

रायपुर। शराब घोटाला के मास्टर माइंड पूर्व IAS अनिल टुटेजा की 14 दिन और 14 रातें मेरठ जेल में कटेगी। सोमवार को STF ने उन्हें मेरठ के जिला एवं सत्र न्यायालय में पेश किया। सुनवाई के बाद कोर्ट ने उसे 14 दिन के लिए जेल भेज दिया है। उनके अन्य साथी अनवर ढेबर और एपी त्रिपाठी जेल में पहले से ही मौजूद है।
टुटेजा के साथ ही मेरठ कोर्ट ने होटल कारोबारी अनवर ढेबर और पूर्व आबकारी विभाग के विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी को भी 29 जुलाई तक न्यायिक हिरासत में जेल भेजने का आदेश दिया है। दोनों को उत्तर प्रदेश के STF ने कोर्ट में पेश किया था। शनिवार रात को मेरठ की एसटीएफ टीम अनिल टुटेजा को यहां से लेकर मेरठ के लिए रवाना हुई थी फिर सोमवार को उन्हे मेरठ के कोर्ट में पेश किया गया था। टुटेजा के खिलाफ उत्तर प्रदेश में नकली होलोग्राम मामले में एफआईआर दर्ज हुई है। इसके बाद मेरठ कोर्ट ने उन्हें पेशी का ट्रांजिट वारंट जारी किया था। न्यायिक रिमांड खत्म होने के बाद अब अनिल टुटेजा को 29 जुलाई को मेरठ कोर्ट में पेश किया जाएगा। गौरतलब है कि नकली होलोग्राम केस में अनवर ढेबर, विधु गुप्ता, अरुणपति त्रिपाठी पहले से मेरठ जेल में बंद हैं।
नकली होलोग्राम आपूर्ति करने के मामले में ईओडब्ल्यू के रिमांड पर चल रहे चार आरोपियों का सोमवार को रिमांड खत्म होने पर विशेष कोर्ट में पेश किया गया था। ईओडब्ल्यू की तरफ से चारों आरोपितों से और पूछताछ करने के लिए रिमांड की मांग की गई थी। दोनों पक्षों की बहस सुनने के बाद न्यायाधीश ने दीपक दुआरी, अमित सिंह, अनुराग द्विवेदी समेत प्रिज्म होलोग्राम कंपनी के स्टेट हेड दिलीप पांडेय को तीन दिन का पुलिस रिमांड स्वीकार कर ईओडब्ल्यू को सौंपने के निर्देश दिए है। 18 जुलाई तक ईओडब्ल्यू की टीम इन आरोपितों से पूछताछ करेगी।
00 क्या है नकली होलोग्राम प्रकरण
दर्ज एफआईआर के अनुसार नोएडा स्थित पीएचएसएफ नाम की कंपनी को टेंडर मिला था। यह टेंडर छत्तीसगढ़ के एक्साइज डिपार्टमेंट ने होलोग्राम की आपूर्ति करने के लिए अवैध रूप से दिया था। कंपनी टेंडर प्रक्रिया में भाग लेने के लिए पात्र नहीं थी। आरोप है कि आबकारी विभाग के विशेष सचिव अरुणपति त्रिपाठी, तत्कालीन आबकारी कमिश्नर निरंजन दास, तत्कालीन आईएएस अनिल टुटेजा ने टेंडर के लिए उसकी शर्तों में संशोधन किया। बदले में कंपनी के मालिक विधु गुप्ता से प्रति होलोग्राम आठ पैसे का कमीशन लिया गया।
यहां सरकारी दुकानों से अवैध देसी शराब की बोतल बेचने के लिए बेहिसाब नकली होलोग्राम लिए गए थे। ईडी के अनुसार नोएडा की कंपनी के डायरेक्टर विधु ने बयान में नकली होलोग्राम छापने की बात स्वीकारी है। उन्होंने उत्पाद शुल्क कार्यालय छग को मूल होलोग्राम की आपूर्ति की, जिसमें अंत में सीरियल नंबर डाले गए थे। टेंडर मिलने के बाद विधु गुप्ता डुप्लीकेट होलोग्राम की आपूर्ति छत्तीसगढ़ के सक्रिय सिंडिकेट को करने लगे। यह आपूर्ति तत्कालीन एमडी अरुणपति त्रिपाठी के निर्देश पर हुई। सिंडिकेट के सदस्य डुप्लीकेट होलोग्राम को विधु गुप्ता से लेकर सीधे तीनों शराब निर्माता कंपनियों को पहुंचा देते थे।
भाटिया वाइन एंड मर्चेट प्राइवेट लिमिटेड, छत्तीसगढ़ डिस्टलरीज और वेलकम डिस्टलरीज में होलोग्राम को अवैध शराब की बोतलों पर चिपकाया जाता था। इसके बाद फर्जी ट्रांजिट पास के साथ सीएसएमसीएल की दुकानों तक पहुंचाया जाता था। फर्जी ट्रांजिट पास का काम छत्तीसगढ़ के 15 जिलों के आबकारी विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की ओर से होता था।
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