ब्लौदाबाजार। बार नवापारा के जंगल में अचानक बाघ दिखने से ग्रामीणों के अलावा वन विभाग के अधिकारी दहशत में है। ग्रामीण उसके हमले से डर रहे है तो अधिकारी उसके भाग जाने से डर रहे है। यही कारण है कि जिले के कलेक्टर के एक चौहान ने अभ्यारण्य से लगे आसपास के 7 गांवों में धारा 144 लगा दिया है। इन क्षेत्रों में लोगों के आवाजाही पर प्रतिबंधित लगा दी गई है।
छत्तीसगढ़ में जंगल तो बहुत है, टाइगर रिजर्व भी पर्याप्त है। लेकिन यहां टाइगर नहीं के बराबर है। ऐसे स्थिति में जब जंगल में टाइगर दिखने लगे तो पूरा महकमा सिर पर उठा लेता है। पिछले दिनों बलौदाबाजार के बार नवापारा में कुछ पर्यटकों ने बाघ देख लिया, वीडियो भी बनाई जो वायरल हो गई। बात वन विभाग के अधिकारियों तक पहुंची तो अधिकारी मानने के लिए तैयार नहीं हुए। क्योंकि उन्हें पता है जंगल में बाघ है ही नही तो दिखेगा कैसे ? लेकिन सोसल मीडिया का दबाव इतना था कि अधिकारियों मजबूरन तस्दीक करनी पड़ गई। दो दिन तस्दीक करने में लग गया और बाघ जंगल में घूमते हुए मिल गया। जंगल में बाघ की आमद पूरे प्रशासन को चौकाने के लिए काफी था। अब अधिकारी बाघ के मूवमेंट पर नजर रखने लगे। गांव गांव में मुनादी कराई गई। लोगों को सावधान किया गया। AC ऑफिस से जंगल चलाने वाले अधिकारियों को जंगल में पसीना बहाना पड़ गया। अब पिछले सप्ताहभर से अधिकारी जंगल में है। इस बीच बाघ से ज्यादा ग्रामीण मुनादी और अधिकारियों के गस्त से दहशत में आ गए है। दूसरी ओर बाघ की सुरक्षा को लेकर वन विभाग के साथ जिला प्रशासन भी अलर्ट मोड में आ गया है। जिला कलेक्टर केएल चौहान ने अभ्यारण के आस–पास के गांवों में धारा 144 लागा दी है। जिनमे रवान, मोहदा, कौआबाहरा, मुरुमडीह, छतालडबरा, गजराडीह व दलदली गांव शामिल है। इन सात गावों में ध्वनि विस्तारक यंत्र पर भी रोक लगाया गया है। बाहर के लोगों को जंगल में घुसने नहीं दे रहे है।
एक शिक्षक ने देखा पहली बार – : बताया जा रहा है कि बाघ को पहली बार शिक्षक कांशीराम पटेल ने 7 मार्च को सिरपुर रोड में देखा और वीडियो बनाकर वन विभाग को सूचित भी किया। लेकिन वन विभाग के अधिकारियों ने भरोसा नहीं किया। ग्रामीणों ने दूसरी बार 8 मार्च को बाघ देखने की सूचना वन विभाग को दी, तब भी उन्हें भरोसा नही हुआ। जब पर्यटक का वीडियो वायरल हुआ तब कलेक्टर ने मामले को गंभीरता से लिया। इस बीच अमलोर, सुकुलबाय में मवेशियों का शिकार किए जाने की सूचना मिली। 12 मार्च को वहां आसपास बाघ के पंजे के निशान मिले। 14 मार्च को बलौदाबाजार वनमण्डल के परिक्षेत्र बल्दाकछार के कर्मचारी ने बाघ को प्रत्यक्ष देखा और पुष्टि की। इसके बाद वन विभाग ने NTCA द्वारा जारी SOP/प्रोटोकॉल का पालन कर नियमानुसार कार्रवाई की शुरु की है।
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