बिलासपुर। वन विभाग के फदहाखार में पदस्थ रेंजर ने फूल प्लानिंग के साथ फेंसिंग घोटाले को अंजाम दिया है। विभागीय अधिकारियों को बेवकूफ बनाने के लिए बकायदा 42 पोल चोरी होने का रिपोर्ट थाने में दर्ज कराया ताकि भविष्य में कभी जांच हो तो उस FIR को ढाल बना के बचा जा सके। लेकिन सवाल ये उठ रहा है पोल 5000 हजार लगने वाले थे बाकी के पोल क्यों नहीं लगाए गए ?
वन विभाग के अधिकारियों के लिए बिलासपुर से लगा फदहाखार जंगल दुधारू गाय बन गया है। सरकार की जो भी योजना आती है उसे फदहाखार को दे दिया जाता है। क्योंकि फदहाखार ऐसे स्थान पर है जहां किसी की नजर नहीं जाती। कोई नेता या मंत्री वहां क्या हो रहा है ये देखने भी नही जाते। जिले में कई कलेक्टर और कमिश्नर आए और चले गए लेकिन वहां चलने वाले कार्यों का निरीक्षण करने कभी नही गए। वहां पदस्थ रेंजर जो रिपोर्ट सौंप दिया उसे ही स्वीकार कर लेते है। यही कारण है फदहाखार में दर्जनभर योजनाओं के पैसे आए लेकिन मौके पर एक रुपए का भी काम नहीं हुआ है। शत प्रतिशत पैसे विभाग के अधिकारी उदारस्थ कर गए। फेंसिंग का काम भी इन्ही में से एक है। वन विभाग ने यहां 7600 मीटर में फेंसिंग कराने के लिए एक ठेकेदार को 52 लाख रुपए का भुगतान कर दिया है। रिकार्ड के अनुसार काम पूर्ण बताया गया है। जबकि मौके पर 45 प्रतिशत हिस्से में काम ही नहीं हुआ है। जो काम हुए है उनकी गुणवत्ता दोयमदर्जे की है, फेंसिंग में जो पोल लगना था वह लगाया ही नहीं गया है। वन विभाग के अधिकारियों ने यहां सुनियोजित और डंके की चोट पर घोटाले को अंजाम दिया है। आपको बता दें
रेलवे क्षेत्र से लगे फदहाखार में बिलासपुर वन मंडल की सैकड़ों एकड़ जमीन है। इस जमीन के कुछ हिस्से पर एक बस्ती भी बस गई है और लगातार जमीन पर कब्जा हो रहा था। इसे गंभीरता से लेते हुए तत्कालीन डीएफओ कुमार निशांत ने खाली पड़ी जमीन को जाली तार से घेरने की योजना बनाई। DFO के निर्देश पर प्रभारी रेंजर नायक ने एक इस्टीमेट बनाकर पेश किया और बताया कि पूरी जमीन को घेरने के लिए 7600 मीटर जाली तार बिछाना पड़ेगा। हरेक डेढ़ मीटर में लोहे की एक पोल लगानी होगी। लगभग 5000 पोल और 7600 मीटर चैनलिंक लगाए जाएंगे। मजदूरों का खर्च अलग आएगा। पूरे काम में करीब 52 लाख रुपए खर्च आएंगे। तत्कालीन डीएफओ ने जाली तार फेंसिंग के लिए 52 लाख रुपए की स्वीकृति दे दी। प्रभारी रेंजर नायक की देखरेख में 7600 मीटर में जाली तार का घेरा लगा दिया गया और ठेकेदार को गुपचुप तरीके से भुगतान भी हो गया।
वन विभाग का दावा है कि 7600 मीटर में तार फेंसिंग में 5000 लोहे के एंगल लगाए गए हैं। लेकिन मौके पर जाकर देखने से ही स्पष्ट है कि 45 प्रतिशत हिस्से में काम ही नहीं हुआ है और 55 प्रतिशत हिस्से में काम हुआ है उसमे लोहे को पोल लगी ही नहीं है।
वन विभाग ने लोहे के एक एंगल की कीमत 166 रुपए बताई है। थाने में की गई रिपोर्ट पर नजर डालें तो वन रक्षक ने 28 जनवरी 2022 को सिरगिट्टी थाने में रिपोर्ट लिखाई है। उसने बताया है कि रात में मौके से 42 एंगल चोरी हो गए, जिसकी कीमत 4000 रुपए है।
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