बिलासपुर। सुपर स्पेशलिटी और कैंसर हॉस्पिटल को लेकर कांग्रेस बड़ा आंदोलन करने की तैयारी में है। जैसे ही कांग्रेस नेताओं को पता चला कि सरकार PPP मॉडल से हॉस्पिटल का निजीकरण करने वाले है पूर्व जिला अध्यक्ष विजय केशरवानी, जिला अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और शहर अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने प्रेस कांफ्रेंस करके जन आंदोलन करने का ऐलान कर दिया है। विजय केशरवानी का कहना है कि जमीन सरकार की, बिल्डिंग भी सरकारी पैसे से बना है और हॉस्पिटल में जितने भी उपकरण लगे है वह भी सरकार के पैसे से लगा है। जब निजीकरण ही करना था तो बनाया ही क्यों गया। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के हाथों लोकार्पण करके वाहवाही क्यों बटोरी गई। यह जनता से जुड़ा मामला है हॉस्पिटल का निजीकरण किसी भी कीमत में बर्दास्त नहीं किया जाएगा।
कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी, जिलाध्यक्ष ग्रामीण महेंद्र गंगोत्री एवं शहर कांग्रेस कमेटी के अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने संयुक्त प्रेसवार्ता करके भाजपा सरकार पर तीखा हमला किया और निजीकरण पर जवाब मांगा है।
बिलासपुर के कोनी में बने स्व दिलीप सिंह जूदेव सुपर स्पेशलिटी अस्पताल को लेकर घमासान शुरू हो गया है। छत्तीसगढ़ सरकार करीब ₹200 करोड़ की लागत से बने 240 बेड के सुपर स्पेशलिटी अस्पताल और 100 बेड के कैंसर अस्पताल को पब्लिक-प्राइवेट पार्टनरशिप (PPP) मॉडल पर चलाने के लिए पत्राचार शुरू कर दिया है। जैसे ही आयुक्त चिकित्सा शिक्षा और अवर सचिव सोनचंद साहू के बीच हुए पत्रकार हाथ लगा बवाल मच गया है। जिला कांग्रेस कमेटी के पूर्व अध्यक्ष विजय केशरवानी, जिला कांग्रेस ग्रामीण अध्यक्ष महेंद्र गंगोत्री और शहर कांग्रेस अध्यक्ष सिद्धांशु मिश्रा ने संयुक्त प्रेस वार्ता कर सरकार को घेरना शुरू कर दिया है। कांग्रेस नेताओं का आरोप है कि जिस अस्पताल की जमीन सरकारी, भवन सरकारी और निर्माण में लगा पूरा पैसा सरकारी है, उसके संचालन के लिए आखिर निजी भागीदारी की जरूरत क्यों पड़ रही है। जब अस्पताल जनता के टैक्स के पैसे से बनाया गया है तो उसका संचालन भी पूरी तरह सरकारी व्यवस्था के तहत होना चाहिए। कांग्रेस नेताओं ने सवाल उठाया कि यदि अस्पताल का संचालन PPP मॉडल पर किया जाएगा तो जिले और संभाग के मरीजों को ऐसा कौन-सा अतिरिक्त लाभ मिलेगा, जो सरकारी व्यवस्था में उपलब्ध नहीं कराया जा सकता था। नेताओं ने कहा कि सरकार को स्पष्ट करना चाहिए कि निजी भागीदारी के बाद गरीब, मजदूर, किसान और मध्यम वर्ग के मरीजों के लिए हॉस्पिटल में मुफ्त और सुलभ इलाज की व्यवस्था रहेगी कि नहीं। यदि बड़े निजी अस्पतालों की तरह हर जांच और इलाज के लिए मोटी रकम देना पड़ेगा तो करोड़ो रुपए खर्चकर सर्व सुविधायुक्त हॉस्पिटल क्यों बनाया गया है। मोटी रकम खर्च करके मरीज कहीं भी इलाज करा लेंगे। क्या निजी संस्थाओं को लाभ दिलाने के लिए हॉस्पिटल बनाया गया है ? प्रेस वार्ता में यह मुद्दा भी उठाया गया कि अस्पताल कब तक अपनी पूरी क्षमता के साथ संचालित होगा ? विशेषज्ञ डॉक्टरों की उपलब्धता, आधुनिक स्वास्थ्य सेवाओं की शुरुआत और सभी विभागों के पूर्ण संचालन को लेकर भी सरकार से जवाब मांगा गया। कांग्रेस नेताओं का कहना है कि जब अस्पताल के लिए सभी बुनियादी संसाधन पहले से उपलब्ध हैं तो फिर संचालन में लगातार देरी क्यों हो रही है ? और अब PPP मॉडल अपनाने की आवश्यकता क्यों पड़ रही है ? सरकार को स्थिति स्पष्ट करना चाहिए।
00 सरकार जनता के सामने स्पष्ट करे –
= PPP मॉडल की आवश्यकता क्यों महसूस हुई?
= KPMG को किस उद्देश्य से कंसल्टेंट नियुक्त किया गया ?
= जनता के पैसे से बने अस्पताल के संचालन में निजी भागीदारी से आम मरीज को क्या अतिरिक्त लाभ मिलेगा?
= गरीब मरीजों के मुफ्त और सुलभ इलाज की गारंटी क्या होगी?
00 PPP मॉडल में जनता के अधिकारों की क्या गारंटी है ?
1. PPP मॉडल में अस्पताल का नियंत्रण किसके पास रहेगार
2. इलाज की दरें कौन तय करेगा?
3. गरीब मरीजों के मुफ्त या रियायती इलाज की क्या व्यवस्था होगी?
4. आयुष्मान भारत योजना के अलावा सामान्य मरीजों को क्या सुविधा मिलेगी?
5. यदि मरीजों को परेशानी होगी तो जवाबदेही किसकी होगी?
6. PPP समझौते की महत्वपूर्ण शर्ते जनता के सामने सार्वजनिक क्यों नहीं की जा रही हैं ?
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