राजस्व अधिकारियों की करतूत देखिए, पहले जंगल की जमीन का पट्टा बन गया, फिर बिक भी गया, इसके बाद 4 सौ फीट चलकर मेन रोड में आ गया

बिलासपुर। मोपका में एक जमीन लगभग चार सौ फीट चलकर मेन रोड में गई है। यही नहीं चलने के पहले ये जमीन पट्टे की थी जो बिक भी गई। पट्टा बनने के पहले ये बड़े झाड़ का जंगल भी था। जंगल की जमीन का पट्टा नही बन सकता लेकिन बना ? पट्टे की जमीन बिक नही सकती लेकिन बिकी ? जमीन चलकर एक स्थान से दूसरे स्थान पर नही जा सकती ? लेकिन गई । ये सब तरह चमत्कार किए है राजस्व विभाग के अधिकारियों ने।

कायदा कानून कोर्ट में चलता होगा धरातल में तो नोट का ही चलवा-चलती है। यदि मामला पटवारी, आरआई और तहसीलदार के पास हो तो चलता उसी है जिसके पास सिक्के की खनक ज्यादा हो और जमीन सरकारी हो और लोकेशन अच्छा हो तो फिर क्या कहने। ताजा मामला मोपका धान मंडी के पास का है। यहां पर एक जमीन है जिसका खसरा नंबर 993/1/क है और रकबा 139.80 एकड़ है। राजस्व रिकार्ड में ये जमीन बड़े झाड़ का जंगल है। खसरा नंबर 993/1/ज इसी जमीन हिस्सा है और इसका रकबा 2.00 एकड़ है। अब सवाल खड़ा होता है कि जंगल की जमीन किसी के नाम पर चढ़ा कैसे ? यही से सिक्को खनक और पटवारी-तहसीलदार की भूमिका शुरू होती है। उन्होंने अपनी भूमिका बखुबी निभाया और जंगल की जमीन का नामांतरण हो गया निजी ब्यक्ति के नाम पर। दर असल जंगल की जमीन का पट्टा बनाया गया था। जिसके कारण एक नायब तहसीदार की बर्खास्तगी हुई थी। इस कार्रवाई के बाद मामला ठंडे बस्ते में चला गया। लंबे समय बाद इस पट्टे की जमीन पटवारी और तहसीलदार की मेहरबानी से बिक भी गई है। जबकि नक्शा में खसरा नम्बर 993/1/ज का बटांकन दर्ज नही है। वही देखा जाय तो ऑनलाइन नक्शा में पूर्ब से खसरा नंबर 993/1/ज का बटांकन दर्शित है। परंतु भमिूस्वामी मेसर्स मां अमोला बिल्डर बिलासपुर द्वारा भागीदार शशीकांत कश्यप पिता कामता प्रसाद कश्यप निवासी जरहाभाटा का वर्तमान मौका कब्जा उक्त बटांकित नक्शा से लगभग 350 फुट दूरी पर मोपका से धान मंडी वाली मुख्य मार्ग पीडब्ल्यूडी सड़क पर है। जिस पर वर्तमान में विवाह भवन रवि हाइटस बना हुआ है। जबकि देखा जाय तो नक्शा में खसरा नंबर 993/1/ज का बटांकन नही है एवं खसरा नंबर 993/1/क लिखा है। अमोला बिल्डर्स वर्तमान में जिस भूमि पर काविज है नक्शा के अनुसार खसरा नंबर 993/1 का भाग है जो कि खसरा पंचसाला में खसरा नंबर 993/1/क रकबा 139.80 एकड़ बड़े झाड़ का जंगल छत्तीसगढ़ शासन प्रबंधक कलेक्टर लिखा है। पूर्व के रिकार्ड वर्ष 1991-92 में संशोधित प्रविष्ट में म प्र दर्ज है एवं कलम 12 कैफियत में आदेश का हवाला दिया गया है जो की छाया प्रति खसरा पंच साला में स्पष्ट दिख रहा है। वही देखा जाए तो रजिस्ट्री बैनामा दिनांक 13 7 2010 की छायाप्रति में संलग्न दस्तावेजों के अवलोकन से स्पष्ट होता है कि तत्तकालीन पटवारी के लाते गए 22 बिंदु में अंकित चौहद्दी एवं पंजीकृत बैनामा में संलग्न नक्शा प्रतिलिपि में भिन्नता है रजिस्ट्री में भी संलग्न नक्शा प्रतिलिपि में खसरा एवं 993 बटा एक उत्तर दिशा में 993 बटा 6 अंकित है एवं इसके उत्तर दिशा में 993 बटा 1 अंकित है इस नक्शा प्रतिनिधि के अनुसार यदि यह सही अंकित है तो यह भूमि मौका राहुल ढाबा पीडब्ल्यूडी सड़क से लगभग 400 फुट की दूरी पर स्थित है। रजिस्ट्री में संलग्न अतिरिक्त कलेक्टर अनुमति पत्र में केवल मात्र कृषि प्रयोजन हेतु दिया जाना उचित है साथ ही प्रतिवेदन में हल्का पटवारी का स्पष्ट अभिमत मांगा गया है । राजस्व रिकार्ड के अनुसार खसरा नंबर 993/1 बड़े झाड़ का जंगल अंकित है तो इस इसी में पट्टा के संबंध में नियमानुसार परीक्षण होना भी जरूरई

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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