सिटी मजिस्ट्रेट पर हाईकोर्ट ने लगाया 25 हजार रुपए का जुर्माना, 107/16 में जेल भेजना पड़ गया मंहगा, पति – पत्नी के झगड़े का था मामला

बिलासपुर। कोरबा के सिटी मजिस्ट्रेट को 107/16 में आरोपी को जेल भेजना मंहगा पड़ गया। हाईकोर्ट सिटी मजिस्ट्रेट पर 25 हजार रुपए का जुर्माना ठोंक दिया है। कोर्ट ने सीटी मजिस्ट्रेट की कार्रवाई को अवैध बताया और पीड़ित के मौलिक अधिकार का हनन माना है।

बालको में कार्यरत कर्मचारी लक्ष्मण साकेत जो क्वार्टर नंबर ईडब्ल्यूएस फेस-2 एमपी नगर थाना सिविल लाइंस रामपुर में निवास करता है। उसकी पत्नी के साथ घरेलू विवाद चल रहा है। पत्नी ने पति के खिलाफ सिविल लाइन थाने में एक शिकायत दर्ज कराई। इसके आधार पर पुलिस ने महिला के पति पर सीआरपीसी की धारा 107, 16 के तहत जुर्म दर्ज कर कार्यवाही कर दी। सिविल लाइन पुलिस ने उसे गिरफ्तार कर सिटी मजिस्ट्रेट के कोर्ट में पेश किया गय। जब अधिवक्ता ने अपने मुवक्किल साकेत की रिहाई को लेकर बेल बांड की राशि पेश किया तो शाम पांच बजे सिटी मजिस्ट्रेट ने जानबूझकर साल्वेंट श्योरिटी का शर्त लगा दिया। शाम हो जाने के कारण साकेत के अधिवक्ता साल्वेंट श्योरिटी पेश नहीं कर सके। इसे आधार बनाकर सिटी मजिस्ट्रेट ने हिरासत में लिए गए लक्ष्मण को जेल भेज दिया। सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को पीड़ित व्यक्ति ने हाईकोर्ट में चुनौती दिया था। यह तर्क दिया कि सिटी मजिस्ट्रेट को साल्वेंट श्योरिटी मांगने का अधिकार ही नहीं है। याचिका पर हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश रमेश सिन्हा एवं न्यायाधीश बीडी गुरु की पीठ में सुनवाई हुई। सुनवाई पूरी होने पर न्यायाधीश ने सिटी मजिस्ट्रेट के फैसले को अवैध करार दिया और याचिकाकर्ता के मौलिक अधिकार का हनन बताया। मामले में कोर्ट ने कोरबा पुलिस, अपर कलेक्टर पर 25 हजार रुपए का जुर्माना लगाया। इसका भुगतान 30 दिन के भीतर करना होगा। मामले में छत्तीसगढ़ सरकार के मुय सचिव, सिटी मजिस्ट्रेट कोरबा, गृह विभाग के सचिव, पुलिस अधीक्षक कोरबा, सिविल लाइन के थाना प्रभारी और थाने में मामले की शिकायत करने वाली महिला संध्या साकेत को पक्षकार बनाया गया था।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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