बिलासपुर। रघुराज सिंह स्टेडियम में बनी दुकानों को जिला प्रशासन बेचने का रहा है। इसके लिए खरीददारों से आवेदन मंगाए गए है। अब सवाल ये उठ रहा है कि दुकान में आने जाने का कोई रास्ता नहीं है उन दुकानों को कोई क्यों खरीदेगा ? जबकि दुकान बेचने के पहले प्रशासन को वहां से बेजा कब्जा हटाना था।
*देल्ही स्वीट्स पर चलेगा बुल्डोजर, भाजपा नेता ने बेजा कब्जा कर बनाया दुकान, स्टेडियम के बाजू से मिलेगी एक और सड़क*
*https://democrecy.in/?p=23422*
रघुराज सिंह स्टेडियम की जमीन में बनी दुकानों को नीलाम करने की तैयारी पूरी हो चुकी है। इसके लिए समाचार पत्रों में बाकायदा विज्ञापन प्रकाशित किया गया है। जिला प्रशासन की ये पहल सराहनीय है। सालों से लावारिश पड़े दुकानों को नीलाम करने से फिजिकल वेलफेयर सोसायटी की आमदनी बढ़ेगी। लेकिन सवाल ये उठ रहा है कि जिन दुकानों में आने जाने के लिए रास्ता ही नहीं है उन दुकानों को लेगा कौन ? क्योंकि दुकानों में आने जाने के लिए जो रास्ता तय किया गया था उसके मुहाने पर भाजपा नेता गुलशन ऋषि ने दुकान तान दिया है। जिस जगह पर भाजपा नेता ने दुकान बनाया है वह नजूल की जमीन में है और कुछ साल पहले फिजिकल वेलफेयर सोसायटी की बैठक में आयुक्त नगर निगम ने दुकान तोड़ने का फैसला लिया था। बाकायदा बैठक के मिनिट्स में इसका उल्लेख भी किया गया है। लेकिन अभी तक दुकान सीना ताने खड़ा है और मालिक हर महीने उसका डेढ़ लाख रुपए किराया वसूल रहा है। आपको बता दे दिल्ली स्वीट्स की दुकान पूरी तरह से अवैध है और फिजिकल कल्चरल सोसायटी की जमीन पर बनी है। इस दुकान को भाजपा नेता गुलशन ऋषि के भाई अशोक ऋषि ने बनाया है। नाम जरूर भाई का है लेकिन परदे के पीछे कब्जा करने और दुकान बनवाने में भाजपा नेता का ही हाथ है। जब इसका निर्माण किया गया था उस समय दुकान निर्माण के लिए कहीं से भी किसी भी तरह की अनुमति नहीं ली गई है। इस दुकान के बनने से सबसे ज्यादा नुकसान फिजिकल कल्चरल सोसायटी को हो रहा है, आम जनता को हो रही है। सोसायटी की जिन गतिविधियों को व्यवस्थित करने के लिए दुकानें बनाई गई थी वह बेकार पड़ी है। दूसरी और जिस जगह पर दिल्ली स्वीट्स की दुकान बनी है वहां से इमलिपारा के लिए सड़क निकलना है। अब दुकान के कारण सड़क का मुहाना पूरी तरह से बंद हो गया है। लिहाजा सड़क बंद होने से दुकानें पूरी तरह से अनुपयोगी हो चुकी है। अब इन दुकानों की नीलामी करने के लिए आवेदन मंगाए गए है। जो दुकानें पूरी तरह से अनुपयोगी हो चुकी है, दुकान में आने जाने के लिए रास्ता ही नहीं है आखिर उन दुकानों पर लोग अपना पैसा क्यों फसाएंगे।
फिजिकल कल्चरल सोसायटी के सदस्य राकेश शर्मा का कहना है कि मीटिंग में दुकान तोड़कर सड़क क्लियर करने का निर्णय लिया गया था। बैठक निगम आयुक्त की उपस्थिति में हुई थी और निर्णय भी उन्हीं का था। दुकान क्यों नहीं तोड़ी गई इसके बारे में अधिकारी ही बता सकते है। फिलहाल सोसायटी भंग कर दी गई है इसलिए हम भी कुछ नहीं बोल सकते।
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