बिलासपुर। पूर्व मुख्यमंत्री और भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष डॉ रमन सिंह का कहना है कि भूपेश सरकार माफियाओं के चंगुल में फंस गई है। सरकार दिवालिया हो चुकी है। प्रदेश की जनता में इस सरकार के प्रति घोर निराशा, आक्रोश और पीड़ा है और वह अपने को ठगा सा महसूस कर रहे हैं।

भाजपा कार्यालय में पत्रकारों से चर्चा करते हुए डॉ रमन सिंह ने कहा कि आज ही के दिन 25 मई 1975 को तत्कालीन केंद्र सरकार आपातकाल लगाया था। रात के 12 बजते ही सभी राजनैतिक पार्टियों के नेताओं और पत्रकारों को जेल में ठूंस दिया गया था। तब की इंदिरा गांधी की सरकार ने नागरिकों की नैसर्गिक आजादी को छीन ली थी। देश के सवा लाख लोगों को मीसा के तहत जेल में डाल दिया गया था। कांग्रेस ने आपातकाल लगाकर संविधान की धज्जियां उड़ा दी थी। तब जयप्रकाश नारायण, अटल बिहारी वाजपेई, जार्ज फर्नांडीस, मधु लिमए समेत सारे विपक्ष के नेताओं ने केंद्र सरकार की इस निर्णय का विरोध कर 1977 में देश को दूसरी आजादी दिलाई थी। सरकार ने अभिव्यक्ति की आजादी को भी कुचलने में कोई कमी नहीं किया और हजारों अखबार बंद कर दिए गए। अनेक पत्रकारों को जेल जाना पड़ा। कांग्रेस आजादी की जंग में लड़ाई लड़ने की बात कहती है उसी की पार्टी ने देश में इमरजेंसी लगाकर देश को फिर से गुलाम बना डाला था। इमरजेंसी के दौरान जो कुछ भी हुआ, जो भी जुल्म ढाए गए उसे आज की पीढ़ी को बताना बहुत जरूरी है ताकि केंद्र में किसी की भी सरकार हो दोबारा इस तरह की हिम्मत ना कर सके ।
डॉ रमन सिंह ने राज्य सरकार पर हमला करते हुए कहा कि ढाई साल में यह सरकार कर्ज में डूब गई है और दिवालिया होने की ओर छत्तीसगढ़ बढ़ रहा है। राज्य की वित्तीय व्यवस्था चरमरा गई है। किसी भी सरकार के लिए ढाई साल का कार्यकाल स्वर्णिम काल होते हैं मगर भूपेश बघेल की सरकार ढाई साल गंवा दिए हैं। सरकार के पास पैसे नहीं है। सरकार का आर्थिक प्रबंधन फेल हो गया है। सारे निर्माण कार्य और विकास कार्य बंद है और भाजपा तथा प्रदेश की जनता अगर उनसे सवाल पूछती है तो जवाब देने के बजाय भागते हैं।
छत्तीसगढ़ के साथ ही बिलासपुर के हालात बहुत गंभीर है यहां अवैध प्लाटिंग हो रही है, नगर निगम के अधिकारी चुप बैठे हैं। सत्ता के संरक्षण में भूमाफिया सक्रिय है। यहां अमृत मिशन के कार्य, अरपा भैसाझार परियोजना, तिफरा ओवरब्रिज का काम सब लटके हुए हैं। पूरे प्रदेश में रेत माफिया सक्रिय हैं और उन्हें सत्ता का संरक्षण प्राप्त है। जिस तरह प्रदेश में अराजकता का माहौल है उसे आम आदमी भी महसूस कर रहा है। किसानों का रकबा कम क्यों किया जा रहा है, किसानों को 2 साल का बोनस भी नहीं मिला है। महिलाओं से शराबबंदी का वादा किया गया था वह भी पूरा नहीं हुआ। इसका जवाब सरकार के पास नहीं है। यहां के विधायक पुलिस कमिशन की बात उठाते हैं। ढाई साल में छत्तीसगढ़ अपराध गढ़ बन गया हैं। केंद्र सरकार द्वारा गरीबों के आवास के लिए जो राशि स्वीकृत की गई थी उसमें राज्य सरकार को मेचिग ग्रांट के तहत जो राशि दिए जाने थे वह जमा नहीं किया गया। सरकार के पास किसी भी मद के लिए पैसे नहीं है। हम यह आरोप नहीं लगा रहे हैं बल्कि सीएजी ने जो ऑडिट किया है उसके आंकड़े को हम बता रहे हैं। राज्य के बजट 80,000 करोड रुपए में 70611 करोड रुपए राजस्व मंद में खर्च हो गए। यानी बजट का 88% राशि सब्सिडी, वेतन, ब्याज आदि में खर्च हो रहा और मात्र 12% राशि ही पूंजीगत है। हमारी सरकार ने 15 साल में 33 हजार करोड़ रुपए कर्ज लिए लेकिन भूपेश बघेल की सरकार ने सिर्फ ढाई साल में ही 37 हजार करोड़ का कर्ज ले लिया है इससे यह स्पष्ट होता है कि राज्य की आर्थिक स्थिति किस तरह है।
उन्होंने कहा कि बारिश में सीमेंट के मूल्य में कभी भी बढ़ोतरी नहीं होती, मगर इस सरकार के कार्यकाल में बारिश में सीमेंट के मूल्य बढ़कर ₹300 हो चुका है और रेत का तो भगवान ही मालिक है। रेत छत्तीसगढ़ से उत्तर प्रदेश और बिहार जा रहा है। जब democrecy.in उनसे पूछा कि 2003 में सीमेंट की बारी 99 रुपए में मिल रही थी जो 2004 में बढ़कर 120, 2005 में 155 रुपए और 2006 में 200 रुपए हो गया था। आपके मुख्यमंत्री बनते ही दो साल में ही दुगना हो गया था। इसका क्या जवाब देंगे ? इस पर वो कोई स्पष्ट जवाब नही दे पाए और सवाल टाल गए।
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