बिलासपुर। तखतपुर विधायक धर्मजीत सिंह 13 सितंबर को अपना जन्मदिन मनाएंगे। 40 साल के राजनैतिक जीवन में दिलखुश मिजाज और जीवंत संपर्क के कार बिलासपुर, कवर्धा, पंडरिया, मुंगेली समेत लगभग पूरे प्रदेश में वे लोकप्रिय है। यही कारण है पार्टी कोई भी हो, चुनाव का चिन्ह कुछ भी हो जीत का सेहरा हमेशा उनके सिर पर ही बंधता रहा है। कांग्रेस के छात्र राजनीति से सियासत की शुरुआत करने वाले धरमजीत सिंह अभी तखतपुर से भाजपा के विधायक है। इसके पहले वे लोरमी से 4 बार विधायक रह चुके है। अपने राजनीतिक सफर में कई उतार चढ़ाव देखे और हर परिस्थिति का धैर्य के साथ सामना भी किया। राजनैतिक करियर की शुरुआत में वे कांग्रेस के कद्दावर नेता स्व विद्याचरण शुक्ल के करीबी माने जाते थे। पहली बार 1998 में उन्हें श्री शुक्ल के प्रयास से ही लोरमी विधानसभा की टिकट मिली थी। छत्तीसगढ़ राज्य बनने के बाद प्रदेश के पहले मुख्यमंत्री स्व अजीत जोगी ने उन्हें विधानसभा का उपाध्यक्ष बनाया। लेकिन श्री शुक्ल और श्री जोगी के बीच सियासी टकराव शुरू हो जाने के कारण वे काफी दिनों तक ऊहापोह की स्थिति में रहे। इसी ऊहापोह के बीच उन्होंने स्व अजीत जोगी का दामन थाम लिया। लंबे समय तक उनके साथ रहकर राजनीति की। जब स्व जोगी ने कांग्रेस छोड़कर जनता कांग्रेस बनाया तो वे उनकी पार्टी में चले गए और लोरमी से ऐतिहासिक वोट से चुनाव जीता। लेकिन क्षेत्र में बदले राजनैतिक हालात के कारण 2013 के चुनाव में उन्हें हार का सामना करना पड़ा। स्व अजीत जोगी के निधन के बाद छजका का माहौल बिगड़ने लगा। स्वाभिमानी नेताओं का पार्टी में बने रहना मुश्किल हो गई। यही कारण है कि उन्होंने छजका भी छोड़ दी। छजका छोड़ने और भाजपा में शामिल होने के बीच का समय उनके जीवन का सबसे कठिन वक्त था। उनका राजनैतिक करियर बीच मझधार में फंसा रहा। इस वक्त को भी उन्होंने धैर्य के साथ निकाल लिया। हालांकि इस दौरान कांग्रेस के बहुत से नेता उन्हें वापस पार्टी में लाने का प्रयास कर रहे थे लेकिन पूर्व मुख्यमंत्री भूपेश बघेल से व्यक्तिगत रूप से राजनीतिक आदवत होने के कारण बात नहीं बनी। दूसरी तरफ भाजपा के नेता भी उन्हें अपनी पार्टी में शामिल कराने जोर लगा रहे थे। भाजपा के नेता उनकी लोकप्रियता का लाभ कई सीटों में लेना चाहते थे। काफी उठापटक के बाद पूर्व मुख्यमंत्री डॉ रमन सिंह और भाजपा के कई दिग्गज नेताओं से जीवंत संबंध काम आया और वे भाजपा में शामिल हो गए। भाजपा ने उन्हें तखतपुर से टिकट दिया और वे रिकॉर्ड मतों से चुनाव जीतकर पांचवीं बार विधानसभा पहुंचे। इस चुनाव में भाजपा ने लोरमी, कवर्धा, मुंगेली और पंडरिया समेत आसपास के कई क्षेत्रों में उनकी लोकप्रिय का लाभ लिया और इन क्षेत्रों में भी भाजपा ने अपने प्रत्याशियों को जिताने में सफल रहे। जनता के बीच उनकी छवि एक प्रखर वक्ता के रूप है। यही कारण है कि सड़क से लेकर सदन तक उनकी वाकपटुता का लोहा सभी पार्टी के नेता और कार्यकर्ता मानते है। किसी भी पार्टी में जाकर और किसी भी सिंबाल से चुनाव जीतने में सक्षम माने जाने वाले ठाकुर धर्मजीत सिंह ने आजादी के बाद से लेकर आज तक तखतपुर विधानसभा में जितने भी चुनाव हुए उसमें सर्वाधिक वोटों से लीड लेकर चुनाव जीतने का रिकार्ड बनाया। धरमजीत सिंह ने अपना पहला चुनाव 1998 में 19000 हजार वोट से जीता था। उन्होंने भाजपा के सिटिंग MLA मुनीराम साहू को 19000 वोटों से शिकस्त दी थी। सदन में शानदार प्रदर्शन के कारण पहली ही बार में उन्हें उत्कृष्ट विधायक का खिताब भी मिला था। उन्हें यह खिताब दो बार मिल चुका है। 2003 के विधानसभा चुनाव में धर्मजीत सिंह ने दूसरी बार भाजपा के प्रत्याशी मुनीराम साहू को 16 हजार वोटो से हराया। 2008 के चुनाव में उन्होंने भाजपा के जवाहर साहू को 5 हजार वोटो से शिकस्त दी और तीसरी बार विधायक चुने गए। 2013 के विधानसभा चुनाव में उन्हें लोरमी विधानसभा से भाजपा प्रत्याशी तोखन साहू से 6 हजार वोटों से हार का सामना करना पड़ा। 2018 में धर्मजीत सिंह ने लोरमी विधानसभा से उन्होंने फिर से ताल ठोंकी और भाजपा के तोखन साहू को लगभग 25 हजार से वोट से हराया।
00 उनका राजनैतिक करियर
1988–89 में धर्मजीत सिंह अध्यक्ष कृषि उपज मंडी समिति पंडरिया कवर्धा रहे। 1994 से 1998 तक सचिव मध्य प्रदेश कांग्रेस समिति रहे। 1998 में पहली बार लोरमी से विधायक चुने गए। लोक लेखा समिति, मध्य प्रदेश विधानसभा के सदस्य रहे। इसके अलाव वे छत्तीसगढ़ विधानसभा के लोक लेखा समिति, विशेषाधिकार समिति, याचिका समिति, सामान्य प्रयोजन समिति, सभापति पत्रकार दीर्घा सलाहकार समिति, विशेष आमंत्रित सदस्य कार्य मंत्रणा समिति, सरकारी उपक्रमों संबंधी समिति, प्राक्कलन समिति, प्रश्न एवं समन्वय समिति, सुविधा एवं सम्मान समिति के सदस्य रहे। धर्मजीत सिंह को सामाजिक और राजनीतिक क्षेत्र में उत्कृष्ट सेवा कार्य के लिए अटल बिहारी वाजपेई विश्वविद्यालय ने पीएचडी की मानद उपाधि भी प्रदान की है।
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