बिलासपुर। आम आदमी पार्टी के नेताओं का कहना है कि संगठन को मजबूत करने का प्रयास किया जा रहा है। आने वाले चुनाव में पार्टी जनता के सामने तीसरे विकल्प के रूप में सामने आएगी।

रविवार को बिलासपुर में आम आदमी पार्टी का कार्यकर्ता सम्मेलन सम्पन्न हुआ। इस दौरान दिल्ली से आए आम आदमी पार्टी छत्तीसगढ़ के सह प्रभारी सुरेश कठैत ने पत्रकारों से बातचीत करते हुए बताया कि आगामी विधानसभा चुनाव में पार्टी प्रदेश मे तीसरे विकल्प के रूप में जनता के बीच उतरेगी। इसके लिए संगठन विस्तार की प्रक्रिया तेज़ कर दी गई है। 10 दिनों के प्रवास में छत्तीसगढ़ आए कठैत अंबिकापुर और बिलासपुर के बाद अब 5 जुलाई को जांजगीर, 6 जुलाई को रायपुर एवं 7 जुलाई को भानुप्रतापपुर में आम आदमी पार्टी के पदाधिकारी एवं कार्यकर्ताओं की बैठक लेंगे। जल्द ही पार्टी के कार्यकर्ता और पदाधिकारी शिक्षा, स्वास्थ्य, बिजली, पानी, सड़क जैसे मुद्दों को लेकर जनता के बीच जाएगी। यही नहीं आवश्यकता पड़ी तो सड़क की लड़ाई भी लड़ी जाएगी। इस अवसर पर प्रदेश अध्यक्ष कोमल हुपेंडि ने कहा कि संगठन को लेकर पार्टी चिंतित है। सभी जिलों में संगठन को नया स्वरूप दिया जा रहा है। विधानसभा स्तर पर भी संगठन खड़ा किया जा रहा है। अभी प्रियंका शुक्ला और दिलीप अग्रवाल को प्रवक्ता की जिम्मेदारी दी गई है। इस अवसर पर हुपेंडी ने प्रदेश सरकार पर हमला करते हुए कहा कि शिक्षा और स्वास्थ्य के मुद्दों पर तो भूपेश सरकार फेल है ही साथ ही बीते ढाई सालों में प्रदेश सरकार ने आदिवासियों पर जितने ज़ुल्म ढाए हैं उससे छत्तीसगढ़िया मुख्यमंत्री के रूप में प्रोजेक्ट किए गए भूपेश बघेल की आदिवासी विरोधी नीतियां सबके सामने आ गई हैं। उन्होंने सिलगेर में चल रहे आदिवासियों के आंदोलन का समर्थन किया और प्रदेश सरकार पर जनविरोधी होने का आरोप भी लगाया। नवनियुक्त प्रदेश प्रवक्ता एडवोकेट प्रियंका शुक्ला ने कहा कि दिल्ली में पार्टी ने शिक्षा और स्वास्थ्य पर जिस तरह से बेहतर कार्य किया है उसने छत्तीसगढ़ सरकार को शिक्षा और स्वास्थ्य पर बात करने को मजबूर कर दिया है और पार्टी को ख़ुशी है कि दिल्ली की देखासीखि अब यहां की सरकार भी इन ज़रूरी मुद्दों पर कम से कम बात तो कर रही है। इस अवसर पर पार्टी के अन्य पधाधिकारियों ने कहा कि सरकारी अस्पतालों और स्कूलों को बेहतर बनाने की बजाए भूपेश सरकार निजीकरण को बढ़ावा दे रही है। उन्होंने कहा कि प्रदेश में 55 हज़ार सरकारी स्कूल हैं जिनमें से 979 स्कूलों के अपने भवन तक नहीं हैं, हज़ारों स्कूलों मे बाउंड्री वॉल ही नहीं है, सरकार बनने के बाद से शिक्षाकर्मियों की भर्ती नहीं निकली है, हज़ारों शिक्षकर्मि पोस्टिंग दिए जाने की मांग के साथ लंबे समय से आंदोलन कर रहे हैं। सरकार इन कमियों को दूर करने की बजाए अंग्रेज़ी माध्यम के नए स्कूल खोलकर पब्लिसिटी बटोरना चाहती है। पार्टी ने सवाल उठाया कि जब पहले से ही शिक्षकों की कमी है तो इन अंग्रेज़ी माध्यम के स्कूलों के लिए शिक्षक कहां से आएंगे।
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