुंचे इसे लेकर भी जागरूकता फैलाई जाएगी। डॉक्टरों ने बताया कि अगर जागरूकता आ जाए तो 50 फ़ीसदी मरीज मधुमेह को खुद से नियंत्रण कर सकते है। पत्रकारों से चर्चा करते डॉक्टरों ने बताया कि भारत देश में जितनी सस्ती दवाईया मिलती हैं उससे सस्ती दुनिया में कहीं और नहीं मिलती। डायबिटीज को रोकने और उसके नियंत्रण के लिए शासन की विभिन्न योजनाएं भी काम कर रही हैं। उन्होंने बताया कि सप्ताह में 1 दिन इंसुलिन लेने वाली पद्धति 2023 के अंतिम तक देश में आ जाएगी। डायबिटीज के लिए सबसे बड़ा कारण बताते हुए डॉक्टरो ने जानकारी दी कि पहले की तरह इंसान आजकल मेहनत नहीं कर रहा है खान-पान में भी लापरवाही बरती जा रही है। लोगों की दिनचर्या भी बदल चुकी है। जीवन शैली परिवर्तन का ही सबसे बड़ा कारण डायबिटीज का घर का जाना है। अब यही कारण है कि इंडिया को डायबिटीज का कैपिटल भी कहा जाने लगा है। होटल मेरियट में आयोजित इस कार्य कार्यशाला को यु ट्यूब के जरिये लाइव किया जाएगा। डॉ कुपटकर, डॉ पंकज, डॉ पवन, डॉ मनोज राय का इसमे सक्रिय योगदान है।
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