बिलासपुर। मस्तूरी क्षेत्र का भदौरा ग्राम एक बार सुर्खियों में आने वाला है। यहां आदिवासी जमीन व घास मद की जमीन को फर्जी तरीके बड़े पैमाने पर रजिस्ट्री की गई है। इस मामले की कलेक्टर से शिकायत की गई है।
10 साल पहले भदौरा गांव राशि पावर प्लांट की जमीन घोटाले को लेकर सुर्खियों में था। उस समय कांग्रेस ने इस जमीन घोटाले को लेकर बड़ा आंदोलन किया था। हालांकि सत्ता में आने के बाद इसे भूल गई और आज भी 40 एकड़ सरकारी जमीन में राशि पावर का कब्जा है। इस घोटाले के बाद भदौरा गांव फिर से सुर्खियों में आने वाला है, क्योंकि यहां पर बड़े पैमाने पर जमीन घोटाला सामने आ रहा है। अशोक सिंह ने कलेक्ट्रेट में एक शिकायत की है जिसमें बताया गया है आदिवासी और सरकारी जमीन का बड़े पैमाने पर रजिस्ट्री की गई है। शिकायत के अनुसार ग्राम भदौरा में आदिवासी के जमीन को कुट रचना करके बिना कलेक्टर के आदेश के रजिस्ट्री की गई है। इसके लिए आदिवासी को पहले केवट बनाया गया फिर जमीन की रजिस्ट्री की गई। शिकायत में कहा गया है कि शत्रुहन लाल ध्रुव पिता मंशा राम ध्रुव जो कि आदिवासी है की जमीन को शत्रुहन पिता- मंशराम केेंवट बनाकर दिनांक 21/09 2011 को श्रीमति ममता सिंह पति- नरेन्द्र उर्फ कल्लू सिंह निवासी भदौरा के नाम पर रजिस्ट्री किया गया है। शासन के नियमो के अनुसार आदिवासी की जमीन रजिस्ट्री कराने के पहले कलेक्टर की अनुमति जरूरी है। बिना कलेक्टर की अनुमति के जमीन रजिस्ट्री नहीं हो सकती। यही कारण है कि जमीन रजिस्ट्री करने के लिए ध्रुव को केवट बना दिया गया। इस खेल में राजस्व विभाग के अधिकारियों और कर्मचारियों की मिली भगत का आरोप भी लगाया गया है। रजिस्ट्री कराने के लिए कुट रचित दस्तावेज तैयार कराने का भी आरोप शिकायत में लगाया गया है। शिकायतकर्ता ने अपने शिकायत के साथ गांव का वोटर लिस्ट भी लगाया है। जिसमें देखा जा सकता है, की मतदाता सुची क्र 223 में WHE0384073 में शत्रुहन ध्रुव पिता- श्री मंशा राम ध्रुव स्पष्ट रूप से दर्शाया गया है। शत्रुहन पिता- श्री मंशा राम ध्रुव का राशन कार्ड व आधार की भी जांच की जा सकती है। शिकायतकर्ता अशोक सिंह का कहना है कि भदौरा में एक भी केेंवट नहीं है। इसके अलावा श्रीमति ममता सिंह के नाम पर खसरा न- 240/8 जो कि खसरा बी-01 व निस्तार पत्रक के अनुजार घास मद में दर्ज है। इसको भी राजस्व अधिकारियोय से मिलीभगत कर कुट रचित दस्तावेज तैयार करके 02/02/2010 में नामांतरण कराया गया है। जिसकी बी-01 की छायाप्रति संलग्न है। शिकायतकर्ता अशोक सिंह ने कलेक्टर से पूरे मामले की जांच कराने की मांग की है।
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