बिलासपुर। सेवानिवृत्ति के बाद प्रधान आरक्षक का 10 साल तक रोके रखा ग्रेच्युटी पेंशन व सेवानिवृत्ति देयक। हाईकोर्ट ने भिलाई एसपी को आदेश दिया 8 फीसदी ब्याज के साथ संपूर्ण राशि का 10 दिन में भुगतान करें। मामले की सुनवाई जस्टिस संजय के अग्रवाल की सिंगल बेंच में हुई।
भिलाई के चंद्रनगर कोहका के फहीमुद्दीन सिद्धिकी ने हाईकोर्ट में अधिवक्ता अभिषेक पांडेय और दीपिका सन्नाट के माध्यम से याचिका दायर की। इसमें बताया कि वह पुलिस विभाग के भिलाई स्थित पुलिस अधीक्षक कार्यालय के दूरसंचार विभाग में प्रधान आरक्षक के पद पर पदस्थ थे। यहां से 30 जुलाई 2010 को 62 वर्ष की आयु पूर्ण होने पर सेवानिवृत्त हुए। इसके 10 साल बाद भी उन्हें ग्रेच्युटी की राशि नहीं दिया गया। कोर्ट में तर्क के साथ पूर्व में हाईकोर्ट की डिवीजन बेंच द्वारा पारित न्याय दृष्टांत का हवाला दिया। कहा कि किसी भी शासकीय कर्मचारी को सेवानिवृत्त के दिन ही ग्रेच्युटी और अन्य सेवानिवृत्ति देयक की राशि दी जाएगी। किसी भी स्थिति में ग्रेच्युटी की राशि नहीं रोकी जाएगी। इस मामले में याचिकाकर्ता शासकीय आवास खाली नहीं किया था, इसके कारण उसकी ग्रेच्युटी राशि रोकी गई थी, बाद में आवास खाली करने के बाद भी परेशान करने की नियत से राशि नहीं दी जा रही थी। याचिका को गंभीरता से लेते हुए कोर्ट ने याचिकाकर्ता की 72 वर्षी की आयु और शारीरिक परेशानियों को देखते हुए पुलिस अधीक्षक भिलाई को यह निर्देशित किया है कि वह 10 दिन के भीतर याचिकाकर्ता का संपूर्ण ग्रेच्युटी 8 फीसदी ब्याज के साथ दें।
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