शहर के डॉक्टरों में चल रही है नोट छापने की प्रतिस्पर्धा, सरकार नकेल कसना शुरू किया तो IMA को सामने रख बनाने लगे दबाव

बिलासपुर। शहर के नर्सिंग होम संचालकों और डॉक्टरों के बीच नोट छापने की प्रतिस्पर्धा चल रही है। आपदा को अवसर मानकर अपने ही आसपास के लोगों को लूटने में लगे हुए है। जब करवाई की बारी आई तो बचने के लिए IMA को सामने रखके दबाव बनाना शुरू कर दिए है।

शहर के डॉक्टर IMA अध्यक्ष डॉ अभिजीत रायजादा के नेतृत्व में पिछले दिनों CMHO से मिलकर निजी अस्पतालों को जो नोटिस जारी किया गया है उसको लेकर अपना विरोध जताया। IMA के बैनरतले लामबंद हुए ये डॉक्टर चाहते है कि जिन अस्पतालों को नोटिस जारी किया है उनके खिलाफ कोई कार्रवाई न किया जाए। हालांकि IMA ने CMHO को कोई लिखित आवेदन नही दिया है। लेकिन IMA के जरिए दबाव बनाने का उपक्रम शुरू हो गया है। अब सवाल ये उठ रहा है कि जिन अस्पतालों के खिलाफ शिकायत हुई है उनके खिलाफ करवाई नही हुई तो शिकायतकर्ता क्या हाथ मे हाथ रखकर बैठे रहेंगे ? क्या वो लोग हाई कोर्ट का दरवाजा नही खटखटाएंगे ? आखिर इन अस्पतालों की लूट और लापरवाही से लोगों ने अपनों को खोया है। तब सरकार हाईकोर्ट में क्या जवाब देगी ? दर असल शहर के कई निजी अस्पताल और डॉक्टर कोरोना महामारी नामक आपदा को अवसर मानते हुए भर्ती मरीजों को लूटना शुरू कर दिया। इस लूट में ऐसे युवा डॉक्टरों को प्रथम पंक्ति में देखा गया जो अभी हाल ही में अपना नर्सिंग होम्स या अस्पताल खोल के रखे है। इनमे ऐसे युवा डॉक्टर भी शामिल है जिनके माता-पिता ने अपने डॉक्टरी के पेशे से इस शहर में एक उत्कृष्ट मुकाम हासिल किया है। इस लूट में अपनों को बचाने की मजबूरी में डॉक्टरों ने जो मांगा परिजनों ने वो दिया। सैकड़ों की संख्या में मरीज के परिजन 10-10 लाख रुपए खर्च करने के बाद अपनों का शव लेकर घर गए है। एक-एक अस्पतालों से एक दिन में 8 – 8 लाशें निकली है। रोते बिलखते परिजन वो भी इसी पेशे से जुड़ी नर्सिंग छात्रा कि वो पीड़ा, जिसमें उसने अपने माता-पिता की मौत के बाद अस्पताल प्रबंधन पर आरोप लगाया कि इस अस्पताल में न प्रशिक्षित डॉक्टर है न स्टाफ है ? यहां मरीजों को मारने का काम हो रहा, प्लीज अपने मरीज को यहां मारने के लिए मत लाइये। लाश को बंधक बनाने की खबरे और एक के बाद एक सामने आई वीडियो ?
अपने आपको बचने के लिए डॉक्टरों का कहना है कि दवाइयां नही मिल रही, मार्केट से फ्लोमीटर और आवश्यक छोटे मोटे उपकरण तक गायब है। सबकी कालाबाजारी हो रही, दुगने-तिगुने दाम पर मिल रही। जोखिम खुद और परिवार का है इसलिए स्टाफ की फीस दुगनी हो गयी है, कैसे मैनेज करे। जहाँ तक मौतों का सवाल है तो जो मरीज लेट से और खराब कंडीशन में आ रहे उन्हें ही नही बचा पा रहे। रिकवरी रेट पर भी बात हो लोग स्वस्थ्य भी हुए है। तो ऐसे डॉक्टर CMHO की नोटिस के साथ खरीदी के बिल की सत्यापित प्रतिलिपि भी दें, ताकि ऐसे ब्यापारियों के खिलाफ भी कार्रवाई की जा सके।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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