ATR में हाथी शावक का मिला शव, शिकार या हादसा ? क्या कर रहा है ATR प्रबंधन और मॉनिटरिंग टिम….

बिलासपुर। ATR में हाथी शावक का शव मिलने के बाद प्रबंधन की लापरवाही सामने आ गई है। बताया जा रहा है कि शावक की मौत शिकारियों के फैलाए करंट से हुई है। अब सवाल ये भी उठ रहा है कि हाथियों के झुंड की मॉनिटरिंग के लिए लगी टिम क्या कर रही थी। क्या मॉनिटरिंग टिम शिकारियों के साथ मिला हुआ है ?

सोसल मीडिया में बीच जंगल एक हाथी शावक के शव की तस्वीर वायरल हो रही है।  बताया जा रहा है कि हाथी शावक की मौत करंट लगने से हुई है। घटना एक दिन पुरानी है लेकिन विभाग के अधिकारियों को आज पता चला है। बताया जा रहा है कि इस हाथी शावक का जन्म अचानकमार टाइगर रिजर्व में ही हुआ था। इनके साथ पांच हाथियों का एक दल चल रहा था लेकिन शावक दल से बिछड़ गया था। इस बीच वह शिकारियों के फैलाए तार के करंट की चपेट में आ गया। आपको बता दे ATR की देख रेख के लिए जंगल में बिट गार्ड से लेकर डायरेक्टर तक के पोस्ट है। बिट गार्ड जहां जंगल में पैदल घूमकर जंगल की देखरेख करता है जबकि ऊपर के अधिकारी AC चेंबर में बैठकर ATR के जंगल और वन्यप्राणियों की रक्षा करते है। इसके लिए अधिकारियों को सर्वसुविधायुक्त बंगला मिलता है, उनकी सेवा करने के लिए आधा दर्जन से ज्यादा प्यून मिलता है। हर अधिकारी के पीछे सरकार हर महीने 10 लाख रुपए से ज्यादा खर्च करती है। लेकिन हर सुविधा उपलब्ध कराने के बाद भी न तो ये जंगल की सुरक्षा कर प रहे है और न ही वन्य प्राणियों की रक्षा कर पा रहे है।

विडंबना तो है कि हाथियों के झुंड की मॉनिटरिंग करने के लिए पूरे प्रदेश में हर महीने करोड़ो रुपए खर्च हो रही है। इसके बाद भी हाथी शावक अपने दल से बिछड़कर जंगल में भटकता रहा लेकिन उसकी ट्रैकिंग नहीं की जा सकी। जब हाथियों के दल की मॉनिटरिंग नहीं हो रही है तो किसको किया जा रहा है करोड़ों रुपए का भुगतान ? कुल मिलकर हाथियों के नाम पर विभाग करोड़ों का खेल करने में महीनों से लगे हुए है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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