पत्थलगांव- यहा के लगभग 380 प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओ मे आने वाली लाखो रूपये की अनुदान राशि की बंदरबांट के मामला मे अब तक दोषी कर्मचारी पर कार्यवाही नही हो पायी है। पूरा मामला दुध की तरह साफ होने के बाद भी जिला मिशन के अधिकारी दोषी कर्मचारी को बचाने के जुगाड मे है। पिछले पंद्रह दिनो पहले जांच के नाम पर यहा के इंदिरा गांधी कन्या स्कूल मे आयी जिला मिशन की टीम ने अब तक दोषी कर्मचारी के खिलाफ कार्यवाही नही की है,जबकि मामला बंदरबंाट का दिखते ही जिला कलेक्टर ने अनुदान राशि के भुगतान पर तत्काल रोक लगा दी थी,जिसके बाद व्यापारी का काम तो रूक गया,परंतु इस काम का मास्टरमाईंड बी.आर.सी का कर्मचारी आज तक कार्यवाही से बचा हुआ है। पूरे मामले की सत्यता सामने आने के बाद भी दोषी कर्मचारी पर कार्यवाही ना होने से शिक्षा विभाग मे तरह-तरह के सवाल उठने लगे है। शिकायतकर्ता प्रधानपाठको ने जांच करने के तरीके पर पहले ही सवाल उठाये थे,उसके बाद अब तक जांच का परिणाम ना आना उनके सवालो को सच्चाई मे बदलने का काम कर रहा है। दरअसल यह पूरा मामला यहा के लगभग 380 स्कूलो मे समग्र शिक्षा की ओर से आयी अनुदान राशि केे बंदरबांट का था,जिसमे बी.आर.सी.सी कार्यालय मे बैठे एक कर्मचारी की मिलीभगत से कुछ व्यापारियों ने अनुदान राशि मे डाका डालने का प्रयास किया। उन्होने अनुदान राशि स्कूल मे आते ही भरपूर फायदा उठाने की योजना बना डाली। इस कार्य मे बी.आर.सी.सी कार्यालय मे बैठा कर्मचारी अहम भूमिका निभा रहा था,वह अपने अधिकारी के कंधे पर बंदूक रखकर अनुदान राशि के बंदरबांट की कार्ययोजना रातो रात तैयार कर लिया।।
समन्वयको को लिया झांसे मे-:अनुदान राशि की बंदरबांट मे बी.आर.सी.सी के कर्मचारी ने समन्वयको का जमकर फायदा उठाया। उन्हे अपने झांसे मे लेकर उनके जरिये सभी स्कूल के प्रधानपाठको को मोबाईल के जरिये एक ही फर्म से सामान खरीदी करने का मैसेज फारवर्ड करा दिया,जिसके बाद स्कूल के प्रधानपाठको मे नाराजगी उत्पन्न होने लगी। दरअसल समन्वयको के द्वारा प्रधानपाठको को जिस फर्म से सामान खरीदी करने का निर्देश दिया गया उस फर्म द्वारा बाजार से कही अधिक दर पर स्कूलो मे सामान बेचा जा रहा था। इस बात से अधिकांश स्कूल के प्रधानपाठक नाराज हो गये और उन्होने दबी जुबान एक ही फर्म से घटिया एवं महंगा सामान खरीदी करने के निर्देश का विरोध करना शुरू कर दिया,परंतु यह बात बी.आर.सी.सी के कर्मचारी को रास नही आयी,वह अपने तरीके से प्रधानपाठक एवं समन्वयको को अपने पक्ष मे करते हुये पूरे मामले पर पर्दा डालने की कोशिश करने लगा।।
योजना एवं शासन का नाम हो रहा खराब- छत्तीसगढ के मुखिया भूपेश बघेल द्वारा शिक्षा के स्तर को उपर लाने का निरंतर प्रयास किया जा रहा है,परंतु नीचे स्तर के कार्यवाहको की वजह से शिक्षा का स्तर दिनप्रतिदिन गिरते जा रहा है। अनुदान राशि स्कूल एवं वहा अध्ययनरत बच्चो के विकास मे खर्च की जाती है,परंतु इस राशि का स्कूल मे आते ही शिक्षा विभाग एवं व्यापारियों की नजरे टेढी होने लगती है,इन दोनो की मिलीभगत से यह राशि स्कूल एवं बच्चो के विकास मे खर्च नही हो पाती,जिसके कारण कही न कही छ.ग.शासन एवं वहा से संचालित होने वाली शिक्षा संबंधित योजनायें क्रियान्वित होने से पहले ही फ्लाप हो रही है,परंतु संशय इस बात का है कि आखीर क्यो योजनाओ पर कालिक पोतने वाले दोषी लोगो के कृत्य पर पर्दा डाल दिया जाता है,जिसके कारण दोष सिद्ध होने के बाद भी कार्यवाही का परिणाम नही आ पाता
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