बिलासपुर। अरपा नदी के शिवघाट में बन रहे बराज के निर्माण में घोर लापरवाही बरती जा रही है। बराज के नीचे बन रहे फ्लोर में ठेकेदार ने न तो बेस बनाया है और न ही निर्माण में गुणवत्ता का ध्यान रख रहा है। जिस हिसाब से फ्लोर के निर्माण में भ्रष्टाचार किया जा रहा है उसको देखने से ही स्पष्ट हो रहा है की यह पहली बारिश में ही बह जाएगा। ढलाई में मसाला कैसे बनाना है ये मजदूर ही तय कर रहे है। ठेकेदार का कोई इंजीनियर मौके पर मौजूद नहीं रहता।
अंतः सलिला अरपा में बन रहे बराज को लेकर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल जितना संवेदनशील है सिंचाई विभाग के अधिकारी और ठेकेदार उतना ही लापरवाह और भ्रष्ट नजर आ रहे है। बराज निर्माण को लेकर विभाग के अधिकारी शुरू से ही बंदरबाट में लगे हुए है। सरकंडा के शिवघाट में बन रहे बराज निर्माण के कार्य को देखने से लग रहा है की विभाग के अधिकारी और ठेकेदार मुख्यमंत्री भूपेश बघेल और सिंचाई मंत्री रविन्द्र चौबे की इज्जत सड़क में लाने की तैयारी कर चुके है। सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने पहले तो इसके टेंडर में बंदरबाट किया टेंडर पास होने के बाद ठेकेदार को करोड़ों का लाभ पहुंचा दिया। अब इसके निर्माण में भी भारी लापरवाही बरती जा रही है। बराज के निर्माण में सरिया और सीमेंट से लेकर मिक्सचर बनाने में घोर लापरवाही बरती जा रहे है। बराज के फाउंडेशन की कहानी शुरू होगी तो अधिकारी और ठेकेदार को जेल की हवा खानी पड़ सकती है। अभी ताजा मामला बराज के फ्रंट में बन रहे फ्लोर का सामने आ रहा है। ठेकेदार ने फ्लोर निर्माण को इतना हल्के में ले रहा है की पहली ही बारिश वह बह जाए तो आश्चर्य की बात नहीं होगी। ठेकेदार बिना बेस बनाए फ्लोर का निर्माण कर रहा है। ढलाई में जो मिक्सचर उपयोग किया जा रहा है उसमें रेत और गिट्टी तो दिख रहा है लेकिन सीमेंट नजर नहीं आ रहा है। अब स्वाभाविक रूप से कल्पना की जा सकती है की बिना बेस के गुणवत्ताहीन फ्लोर कितने दिन टिकेगा। यह फ्लोर नदी के एक छोर से दूसरे छोर तक बनना है। इस फ्लोर के निर्माण में हो ठेकेदार और विभाग के अधिकारी मिलकर डेढ़ से दो करोड़ रुपए का वारा न्यारा कर देंगे। विडंबना तो ये है की करोड़ों के इस प्रोजेक्ट की देखरेख करने के लिए मौके पर कोई अधिकारी रहते ही नही। पूरा बराज मजदूरों के भरोसे चल रहा है। ठेकेदार की ओर से भी कोई इंजीनियर मौके पर मौजूद नहीं रहता। ढलाई में कितना सीमेंट, कितना गिट्टी और कितना रेत मिलना है ये सब काम मजदूर अपने अनुभव और आकलन पर कर रहे है।
00 ब्लाक गायब
अनुबंध की शर्तों के अनुसार बराज के नीचे बन रहे फ्लोर की ढलाई ब्लाक बनाकर किया जाना है। लेकिन ठेकेदार इसकी अनदेखा करते हुए 25 – 25 फिट लंबा ढलाई एक साथ कर रहा है। विडंबना तो ये है की ढलाई के वक्त निर्माण स्थल पर सिंचाई विभाग का एक अधिकारी भी मौजूद नहीं था।
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