बिलासपुर। पूर्व जिला शिक्षा अधिकारी दिनेश कौशिक की गिनती कथरी ओढ़ कर घी खाने वाले अधिकारियों में की जा सकती है क्योंकि उन्होंने अपने पूरे कार्यकाल में हर वह काम किया जो अधिकारी रहते हुए उन्हें नहीं करना था अब इसे उनकी राजनीतिक पहुंच कहिए या फिर उनकी शिक्षा विभाग में सेटिंग, क्योंकि प्रमोशन संशोधन मामला कहिए या अटैचमेंट का खेल, आत्मानंद में जबरदस्ती ड्रेस और किताबें खरीदी का मामला कहिए या खेलों में अव्यवस्था का मामला या फिर कर्मचारियों के खिलाफ आई शिकायतों को दबाने का मामला वह सब में अव्वल रहे। उनके कार्यालय में लगातार प्रमाणित दस्तावेजों के साथ कई मामलों की शिकायत हुई लेकिन सारे मामले आज भी कार्यालय में पेंडिंग है। अब स्वामी आत्मानंद उत्कृष्ट हिंदी मध्यम बालक शाला (रामदुलारे) सरकंडा का ही मामला देख लीजिए जहां एक महिला व्याख्याता पूर्णिमा मिश्रा ने अपने सहकर्मियों और महिला प्राचार्य को फंसाने के लिए षड्यंत्र की सारी सीमाएं लांघ दी, यहां तक की बच्चों और उनके पालकों के नाम से खुद फर्जी शिकायत तैयार कर विधायक के पास पहुंच गई। जिससे इन हरकतों से परेशान होकर छात्र-छात्राओं की समस्या एनएसयूआई के महासचिव लक्की मिश्रा ने स्वयं जिला शिक्षा अधिकारी और कलेक्टर से मुलाकात करके और टेलिफोनिक माध्यम से स्कूल शिक्षा विभाग के प्रमुख सचिव आलोक शुक्ला तक को शिकायत की और जिस महिला व्याख्याता के खिलाफ स्वयं शाला प्रबंधन विकास समिति की अध्यक्ष और सदस्यों ने कलेक्टर और जिला शिक्षा अधिकारी से शिकायत की इसके बाद भले ही मजबूरी में जिला शिक्षा अधिकारी ने महिला व्याख्याता पूर्णिमा मिश्रा को आगामी आदेश या सत्रांत तक के लिए पास ही के एक अन्य स्कूल शासकीय हाई स्कूल लिंगियाडीह में संलग्न कर दिया। इस से आसानी से समझा जा सकता है की जिला शिक्षा अधिकारी किस सिद्धांत से महिला व्याख्याता को बचाना चाहते थे क्योंकि स्कूल शिक्षा विभाग द्वारा रसायन और भौतिकी के व्याख्याता को हाईस्कूल में नहीं रखा जाता बल्कि सिर्फ और सिर्फ जीव विज्ञान के व्याख्याता को हाई स्कूल में पोस्टिंग दी जाती है उसके बाद भी महिला व्याख्याता को सुविधा देने के लिए उनके घर के पास के स्कूल में गैर जरूरी तरीके से संलग्न कर दिया गया। बिलासपुर विधायक के पास की गई फर्जी शिकायत वाले जिस मामले की जांच कम से कम वरिष्ठ प्राचार्य की समिति बनाकर की जानी थी उस मामले को यूं ही रफा दफा कर दिया गया और उसके बाद धीरे से उसी महिला व्याख्याता पूर्णिमा मिश्रा का नाम उसी स्कूल में प्रतिनियुक्ति के लिए भेज दिया गया। इधर जिन लोगों ने शिकायत की थी उन्हें जिला शिक्षा अधिकारी ने यह कहा था की महिला व्याख्याता को उस स्कूल से हटकर दूसरे आत्मानंद स्कूल में डाला जाएगा इसके बाद विरोध करने वाले एनएसयूआई के महासचिव और शाला विकास समिति के पदाधिकारी जिला शिक्षा अधिकारी की बात को मानकर शांत बैठ गए लेकिन इधर महिला व्याख्याता पूर्णिमा मिश्रा को बचाने में लगे जिला शिक्षा अधिकारी ने गुपचुप तरीके से प्रतिनियुक्ति में उसी महिला व्याख्याता का नाम भेज दिया और पूर्णिमा मिश्रा का प्रतिनियुक्ति आदेश सेजस बालक सरकंडा स्कूल के लिए आ गया है।
इधर अब महिला से प्रताड़ित दूसरा पक्ष फिर से इस मामले की शिकायत करने जा रहा है देखना होगा की स्वामी आत्मानंद समिति के अध्यक्ष यानी कलेक्टर इस मामले में क्या रुख अपनाते हैं या फिर एक बार स्कूल विवादों की बलि चढ़ाने जा रहा है
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