नई दिल्ली। पिछले दो साल से दो हजार के नए नोटों की छपाई बंद है। आगे नए नोट छापेंगे इसकी संभावना भी नही है। इस बात की जानकारी पिछले दिनों संसद में वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने दी है।

पिछले कुछ महीनों से 2000 रुपये के नोट सर्कुलेशन में कम क्यों हो रहे हैं? एटीएम मशीन से भी 2000 रुपये के नोट कम निकल रहे हैं? हर किसी के मन में सवाल पैदा हो रहा था कि आखिर 2000 रुपये के नोट बाजार से गायब क्यो होते जा रहरे है? इसका जवाब पिछले दिनों केंद्रीय वित्तराज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने संसद में दी। अनुराग ठाकुर ने संसद में जानकारी दी है कि सरकार पिछले दो वर्षों में 2 हजार रुपये के एक भी नोट की छपाई नहीं की है। नोटों की प्रिंटिंग को लेकर आरबीआई के साथ बातचीत कर सरकार फैसला लेती है। अप्रैल 2019 के बाद से एक भी 2000 रुपए का नया नोट बैंक द्वारा नहीं छापा गया है। अनुराग ठाकुर ने यह भी बताया कि पिछले तीन वर्षों में लगातार 2000 रुपये के नोट प्रचलन में घटे हैं। 30 मार्च 2018 को 2000 रुपये के 336.2 करोड़ नोट सर्कुलेशन में थे, जबकि 26 फरवरी 2021 को इसकी संख्या घटकर 249.9 करोड़ रह गई है। इसके पहले मार्च 2020 के अंत तक चलन में मौजूद 2,000 के नोटों की संख्या 273.9 करोड़ थी। जबकि मार्च- 2019 के अंत में 2000 के नोटों की संख्या 329.1 करोड़ थी। गौरतलब है कि नवंबर 2016 में नोटबंदी के ऐलान के बाद सरकार ने 2 हजार रुपये का नोट पहली बार जारी किया था। नोटंबदी में सरकार ने 500 और 1000 रुपये के नोट को अवैध घोषित कर दिया था। 2000 रुपये का नोट जारी करने के पीछे सरकार का तर्क था कि इससे कालेधन पर रोक लगाने में कामयाबी मिलेगी।
00 सरकार ने नहीं दिया छपाई का ऑर्डर
वित्त राज्य मंत्री अनुराग ठाकुर ने सोमवार को संसद में एक लिखित जवाब में कहा की किसी भी मूल्य के बैंक नोटों की छपाई का फैसला जनता की लेन-देन की मांग को पूरा करने के लिए RBI की सलाह पर लिया जाता है। पिछले दो साल 2019-20 और 2020-21 में 2000 रुपये के नोट की छपाई का कोई भी ऑर्डर RBI को नहीं दिया गया है।
00 जमाखोरी रोकने की कोशिश
केंद्र सरकार की मानें तो 2000 रुपये के नोट की छपाई बंद करने का फैसला इसकी जमाखोरी रोकने और ब्लैक मनी पर शिकंजा कसने के लिए लिया गया है।
00 पांच और दो सौ रुपये के नोटों के प्रसार बढ़ा
एक रिपोर्ट के अनुसार 2018 से तीन साल के दौरान जहां 2000 रुपये नोट का प्रचलन घटा है, वहीं इस दौरान 500 और 200 रुपये के नोटों के प्रसार में उल्लेखनीय इजाफा हुआ है। मूल्य और मात्रा दोनों के हिसाब से 500 और 200 रुपये के नोट का प्रसार बढ़ा है।
00 बड़े नोट की जमाखोरी आसान
एक रिपोर्ट के अनुसार, प्रचलन में कुल मुद्राओं में 2,000 के नोट का हिस्सा मार्च, 2020 के अंत तक घटकर 2.4 प्रतिशत रह गया था। यह मार्च, 2019 के अंत तक तीन प्रतिशत और मार्च, 2018 के अंत तक 3.3 प्रतिशत था।
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