सेंट्रिंग बांधते समय हाइटेंशन तार से झुलसा मजदूर, कट चुके है दो हाथ, अभी भी जान खतरे में, केंद्रीय मंत्री के प्रयास से इलाज का रास्ता खुला

बिलासपुर। हाईटेंशन तार से झुलसे मजदूर की जान खतरे में पड़ गई है। युवक के परिजन हर स्तर पर सहयोग के लिए गुहार लगा चुके है लेकिन कोई सहयोग नहीं मिला। जब मामला केंद्रीय मंत्री के दरवाजे पर पहुंचा तो अधिकारी सक्रिय हुए और आनन फानन में एम्स में भर्ती कराने की प्रक्रिया शुरू हुई। महीनेभर पहले सेंटिंग बांधते समय 33 हजार केवी हाइटेंशन तार के चपेट में आ गया था। अभी तक के इलाज में युवक के दोनो हाथ कट चुके है और पैर का इलाज चल रहा है।

दरअसल 29 मार्च को भरारी के 29 वर्षीय युवक महावीर उजागर को एक ठेकेदार ने पहली बार मजदूरी कराने ले गया था। ठेकेदार का निर्माण का काम मोहनभाटा के एक फॉर्महाउस में चल रहा था। ठेकेदार अन्य मजदूरों के साथ सेंटिंग बांधने का काम करा रहा था। इसी दौरान नीचे से ऊपर रॉड खींचते समय रॉड हाइटेंशन तार के संपर्क में आ गया और बहुत बुरी तरह से झुलस गया। आनन फानन में उसे लेकर ट्रामा सेंटर में भर्ती कराया गया। डॉक्टरों ने इलाज के दौरान साफ कह दिया कि जान बचाने के लिए दोनों हाथ काटने के अलावा कोई विकल्प नहीं है। 3 अप्रैल को उसके दोनों हाथ काट दिए गए। महावीर उजागर के दोनो हाथ कट चुके है। पैर का इलाज चल रहा है। लेकिन मजदूर के पास इलाज के लिए पैसा नहीं था तो घर लौट गए थे। लेकिन पैर में इंफेक्शन फैलने का खतरा बढ़ गया है। यदि उचित उपचार नहीं हुआ तो पैर भी काटने की नौबत आ जाएगी। इस बीच घायल युवक के परिजन थाना से लेकर कलेक्टर के दरवाजे पर सहयोग के लिए आवेदन किया लेकिन कोई सहयोग नहीं हुआ। अंततः मंगलवार को घायल युवक के परिजन केंद्रीय राज्य मंत्री तोखन साहू के ऑफिस में पहुंचे और गुहार लगाई। श्री साहू ने तत्काल बिजली विभाग के अधिकारियों को फोन लगाकर उनको सहयोग करने के निर्देश दिए। इसके बाद एम्स के अधिकारियों को फोन करके घायल युवक का इलाज करने के लिए कहा है। विडंबना तो ये है कि युवक के इलाज में आयुष्मान कार्ड भी कोई काम नहीं आया। यही कारण है महावीर के इलाज में अब तक 8 से 10 लाख रुपए खर्च हो चुके हैं। आर्थिक रूप से कमजोर परिवार को अपनी जमीन तक बेचनी पड़ रही है। हालांकि खबर लिखे जाने तक केंद्रीय राज्य मंत्री श्री साहू के प्रयास से महावीर उजागर को बेहतर इलाज के लिए रायपुर रवाना कर दिया गया है।

00 भारती माली लेकर पहुंची मंत्री से मिलाने 
जब घायल युवक को कही से कोई सहयोग नहीं मिला तो जिला पंचायत सदस्य भारती माली युवक के परिजन को लेकर केंद्रीय मंत्री तोखन के पास पहुंची। उन्होंने मंत्री को बताया कि पीड़ित परिवार पहले ही कलेक्टर और कमिश्नर तक गुहार लगा चुके है, आवेदन दे चुके है, लेकिन कहीं से ठोस मदद नहीं मिली। भारती माली का कहना है की यह केवल एक हादसा नहीं, बल्कि जिम्मेदारों की लापरवाही का परिणाम है। जब तक पीड़ित परिवार को न्याय और आर्थिक सहारा नहीं मिलेगा यह लड़ाई जारी रहेगी। उन्होंने यह भी स्पष्ट किया कि जरूरत पड़ी तो मामला मुख्यमंत्री तक ले जाया जाएगा और जिम्मेदारों को जवाबदेह बनाया जाएगा।00 बिजली विभाग ने मांगा प्रमाण पत्र
परिजनों का आरोप है कि जब उन्होंने मदद के लिए संपर्क किया तो बिजली विभाग के अधिकारी विकलांगता प्रमाण पत्र लाने के लिए कहा। सवाल ये है जिस युवक को हॉस्पिटल में भर्ती किया गया है। उसकी जान खतरे में है तो उसको प्रमाण पत्र कौन देगा ?
00 सौमित्र दीवान पर सवाल— मानवता की कमी ?
फार्म हाउस संचालक सौमित्र दीवान का कहना है कि घटना के बाद उसने मानवता के नाते सहयोग करने का प्रयास किय था। लेकिन उनके परिजन उन्हें ही अपराधी मानने लगे और थाने में मेरे नाम पर जुर्म दर्ज करा दिया। जबकि घायल युवक ठेकेदार के अंदर काम में आया था। दुर्घटना के लिए ठेकेदार जिम्मेदार है। सेंट्रिंग बांधने से लेकर पूरा निर्माण का ठेका ठेकेदार का था। घटना के समय तो वह घटना स्थल पर था भी नहीं। जब सूचना मिली तो मैं मौके पर पहुंचा था।
00 FIR के बाद भी कार्रवाई नही, सवाल बरकरार
2 अप्रैल को इस मामले में एफआईआर दर्ज की गई, जिसमें ठेकेदार और फार्म हाउस संचालक का स्पष्ट उल्लेख है, लेकिन अब तक किसी प्रकार की ठोस कार्रवाई नहीं हुई है। न तो कानूनी दबाव दिखा और न ही आर्थिक जिम्मेदारी तय हुई। यह देरी अब इस मामले को और गंभीर बनाती जा रही है और सवाल खड़ा करती है कि आखिर जिम्मेदारी तय कब होगी।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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