एवरेस्ट फतह के बाद बीमार पड़ गई थी छत्तीसगढ़ की बेटी नंबर वन नैना, शेरपा की मदद से किया गया था रेस्क्यू

रायपुर। छत्तीसगढ़ (Chhattisgarh) के नाम एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। जान जोखिम में डालकर बस्तर (Bastar) की नैना सिंह धाकड़ ने एवरेस्ट (Everest) की चोटी फतह की है। अभियान के दौरान वह चोटिल भी हुई, लेकिन साथी पर्वतारोही याशी जैन की ने शेरपा की मदद से उसे रेस्क्यू कर लिया।

छत्तीसगढ़ के नाम एक बड़ी उपलब्धि हासिल हुई है। यह उपलब्धि हासिल की है जान जोखिम में डालकर बस्तर (Bastar) की नैना सिंह धाकड़ ने एवरेस्ट की चोटी फतह करके। वह दुनिया की इस सबसे ऊंची चोटी पर फतह करने वाली राज्य की पहली महिला पर्वतारोही बन गई हैं। इस अभियान में नैना चोटिल भी हुईं, लेकिन उसे साथी पर्वतारोही याशी जैन ने खेल भावना का परिचय देते हुए रेस्क्यू किया। नैना धाकड़ की इस उपलब्धि पर प्रदेश के मुख्यमंत्री भूपेश बघेल, विधानसभा अध्यक्ष डॉ चरणदास महंत और स्वास्थ्य मंत्री टीएस सिंहदेव ने बधाई दी है।

इन सबके बीच याशी जैन ने छत्तीसगढ़ की कहावत हम छत्तीसगढ़िया सबले बढ़िया को भी चरितार्थ किया है। जगदलपुर की पर्वतारोही नैना धाकड़ माउंट एवरेस्ट फतह करने के प्रयास में अत्यधिक थकान के कारण बीमार हो गई और जैसे ही पर्वतारोही याशी जैन को यह पता चला तो बिना समय खोये वो पर्वतारोही नैना की सकुशल वापसी मे जुट गईं। याशी जैन अपने दो प्रयासों के बावजूद माउंट एवरेस्ट पर फतह नहीं कर पाई थी और दोनो बार माऊंट एवरेस्ट के टॉप से कुछ ही दूरी से खराब मौसम के कारण लौटना पड़ा था और बेस कैम्प से भी कई मुश्किलों के बावजूद सुरक्षित काठमांडू आ गई थी. साथ ही जल्द रायगढ़ लौटने वाली थी।

00 याशी की तत्परता और शेरपा का अनुभव आया काम

जबकी पर्वतारोही नैना धाकड अपने एक्सपिडीसन को पूरा करने की तैयारी कर रही थी और याशी काठमांडू से लगातार पर्वतारोही नैना के एक्सपीडिशन पर नजर रख रही थी। एक जून की सुबह नैना का एक्सपिडीसन पूर्ण हो जाना था और टॉप पर पहुंच जाना था, परंतु दोपहर तक जब उसकी कोई खबर नहीं आई तो याशी चिंतित हो गई और नैना की कंपनी से लगातार संपर्क की कोशिश करने लगी। बड़ी मुश्किल से लगभग दोपहर दो बजे याशी को पता चला कि नैना अत्यधिक थकान के कारण बीमार हो गई है और माउंट एवरेस्ट से नीचे आने की हिम्मत नहीं कर कर पा रहीं हैं। ऐसे मे याशी ने हिम्मत जुटाई और तुरंत छत्तीसगढ़ के प्रथम माउंट एवरेस्टर राहुल गुप्ता (अंबिकापुर) और अपने पिता अखिलेश जैन (रायगढ़) से संपर्क साधा और विनती की “प्लीज कुछ करो नैना की जान बचाओ”। तुरंत ही जगदलपुर प्रशासन से संपर्क साधा गया। फिर जगदलपुर कलेक्टर रजत बंसल और एस डी एम गोकुल राऊते को पूरी घटना की जानकारी दी। उन्होने तुरंत नेपाल स्थित इंडियन एम्वेसी से बात की और संबंधित कंपनियों से सम्पर्क साधा। प्रशासन के हरकत मे आते ही तुरंत नैना के लिये रेस्क्यू आपरेशन शुरू हो गया और वहां के एक्सपर्ट शेरपा नैना को रेस्क्यू करने ऊपर बढ़ गए। शाम छह बजे तक नैना को रेस्क्यू करके कैंप चार तक ले आया गया था और अब वह आउट ऑफ डेंजर हैं। पर्वतारोही याशी की तत्परता और सह्दयता से पर्वतारोही नैना का रेस्क्यू सफल हो सका।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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