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बिलासपुर। वन विभाग बिलासपुर की ओर से कोपरा जलाशय में आयोजित पक्षी महोत्सव फ्लॉप शो साबित हो गया है। इस आयोजन में वन विभाग के अधिकारी-कर्मचारी और वालेंटियर्स के अलावा कोई नहीं पहुंचा। आखरी में कुछ कर्मचारियों को कोपरा गांव भेजकर बनिहार बुलाना पड़ा, तब कहीं जाकर खाली कुर्शियां भर पाई। आयोजन में वन विभाग ने पक्षी प्रमियों को पूरी तरह से बाहर रखा। दुकान सजाने के चक्कर मे एक बेहतर आयोजन का गुड़ गोबर कर दिया गया।


वन विभाग राज्य सरकार की बेहद मलाईदार विभाग माना जाता है। यहां अरबों रुपए के काम केवल कागजों कर दिए जाते है और किसी को खबर तक नही लग पाती। यही कारण है कि इस विभाग की मलाई पाने नेता, मंत्री, अधिकारी, ठेकेदार और बड़े पेट वाले एनजीओ की नजर रहती है। विभाग के हर आयोजन में ऐसे लोग हिस्सेदारी पाने के लिए अपनी भूमिका तलासते रहते है। लेकिन कई लोगों को असफलता ही मिलती है। क्योंकि विभाग में बैठे अधिकारी सब पहले है ही तय कर देते है कि किसे क्या करना है और कितनी मलाई से उसे संतुष्ट रहना। यही खेल ”पक्षी महोत्सव 2021” के साथ हो गया। जैसे ही लोगों को पता चला कि वन विभाग पक्षी महोत्सव कराने वाला है कई गिरोह एक साथ सक्रिय हो गए। क्योकि ये महोत्सव केवल एक साल के लिए नही है। इसे हर साल होना है और इसके लिए हर साल बजट आना है। लिहाजा लोग अपने लिए हर साल मलाई की ब्यवस्था करने में लग गए। विभाग भी मलाई का बड़ा हिस्सा अपने पास रखने के लिए आयोजन की कमान अपने पास रख लिया और पंचामृत के हिसाब से कुछ नए लड़कों की टीम को जोड़ लिया। आज के पक्षी महोत्सव में भी यही लड़के वॉलिंटियर्स के रूप में नजर आए। आयोजन को ध्यान में रखते हुए विभाग के अधिकारी भी शुट बूट मारके दूल्हे की तरह पहुंच गए। उनको लग रहा था कि वालिंटियर लड़के-लड़कियों की पूरी फौज लेकर आए होंगे। लेकिन वहां पहुंचने के बाद पता चला कि यहां तो विभाग के कर्मचारियों और वोलेंटियर्स के अलावा कोई नही है। तब अधिकारियों ने सेंट्रल यूनिवर्सिटी से फॉरेस्ट्री के बच्चों को बुलाया, विभाग के कुछ कर्मचारियों को कोपरा गांव भेजकर ग्रामीणों को बुलवाया गया। तब कहि जाकर मंच के सामने रखी कुर्सियां भर पाई। जब कुर्सियां भारी तब कहि जाकर कार्यक्रम शुरू हुआ।

00 20 लाख खर्च क्या किए पता नहीं
विभागीय सूत्रों की माने तो इस कार्यक्रम के लिए वन विभाग ने 20 लाख रुपए खर्च किए है। विभाग के लिए तो ये राशि ऊंट के मोह में जीरा जैसा मामला है। लेकिन जो लोग मलाई खाने के इरादे से ही वन विभाग के अधिकारियों के इर्दगिर्द घूमते है उनके लिए पर्याप्त है। फिलहाल अधिकारियों ने 20 लाख रुपए किस चीज में खर्च किए है ये किसी नही पता है।
00 पक्षी प्रेमियों को रखा बाहर का रास्ता
इस पूरे आयोजन में शहर के पक्षी प्रमियों को दूर रखा गया है। हालांकि आयोजन की तैयारी के दौरान वन विभाग के अधिकारियों ने पक्षी प्रमियों का भरपूर उपयोग किया। लेकिन जैसे ही तैयारी पूरी हुई दूध से मक्खी की तरह उन्हें अलग कर दिया गया। शहर के पक्षी प्रेमी अपनी भूमिका को लेकर मुंह ताकते रह गए। यह बताना लाजमी है कि शहर में दर्जनभर से ज्यादा लोग पिछले 8 – 10 साल से पक्षियों पर काम कर रहे है। उन्हें पता है कि किस जलाशय में कितने प्रवासी पक्षी आते है और वो किस देश से आते है। कई पक्षी प्रेमियों के पास तो दो सौ से लेकर ढाई सौ तक के पक्षियों के जीवंत फोटोग्राफ्स है और वो भी स्वयं का खिंचा हुआ।
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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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