तहसीलदार तुलसी राठौर को चाहिए नामांतरण के लिए 20 हजार रुपए, बाबू को हर पेशी में देना होगा 5 सौ, नहीं देने पर नामांतरण की फाइल कर दी गायब

बिलासपुर। सीपत के तहसीलदार को नामांतरण के लिए 20 हजार रुपए चाहिए, यही नही प्रकरण समाप्त होते तक पदस्थ बाबू को हर पेशी में 5 पांच सौ रुपए देना होगा। जी हां, कलेक्ट्रेट में की गई शिकायत से स्पष्ट हो गया है कि सीपत के तहसील कार्यालय में क्या चल रहा है। यह शिकायत किया है एक पीड़ित ने जो दो साल से नामांतरण कराने के लिए भटक रहा है।

प्रदेश स्तर पर राजस्व के लंबित प्रकरण को लेकर सरकार की किरकिरी हो रही है और तहसीलों में बिना रिश्वत दिए कोई काम नही हो रहा है। इसका उदाहरण कलेक्ट्रेट में हुई शिकायत से साफ हो गया है कि राजस्व के मामले लंबित क्यो है। शीतल प्रशाद त्रिपाठी नामक एक पीड़ित ने कलेक्टर को शिकायत किया है जिसके अनुसार दर्राभाठा में 82 डिसमिल जमीन खरीद। इसके बाद राजस्व रिकार्ड में नामांतरण करने के लिए 20 जनवरी 2020 को आवेदन प्रस्तुत किया। तहसील कार्यालय में प्रकरण दर्ज करने के बाद क्रेता और विक्रेता सभी ने शपथ पत्र प्रस्तुत किया गया और न्यायालय में बयान दर्ज किया गया। जमीन की खरीदी बिक्री पूरी तरह से अविवादित है। नामांतरण के लिए सारी प्रक्रिया पूरी करने के बाद केवल आदेश होना रह गया था। इसी बीच कोरोना के कारण लॉक डाउन हो गया और तहसीलदार ने आवेदकों की अनुपस्थिति बताकर प्रकरण खारिज कर दी। इसकी जानकारी आवेदकों को टीब हुई जब लॉक डाउन समाप्त हुआ और प्रकरण की जानकारी लेने तहसील कार्यालय पहुंचे।

इसके बाद आवेदकों ने नए सिरे से आवेदन देकर प्रकरण को फिर से रिस्टोर कराया और सुनवाई के लिए 17 फरवरी 2021 की पेशी दी गई। जब आवेदक 17 फरवरी को तहसील पहुंचे तो कहा गया कि 20 हजार रुपए लेकर आओ तो मामला आगे बढ़ेगा। यही नही आवेदकों से यह भी कहा गया कि हर पेशी में बाबू को भी 5 सौ रुपए देने होगा वो भी प्रकरण जबतक समाप्त नहीं होगा तब तक देना होगा। यही नही पैसे नही देने पर प्रकरण की फाइल गायब कर दी गई है। आवेदकों को पेशी भी नही दिया जा रहा है। तहसील कार्यालय के इस डिमांड से आवेदक सकते में है और काफी दिनों तक मानसिक रूप से परेशान रहा। आवेदकों को कोई रास्ता नही दिखने पर कलेक्ट्रेट में शिकायत कर दिया है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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