झीरम कांड की जांच पूरी, आयोग ने सरकार के बजाए राज्यपाल को सौंपा 4 हजार पेज का रिपोर्ट, कांग्रेस ने उठाए सवाल

रायपुर। राज्यपाल सुश्री अनुसुईया उइके को झीरम घाटी जांच आयोग की रिपोर्ट सौंप दी गई है। यह रिपोर्ट आयोग के सचिव एवं छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के रजिस्ट्रार (न्यायिक) संतोष कुमार तिवारी ने सौंपी। आयोग ने राज्यपाल को जो रिपोर्ट प्रस्तुत किया है वह 10 वाल्यूम और 4184 पेज में तैयार किया गया है। यह आयोग छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के पूर्व न्यायाधीश प्रशांत कुमार मिश्रा के अध्यक्षता में गठित किया गया था। श्री मिश्रा छत्तीसगढ़ उच्च न्यायालय के कार्यवाहक मुख्य न्यायाधीश भी थे तथा वर्तमान में आंध्रप्रदेश उच्च न्यायालय के मुख्य न्यायाधीश है। झीरम घाटी की घटना 25 मई 2013 को हुई थी। इस घटना की जांच के लिए आयोग का गठन 28 मई 2013 को किया गया था। उल्लेखनीय है कि बस्तर के झीरम घाटी में नक्सलियों ने तत्कालीन कांग्रेस विधायक नंदकुमार पटेल के काफिले पर हमला किया था। जिसमें नंदकुमार पटेल, महेन्द्र कर्मा सहित अन्य लोग शहीद हो गए थे। इस घटना में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल गंभीर रूप से घायल हुए थे। जिनका बाद में इलाज के दौरान निधन हो गया था।

झीरम घाटी हमले की रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपे जाने के बाद कांग्रेस ने सवाल उठाए हैं। रिपोर्ट राज्यपाल को सौंपे जाने पर आपत्ति दर्ज़ की है। कांग्रेस प्रवक्ता सुशील आनंद शुक्ला का कहना है कि सामान्यतया जब भी किसी न्यायिक आयोग का गठन किया जाता है, तो आयोग अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपती है। लेकिन झीरम नरसंहार के लिए गठित जस्टिस प्रशांत मिश्र आयोग की ओर से रिपोर्ट सरकार के बदले राज्यपाल को सौंपना ठीक संदेश नहीं दे रहा है। उन्होंने कहा कि जब आयोग का गठन किया गया था तब इसका कार्यकाल 3 महीने का था। तीन महीने के लिए गठित आयोग को जांच में 8 साल कैसे लग गया ? आयोग ने हाल ही में यह कहते हुए सरकार से कार्यकाल बढ़ाने की मांग की थी कि जांच रिपोर्ट रिपोर्ट तैयार नहीं है। इसमें समय लगेगा।
सुशील आनंद शुक्ला ने कहा कि जब रिपोर्ट तैयार नहीं थी आयोग इसके लिए समय क्यों मांग रहा था फिर अचानक रिपोर्ट कैसे जमा हो गई ? यह भी शोध का विषय है। उन्होंने पूछा है कि ऐसा क्या है जो सरकार से छुपाने की कोशिश की जा रही है ? कांग्रेस ने राज्य सरकार से झीरम कांड के व्यापक जांच के लिए एक न्यायिक जांच आयोग गठन कर नए सिरे से जांच की मांग की है।
बता दें कि झीरम घाटी की घटना 25 मई 2013 को हुई थी। इस घटना की जांच के लिए आयोग का गठन 28 मई 2013 को किया गया था। उल्लेखनीय है कि बस्तर के झीरम घाटी में नक्सलियों ने तत्कालीन कांग्रेस विधायक नंदकुमार पटेल के काफिले पर हमला किया था। जिसमें नंदकुमार पटेल, महेन्द्र कर्मा सहित अन्य लोग शहीद हो गए थे। इस घटना में पूर्व केंद्रीय मंत्री विद्याचरण शुक्ल गंभीर रूप से घायल हुए थे। जिनका बाद में इलाज के दौरान निधन हो गया था।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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