बिलासपुर। कांग्रेस के पूर्व विधायक विकास उपाध्याय का कहना है कि राम मंदिर में भाजपा और विश्व हिंदू परिषद ने कब्जा कर लिया है। इन सभी संस्थाओं का यह कलेक्शन सेंटर बन गया है। मंदिर में जो चोरी हुई है वह उसी का हिस्सा है। उनका आरोप है कि भगवान राम के नाम पर जुटाए गए करोड़ों रुपये के चंदे और मंदिर के चढ़ावे में भारी वित्तीय अनियमितताएं हुई हैं। लेकिन केंद्र सरकार इस पूरे मामले में चुप्पी साधे हुए है।
कांग्रेस भवन में पत्रकारों से चर्चा करते हुए विकास उपाध्याय ने कहा कि अयोध्या का राम मंदिर अब आस्था का नहीं, बल्कि “कलेक्शन सेंटर” बन गया है। मंदिर का संचालन ऐसे लोगों के हाथ में है जो भाजपा, आरएसएस और विश्व हिंदू परिषद से जुड़े हैं। उनके अनुसार, करोड़ों रामभक्त आज पूछ रहे हैं कि भगवान राम के नाम पर जुटाए गए हजारों करोड़ रुपये आखिर कहां गए और उनका हिसाब कौन देगा ? मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान राम करोड़ों भारतीयों की आस्था, संस्कृति और नैतिक चेतना के प्रतीक है। देश के कोने-कोने से गरीब, किसान, मजदूर, महिलाएं और श्रद्धालु अपनी मेहनत की कमाई, अपने गहने, अपनी बचत और अपनी श्रद्धा लेकर राम मंदिर निर्माण के लिए आगे आए। भाजपा, आरएसएस, विश्व हिंदू परिषद और संघ परिवार के संगठनों ने लगभग तीन दशकों तक भगवान राम के नाम पर राजनीति की, देश के गरीब व मध्यम वर्ग से राम के नाम पर चंदा एकत्र किया और इसी आंदोलन के आधार पर सत्ता प्राप्त की। आज वही करोड़ों रामभक्त यह पूछने को मजबूर हैं कि भगवान राम के नाम पर जुटाया गया चंदा और चढ़ावा आखिर किसके संरक्षण में लूटा गया ? यह केवल आर्थिक घोटाला नहीं है। यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था, विश्वास और भावनाओं के साथ किया गया घोर विश्वासघात है।
भाजपा राम द्रोही है. उसने पहले चंदा में हेराफेरी करवाया अब चढ़ावा में चोरी। भाजपा ने राम मंदिर के निर्माण के समय रामशिला पूजन के नाम से जो 14000 करोड़ रू. से अधिक राशि एकत्रित हुआ था। उसका जवाब आरएसएस एवं भाजपा के लोग नहीं दे पाये। उनके ही सहयोगी नेताओं ने ही राम मंदिर निर्माण के समय एकत्रित किये चंदे का आरोप लगाया था। जिन लोगों ने मंदिर बनाने के नाम पर चंदा में हेराफेरी किया था वही लोग मंदिर बनने के बाद चढ़ावे में हेराफेरी करने लगे, इन सबकी पृष्ठ भूमि आरएसएस और भाजपा की रही है। कहा जा सकता है इन घोटालों को आरएसएस भाजपा का संरक्षण रहा है। भाजपा ने देवद्रव्य चोरी करने के महापाप का संरक्षण किया है। राम मंदिर न्यास ट्रस्ट का गठन गृहमंत्री अमित शाह ने किया था इसलिए वहां पर घोटाले की नैतिक जिम्मेदारी मोदी और शाह की बनती है।
00 विकास ने किए तीन बड़े सवाल
1. जब ट्रस्ट का गठन प्रधानमंत्री की देखरेख में हुआ, तो इस घोटाले की जवाबदेही कौन लेगा?
2. अगर सब कुछ ठीक था. तो चंपत राय और अनिल मिश्रा के इस्तीफे क्यों हुए?
3. अगर कुछ गलत नहीं हुआ, तो सुप्रीम कोर्ट की निगरानी में स्वतंत्र जांच से डर किस बात का है?
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