हर महीने सफाई पर 8 करोड़ रुपए खर्च, लेकिन जिधर नजर घुमाओ उधर दिख रहा कचरे की ढेरी, बिना सत्यापन के हो रहा भुगतान

बिलासपुर। नगर पालिका निगम बिलासपुर में हर महीने सफाई पर 8 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। लेकिन शहर में जिधर जाओ कूड़ा करकट की ढेरी ही दिखाई देती है। अब सवाल ये उठ रहा है कि आखिर 8 करोड़ रुपए जा कहां हो रहा है ? यदि ईमानदारी से खर्च हो रहा है तो शहर में कचरा ही कचरा क्यों दिखाई दे रहा है ? क्या इन कंपनियों को आंख मूंदकर भुगतान किया जा रहा है ?

देश के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने बड़ी उम्मीद से स्वक्षता अभियान की शुरुआत की थी। इसके लिए वे खुद ही झाड़ू लेकर सड़क में उतरे, यही नहीं सबको झाड़ू पकड़ाकर संदेश दिया कि विकास अपनी जगह है लेकिन इन सबसे ऊपर स्वक्षता है। उनके अभियान से कुछ दिन तक तो सब ठीक ठाक चला। लेकिन समय के साथ फिर से पुराने ढर्रे में आ गए। स्वक्षता के लिए सरकार ने बड़े बजट की व्यवस्था की लेकिन उनके नुमाइंदे नरेंद्र मोदी के अभियान को पलीता लगाने में लगे हुए है। बिलासपुर नगर निगम को ही ले लीजिए। पार्षद से लेकर प्रधानमंत्री तक भाजपा के है। लेकिन शहर में गंदगी का आलम ये है कि जहां देखो वही कचरा नजर आता है। क्या नली, क्या सड़क सब जगह कचरा ही कचरा दिखाई दे रहा है। जबकि सफाई के लिए हर महीने 8 करोड़ रुपए खर्च कर रही है। लायन कंपनी को मैकेनाइज्ड सफाई के लिए करोड़ो का भुगतान किया जा रहा है। जिसमें कंपनी मुख्यमार्गों का, चौक चौराहों का, उसमें लगी मूर्तियों की सफाई करती है। एक दूसरी है जिसका काम कचरा को उठाकर कछार और SLRM सेंटर तक लेजाना है। यही नहीं नगर निगम के 300 सफाई कर्मचारी अलग अलग वार्ड में अलग अलग काम कर रहे है। प्लेसमेंट एजेंसियों के माध्यम से सफाई कर्मचारी सप्लाई करने का ठेका अलग है। मतलब इन सभी को मिलाकर हर साल सफाई पर लगभग सौ करोड़ रुपए सालाना खर्च हो रहा है। जब ये दोनों कंपनियां और प्लेसमेंट एजेंसियां अपना काम सही तरीके से कर रही है तो तो शहर में कचरा क्यों दिख रहा है। यदि कचरा दिख रहा है तो इन्हें भुगतान करने में अधिकारी इतने उतावले क्यों रहते है।  क्या अधिकारी भुगतान करने के पहले मौके पर जाकर भौतिक सत्यापन करते है। यदि करते है तो क्या इन्हें कचरा नहीं दिखता ? यदि दिखता है कंपनी के खिलाफ कार्रवाई क्यों नहीं होती ? बिना सत्यापन के कंपनियों को करोड़ों रुपए का भुगतान कियाबज रहा है। इससे निगम अधिकारियों की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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