बिलासपुर। बटालियन में पदस्थ हेड कांस्टेबल और उसके परिवार को लाइन में अटैच हेड कांस्टेबल से जान का खतरा है। विडंबना ये है कि शिकायत पर पुलिस विभाग के अधिकारी कोई सुध नहीं ले रहा है। परिवार ने जिला व पुलिस प्रशासन से एक बार फिर हेड कांस्टेबल के खिलाफ कार्रवाई कर सुरक्षा की मांग की है।
बिलासपुर प्रेस क्लब में सोमवार को सकरी बटालियन में पदस्थ हेड कांस्टेबल संजय जोशी के परिवार ने प्रेस कॉन्फ्रेंस की। परिवार की ओर से दुलाल मुखर्जी ने बताया कि संजय जोशी की पत्नी सरोज का अरुण कमलवंशी से प्रेम संबंध था। आरक्षक अरुण कमलवंशी पूर्व में सिविल लाइन सीएसपी का रीडर था और प्रधान आरक्षक के पद पर प्रमोशन होने के बाद वह पुलिस लाइन में अटैच है। अरुण कमलवंशी का कांस्टेबल संजय जोशी की गैर मौजूदगी में लगातार घर में आना-जाना था। इस दौरान एक दिन संजय जोशी ने घर में अरुण और उसकी पत्नी को आपत्तिजनक हालत में देखा। पति-पत्नी के बीच चल रहे विवाद के दौरान अरुण कमलवंशी भाग गया। घटना के बाद संजय की पत्नी सरोज जोशी ने घर छोड़ दिया और अरुण कमलवंशी के साथ रहने लगी। मामला तलाक के लिए कुटुंब न्यायालय में लगाया गया और वह मंजूर भी हो गया। जोशी परिवार के अनुसार इसके बाद से अरुण कमलवंशी उन सभी से रंजिश रखता है और पूरे परिवार के जान का दुश्मन बना हुआ है। जोशी परिवार का आरोप है कि अरुण कमलवंशी नुकसान पहुंचाने के मकसद से लगातार परिवार की निगरानी कर रहा है। पिछले दो महीने से सफेद कार उनके घर के आगे घूमती रहती है। बगैर नंबर प्लेट के आने का कोई तय समय नहीं होता है। कार कभी 15-20 मिनट तो कभी एक घंटे तक घर के सामने रुकी रहती है, लेकिन कार से कोई उतरता नहीं है।
00 प्रताड़ित परिवार पर उलटे दर्ज हो गया मामला
पिछले साल 25 दिसंबर को अरुण सफेद कार से उनके घर पहुंचा था। उसने घर के गेट में तोड़-फोड़ कर आगजनी की। जोशी परिवार की ओर से सकरी थाने में शिकायत की। इस शिकायत पर फौरन कोई कार्रवाई नहीं हुई। एक महीने तक लगातार थाने का चक्कर काटने पर एफआईआर दर्ज की गई। इसके बाद 10 अप्रैल 2024 को जोशी परिवार के सदस्यों के खिलाफ अरुण कमलवंशी की रिपोर्ट पर मामला दर्ज कर लिया गया।
00 दूसरी शादी साबित, विभाग नहीं कर रहा कार्रवाई
जोशी परिवार के अनुसार अरुण कमलवंशी पहले से शादीशुदा है। उसने पहली पत्नी को तलाक दिए बगैर सरोज जोशी के साथ दूसरी शादी की है। कुटुंब न्यायालय में संजय जोशी की ओर से पेश किए गए सबूतों के आधार पर कोर्ट ने तलाक मंजूर किया था। सिविल सेवा नियम के तहत मामले में निलंबन से लेकर बर्खास्तगी की कार्रवाई की जा सकती है। कोर्ट के फैसले की जानकारी पुलिस विभाग को दिए जाने के बाद भी अब तक कोई कार्रवाई नहीं की गई है।
00 जांच लंबित होने पर भी मिल गया प्रमोशन
अरुण कमलवंशी की विभागीय पहुंच का अंदाजा इसी बात से लगाया जा सकता है कि नियम-कायदों को दरकिनार करते हुए उसे आरक्षक से प्रधान आरक्षक पद पर पदोन्नति मिल गई है। 5 अगस्त 2024 को जारी हुई सूची में आरक्षक क्रमांक-840 अरुण कमलवंशी का नाम शामिल है, जबकि उसके खिलाफ हाईकोर्ट में प्रकरण चल रहा है। हाईकोर्ट में केस फ़ाइल WPS 8915/2023 में विभागीय जांचकर सेवा से बर्खास्तगी के मामले में पिछली तीन पेशी से वह नदारत है।
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