बिलासपुर। लोकबंद के ग्रामीणों ने पंचायत चुनाव का बहिष्कार करने का ऐलान कर दिया है। ग्रामीणों ने अपने गांव को स्वतंत्र ग्राम पंचायत बनाने की मांग कर रहे है। अभी आश्रित ग्राम है जिसके कारण मूलभूत सुविधाओं के लिए उन्हें दर दर की ठोकरें खाना पड़ता है।
करगीखुर्द गांव के आश्रित गांव लोकबंद को स्वतंत्र ग्राम पंचायत बनाए जाने की मांग को लेकर ग्रामीण पिछले कई वर्षों से कलेक्ट्रेट का चक्कर काट रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि आश्रित ग्राम होने की वजह से समस्त ग्राम वाशियो को सड़क, पानी, बिजली, स्कूल और अस्पताल जैसी सुविधाओं से वंचित होना पड़ रहा है। परेशान ग्रामीणों ने अंतिम बार कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपकर सीधे तौर पर आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 का बहिष्कार करने की चेतावनी दी है। दरअसल लोक बंद के ग्रामीण पिछले कई वर्षों से लोक बंद गांव को करगीखुर्द से अलग करके स्वतंत्र ग्राम पंचायत बनाने की मांग कर रहे है। ग्रामीणों का कहना है कि वर्ष 2011 के जनगणना के मुताबिक उनके गांव लोकबंद की जनसंख्या करीब 890 थी, जो अब बढ़कर करीब 1350 हो गई है। नियमानुसार एक हजार की आबादी वाले गांव को स्वतंत्र ग्राम पंचायत बनाए जाने का नियम है। इसको लेकर कई बार कलेक्ट्रेट में ज्ञापन सौंपा गया। इसके बाद भी लोक बंद को स्वतन्त्र ग्राम पंचायत का दर्जा नहीं मिला। लोक बंद से आए ग्रामीणों ने बताया कि इस बार कलेक्ट्रेट में अंतिम ज्ञापन सौंपा गया है। इसके एक महीने के भीतर लोक बंद को स्वतन्त्र ग्राम पंचायत नहीं बनाया जाता है तो समस्त ग्रामवासी आगामी त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव 2025 का पूर्णतः बहिष्कार करेंगे।
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