स्कूल के बच्चों को खिलाया गया कुत्ते का जूठन, हाईकोर्ट ने कहा सभी बच्चों को दे मुआवजा, शासन ने हेडमास्टर को निलंबित करने की दी जानकारी

बिलासपुर। स्कूल के बच्चों को कुत्ते का जूठन खिलाने के मामले में हाईकोर्ट के डबल बैंच ने सभी बच्चों को मुआवजा देने के आदेश दिए है। इस दौरान शासन ने हाईकोर्ट को जानकारी दी कि स्कूल के हेडमास्टर को निलंबित कर दिया गया है। साथ ही स्व सहायता समूह को भी हटा दिया गया है।

बलौदाबाजार के पलारी विकासखंड के लच्छनपुर गाँव में स्थित एक शासकीय माध्यमिक स्कूल में 28 जुलाई 2025 को छात्रों को ऐसा भोजन परोसा गया जिसे कुत्ते ने चाटा था। इस बात का खुलासा तब हुआ जब बच्चों ने इसकी जानकारी अपने अपने अभिभावकों को दी। जब अभिभावकों ने बवाल मचाया तो शाला विकास समिति की एक बैठक हुई और अभिभावकों के दबाव में 83 छात्रों को एंटी-रेबीज के दो-दो इंजेक्शन लगाए गए। लेकिन आक्रोशित अभिभावकों ने मामले की जांच कर दोषियों पर कड़ी कार्रवाई की मांग कर दी। जब इस मामले की खबर मीडिया में छपी तो हाईकोर्ट ने संज्ञान में लेकर नोटिस जारी किया और जवाब मांगा था। नोटिस पर कलेक्टर बलौदाबाजार ने जवाब पेश कर कोर्ट को बताया कि अस्थायी रूप से जय लक्ष्मी स्व सहायता समूह को हटा दिया गया है। साथ ही घटना की जानकारी राज्य के मुख्यमंत्री को भीदी गई है ताकि मामले की जाँच की जा सके। कोर्ट ने मामले में कहा कि समाचार से पता चलता है कि जब छात्रों ने आवारा कुत्तों को भोजन चाटते देखा तो इसकी सूचना स्कूल के शिक्षकों को दी गई थी। शिक्षकों ने कुत्तों द्वारा चाटे गए भोजन को परोसने से रोका था। फिर भी स्व सहायता समूह ने वही खाना वितरित कर दिया और 84 छात्रों ने भोजन खाया। लेकिन 78 छात्रों को एंटी-रेबीज की पहली खुराक दी गई थी।
जिला शिक्षा अधिकारी, बलौदाबाजार ने
प्रधानाध्यापक और संकुल समन्वयक को नोटिस जारी किया है और उनका जवाब मिलने पर, आगे की कार्रवाई की जाएगी। कोर्ट ने कहा कि यह बेहद आश्चर्यजनक है कि स्व सहायता समूह जो छात्रों को भोजन परोसने के लिए ज़िम्मेदार हैं, सुरक्षा और स्वच्छता का ध्यान रखे बिना लापरवाही पूर्वक खाना परोस रहे हैं। कोर्ट ने यह भी कहा कि प्रकाशित तस्वीर से स्पष्ट है कि मिट्टी के चूल्हे पर दो बर्तन खुले मैदान में पड़े हुए दिखाई दे रहे हैं, जिन्हें कोई भी आवारा पशु चाहे वह कुत्ते हों, सूअर हों, चूहे हों आदि खाकर/गंदा कर सकते हैं। स्कूल में तैनात शिक्षक भी बच्चों की सुरक्षा को लेकर बिल्कुल भी चिंतित नहीं दिखते जो घोर लापरवाही है। जैसे ही शिक्षकों को पता चला कि खाना कुत्ते ने चाट लिया है, उसे तुरंत हटा देना था। किसी भी छात्र को खाने की अनुमति नहीं देनी थी। कोर्ट ने कहा कि ऐसा ऐसा लग रहा है कि स्व सहायता समूह ने गंभीर लापरवाही की है। जिससे छात्रों का जीवन खतरे में पड़ गया है क्योंकि एक बार रेबीज से संक्रमित होने के बाद, कोई इलाज उपलब्ध नहीं है। छात्रों को भोजन उपलब्ध कराना कोई औपचारिकता नहीं है इसे सम्मान के साथ किया जाना चाहिए। किसी व्यक्ति, खासकर मासूम बच्चों को ऐसी कोई भी खाने की चीज़ नहीं परोसी जा सकती जिसे कुत्ते ने चाटा या गंदा किया हो। ज़िम्मेदार अधिकारियों द्वारा ऐसी ऐसी चूक करना गंभीर चिंता का विषय है।

चीफ जस्टिस रमेश सिन्हा व जस्टिस बीडी गुरु के डबल बैंच ने मामले की सुनवाई के बाद स्कूल शिक्षा विभाग के सचिव को एफिडेविट के साथ कोर्ट को बताने के लिए कहा है कि क्या गंदा भोजन खाने वाले सभी छात्रों को रेबीज का टीका लगाया गया है ? (ii) स्कूल के शिक्षकों/प्रधानाध्यापकों के साथ-साथ स्व सहायता समूह के खिलाफ क्या कार्रवाई की गई है ? (iii) क्या छात्रों को ऐसी लापरवाही के लिए कोई मुआवजा दिया गया है जिससे उनकी जान को खतरा हो गया है ? और (iv) भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति को रोकने के लिए विभाग क्या उपाय करेगा। शासन की ओर से शपथ पत्र पेश कर जानकारी दी गई कि स्कूल के प्रधानपाठक को निलंबित किया गया है। स्व सहायता समूह को हटा दिया गया। सभी प्रभावित छात्रों को एंटी रेबीज टीका लगाया गया है। कोर्ट ने मामले में प्रभावित बच्चों को मुआवजा देने के आदेश दिए है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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