बाघ ने पहले अपने केज का गेट तोड़ा, फिर बाहर निकलकर बाघिन के केज का गेट तोड़ा और हमला कर दिया ? बाघिन की मौत … कहानी फर्जी तो नही ?

बिलासपुर। कानन के मिनी जु में फिर एक वन्य प्राणी की मौत हो गई है। मौत कारण बताया जा रहा है कि बाघ ने अपने केज का गेट तोड़ा और चेरी के केज में घुसकर हमला कर दिया। उसके हमले से स्वांस नली फट गई और चेरी की मौत हो गई। जानकारी के लिए बता दे केज का गेट लोहे का बना होता है और हर बाघ-बाघिन को अलग-अलग केज में रखा जाता है।

कानन पेंडारी स्थित मिनी जु इन दिनों वन्य प्राणियों के लिए कब्रगाह बन गया है। नीलगाय, हिप्पोपोटामस, दो भालू और एक बाघिन की मौत के बाद सोमवार को एक और बाघिन की मौत हो गई। दो महीने के अंदर यहां आधा दर्जन से ज्यादा वन्य प्राणियों की मौत हो चुकी है। इस बार 13 वर्ष की उम्रदराज बाघिन चेरी की बारी थी। मिनी-प्रबंधन की माने तो चेरी की मौत बाघ और बाघिन के बीच संघर्ष करना बना। अधिकारियों की माने तो बाघ भैरव ने पहले अपने केज गेट तोड़ा फिर बाघिन के केज का गेट तोड़ा और बाघिन के केज में घुसकहमला कर दिया। एक – दूसरे को कई बार पंजे मारे, लेकिन भैरव के आगे चेरी टीक नहीं पाई। सोमवार तड़के 4 बजे बाघ भैरव ने चेरी का गला दबोच लिया, खून की धार बहने लगी, अंततः बाघिन चैरी ने दम तोड़ दिया। सुबह जब कीपरों ने केज को देखा तो दंग रह गए, चेरी के केज में चारो तरफ खून ही खून फैला हुआ था और चेरी का शव चित्त पीडीए था। वन विभाग के अधिकारी ये कहानी ऐसे बता रहे है जैसे बाघ और बाघिन का संघर्ष अपनी आंखों से देखा हो। फिलहाल पशु चिकित्सकों ने बाघिन का पोस्टमार्टम कर दिया है और हर बार की तरह सेंपल जांच के लिए भेज दिया है। प्रारंभिक रिपोर्ट में मौत का कारण आपसी संघर्ष को बताया गया है। पोस्टमार्टम भी हरबार की तरह सर्वसुलभ पशुचिकित्सक डॉ. आरएम त्रिपाठी, डॉ. अजीत पांडेय, डॉ. अधीक्षक को उपस्थिति में की गई।

सुलगते सवाल

01 क्या बाघ लोहे से बने दो-दो गेट तोड़ सकता है ?

02 क्या लोहे का गेट तोड़ने के लिए बाघ को प्रशिक्षित किया गया था ?

03 क्या जु के कर्मचारियों ने ये सब अपनी आंखों से देखा ?

04 यदि देखा तो संघर्ष रोकने के लिए क्या प्रयास किए ?

05 यदि नहीं देखा तो ये कहानी गढ़ी किसने ?

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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