सरगांव- मुंगेली जिले में स्थित ऐतिहासिक, धार्मिक एवं पुरातत्विक महत्व का स्थल हरिहर केदार क्षेत्र मदकू द्वीप स्वच्छता की दृष्टि से एक प्रेरणादायक पहल का साक्षी बना। यह द्वीप जो कि छत्तीसगढ़ के प्रमुख दर्शनीय स्थलों में सम्मिलित है, प्रतिदिन बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं एवं पर्यटकों को आकर्षित करता है। किंतु इन पर्यटकों द्वारा उपयोग की गई पत्तल, डिस्पोजल और प्लास्टिक सामग्री स्थल पर ही फेंक दी जाती है, जिससे क्षेत्र की स्वच्छता एवं पर्यावरण संतुलन पर प्रतिकूल प्रभाव पड़ता है। इस समस्या के समाधान की दिशा में एक अनुकरणीय पहल करते हुए ग्राम पंचायत तुरमा (तहसील भाटापारा, जिला बलौदा बाजार) के ओम स्व सहायता समूह, भारत माता वाहिनी महिला कमांडो समूह, जय माँ महामाया युवा प्रभाग तुरमा, तथा पर्यावरण संरक्षण गतिविधि जिला बलौदा बाजार की जिला टोली ने संयुक्त रूप से मदकू द्वीप में स्वच्छता अभियान का आयोजन किया।
यह पहल इस दृष्टि से भी विशेष रही कि किसी पर्यटक समूह ने स्वेच्छा से इस धार्मिक स्थल की सफाई कर स्वच्छता के प्रति जन-जागरूकता उत्पन्न करने का प्रयास किया। इस कार्य में भाग ले रहे स्वयंसेवकों ने न केवल स्थल की सफाई की, बल्कि वहां उपस्थित अन्य पर्यटकों को स्वच्छता और पर्यावरण संरक्षण के प्रति जागरूक करने का भी कार्य किया।
हरिहर केदार क्षेत्र मदकू द्वीप के संत रामरूपदास महात्यागी जी ने इस पुनीत कार्य की भूरी-भूरी प्रशंसा की। उन्होंने कहा – “यह कार्य मात्र सफाई का नहीं, अपितु एक नवचेतना का संचार है। हर नागरिक का दायित्व है कि वह अपने धार्मिक, सांस्कृतिक एवं ऐतिहासिक स्थलों की पवित्रता को बनाए रखे। जब तक हम स्वयं जागरूक नहीं होंगे, तब तक समाज में सकारात्मक परिवर्तन संभव नहीं है। यह प्रयास आने वाली पीढ़ियों के लिए प्रेरणा बनेगा।”
उक्त स्वच्छता अभियान में पर्यावरण संरक्षण गतिविधि के जिला संयोजक शुभम कुमार वर्मा, शैक्षणिक संस्थान प्रमुख-तीजराम पाल, जल प्रमुख श्रीमती सरिता बंजारे, नारी प्रमुख – श्रीमती सरस्वती साहू, सरपंच, ग्राम पंचायत तुरमा श्रीमती लीला परस मनहरे, रोजगार सहायक नंदलाल पाल,अध्यक्ष, युवा प्रभाग तुरमा छबिराम पाल,
मितानिन समूह के श्रीमती सरोज पाल एवं श्रीमती माहेश्वरी ध्रुव, स्व सहायता समूह के श्रीमती पूनम पाल, केजा पाल, बजरीहीन पाल, संमल बाई ध्रुव,
श्री विशंभर पाल एवं पुरुषोत्तम मनहरे सहित अनेकों कार्यकर्ता एवं महिलाओं ने अपनी सक्रिय सहभागिता दी।
यह कार्यक्रम केवल एक स्वच्छता अभियान नहीं था, बल्कि यह सामाजिक जागरूकता एवं पर्यावरणीय उत्तरदायित्व का सशक्त उदाहरण भी रहा। इससे यह स्पष्ट संदेश समाज में गया कि यदि प्रत्येक नागरिक अपनी जिम्मेदारी को समझे और मिल-जुलकर कार्य करे, तो हम न केवल अपने धार्मिक स्थलों को स्वच्छ रख सकते हैं, बल्कि उन्हें भावी पीढ़ियों के लिए संरक्षित भी कर सकते हैं। इस अभियान के माध्यम से समाज में स्वच्छता, पर्यावरण संरक्षण और जन भागीदारी का जो संदेश प्रसारित हुआ है, वह निश्चित ही एक नई दिशा की ओर प्रेरित करता है।
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