अरुंधति राय ने गांधी और अम्बेडकर को एक दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास किया – रघु ठाकुर

बिलासपुर। समाजवादी विचारक और चिंतक रघु ठाकुर का कहना की अरुंधति राय ने अपनी पुस्तक ‘एक था डॉक्टर, एक था महात्मा’ में गांधी और डॉ अम्बेडकर को एक दूसरे के खिलाफ खड़ा करने का प्रयास किया है। जबकि ऐसा नही है, अम्बेडकर ज्यादातर मामलों में पहले गांधी से असहमत रहते थे लेकिन बाद में उनसे सहमत भी होते थे। पहले अम्बेडकर आदिवासियों को वोटिंग पॉवर देने के खिलाफ थे लेकिन जब संविधान बनाने का समय आया तो गांधी से सहमति जताते हुए सबको वोटिंग पॉवर देने पर सहमत हुए।

रघु ठाकुर ने अपनी किताब ”गांधी-अम्बेडकर, कितने दूर-कितने पास” पर डीपी विप्र महाविद्यालय में रखे गये व्याख्यान के अवसर पर यह बात कही। उन्होंने बताया कि इसे उन्होंने अरुंधति राय की किताब के जवाब में लिखा है ताकि देश के सामाजिक उत्थान में योगदान देने वाले दो महान पुरुषों को एक दूसरे के विरुद्ध खड़े करने की प्रवृति का हम प्रतिरोध करें। ठाकुर ने कहा कि महान पुरुषों को साहित्य के जरिये एक दूसरे के खिलाफ खड़ा करना खतरनाक है। यह एक हिंसक प्रवृत्ति है। हमें यह देखना होगा कि गांधी और अम्बेडकर की जो मुलाकातें हुई हैं उनमें वे कितना बदले। दलितों को समान अवसर और अधिकार दिलाने की मंशा दोनों की साफ थी। गांधी सामाजिक परिवर्तन के माध्यम से दलितों को अधिकार दिलाना चाहते थे, वो चाहते थे अगड़ी समाज के लोग इसकी पहल खुद से करें। वो कहते थे कि समाज को बदलना होगा। केवल कानून बना देने से काम नही चलेगा। लेकिन अम्बेडकर दलितों को कानून के माध्यम से अधिकार दिलाना चाहते थे। अम्बेडकर का लक्ष्य दलितों को उनका हक दिलाना था, गांधी का इससे बड़ा लक्ष्य देश को गुलामी से आजाद कराना था। अम्बेडकर ने कई बार कहा, यदि उन्हें देश और समाज के बीच चुना करना पड़ा तो समाज को प्राथमिकता देंगे। इसके बावजूद उन्होंने एक भी दलित नेता पैदा नही कर पाए। जबकि गांधी ने इस देश मे कई दलित नेता पैदा किए। रघु ठाकुर ने कहा अम्बेडकर कहा करते थे उनके दो दुश्मन है पहला ब्राम्हणवाद और दूसरा पूंजीवाद। ब्राम्हणवाद के खिलाफ तो वे जीवनभर बोलते और लड़ते रहे लेकिन पूंजीवाद को लेकर खामोश रहे। बल्कि कई मायने में अम्बेडकर और उनके अनुयायी इसका लाभ उठाते रहे। श्री ठाकुर ने कहा की जो अम्बेडकरवादी गांधी को गाली देते है वो अम्बेडकरवादी नही हो सकते, ऐसे अमेडकरवादी केवल तोतारटंत अम्बेडकरवादी है। उन्होंने कहा कि कोई भी व्यक्ति आलोचना से परे नहीं होता है, चाहे वह कितना भी महान क्यों न हो। बस हमें उनके अच्छे विचारों को आत्मसात करना चाहिये और जो जरूरी नहीं उसे छोड़ देना चाहिये। गांधी या अम्बेडकर ने खुद कभी नहीं कहा कि वे गांधीवाद या अम्बेडकरवाद लेकर आये हैं। वे दोनों समय-समय के साथ अपने विचारों को बदलते, परिष्कृत करते गये हैं।रघु ठाकुर ने कहा कि आज यदि अम्बेडकर का तन (दलित) और गांधी का मन (विचार) साथ हो जाये तो दुनिया ही बदल जाये। हमें उनके समतामूलक समाज की संरचना पर जोर देने की जरूरत है। विषय प्रवर्तन करते हुए महाविद्यालय शासी निकाय के सदस्य राजकुमार अग्रवाल ने कहा कि यह कार्यक्रम भारत विचार संस्थान के सहयोग से रखा गया है। देश के नायकों को एक दूसरे के विरुद्ध खड़ा करने की प्रवृति खतरनाक है। यह संवाद की प्रक्रिया बंद कर हमें आपस में लड़ाती है। विचार का मुक्त प्रवाह हो, जो किसी राजनीतिक दल, विचारधारा, वाद से परे भारत का विचार हो। उन्होंने कहा कि महाविद्यालय के संस्थापक पं. रामनारायण शुक्ल की स्मृति में राष्ट्रीय व्याख्यान मालाओं की कड़ी में यह पहला आयोजन है। प्रमुख वक्ता आनंद मिश्रा ने कहा कि गांधी और अम्बेडकर दोनों ही सामाजिक समानता के चिंतक थे और वास्तविक लोकतंत्र की स्थापना चाहते थे। अम्बेडकरवादी विचारक कपूर वासनिक ने बताया कि गांधी और अम्बेडकर के विचारों में फर्क जरूर था लेकिन वे दोनों एक दूसरे को सम्मान देते थे। अम्बेडकर को पूना पैक्ट से भी विरोध नहीं था, उन्हें उस वक्त के कांग्रेस के नेताओं के रवैये से नाराजगी थी। साहित्यकार रामकुमार तिवारी ने कहा कि देश में संवाद और विचार-विमर्श का अभाव पैदा होता जा रहा है। हमें पाश्चात्य दृष्टिकोण से लिखी गई किताबों में उप निवेशवाद को समर्थन दिखाई देता है। रघु ठाकुर की किताब भारतीयों को हीन भावना से बाहर निकालती है और हमें विचार विमर्श का अवसर देत है। कार्यक्रम के प्रारंभ में महाविद्यालय शासी निकाय के अध्यक्ष अनुराग शुक्ला ने कहा कि छत्तीसगढ़ के इस सबसे बड़े महाविद्यालय में व्याख्यानमाला की परम्परा पं. रामनारायण शुक्ल ने शुरू की थी और यहां लगातार ऐसे आयोजन होते रहे हैं। कोरोना की अवधि में भी अनेक वेबिनार हुए अब कॉलेज परिसर में व्याख्यान मालाओं की श्रृंखला फिर शुरू किये जा रहे हैं जिससे न केवल छात्र-छात्राओं बल्कि समाज को भी लाभ होगा। प्राचार्य अंजू शुक्ला ने अतिथियों का आभार व्यक्त किया। छात्र संघ प्रभारी डॉ. एमएस तम्बोली ने कार्यक्रम का संचालन किया। अतिथियों के हाथों अंग्रेजी विभागाध्यक्ष डॉ. संजय तिवारी की पुस्तक साइको ऑ शेक्सपियर्स ट्रेजेडीज़ का विमोचन किया गया। कार्यक्रम को सफल बनाने में डॉ.विवेक अम्बलकर, डॉ. मनीष तिवारी, डॉ. एम.एल. जायसवाल, प्रो. ए.श्रीराम, डॉ. आभा तिवारी, प्रो. जयंत राय प्रो. किरण दुबे, प्रो. प्रदीप जायसवाल, प्रो. रूपेन्द्र शर्मा, एस.आर. चन्द्रवंशी प्रो. यूपेश कुमार, प्रो. रीना ताम्रकार, चन्द्रभान सिंह राजपूत, तोरण यादव महाविद्यालय आशीर्वाद पैनल के मनीष मिश्रा अन्य छात्र तथा एन.एस.एस की छात्रा शारदा श्रीवास एवं रीना शर्मा का योगदान रहा।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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