शिवरीनारायण। शिवरीनारायण न केवल छत्तीसगढ़ राज्य का अपितु संपूर्ण भारतवर्ष के सबसे प्राचीनतम तीर्थ स्थलों में से एक है। कहा जाता है किभगवान श्री रामचंद्र जी अपने अनुज लक्ष्मण जी सहित माता सीता की खोज करते हुए इस स्थान से गुजरे थे*। अर्थात यह त्रेता युग की घटना है, कथन का तात्पर्य यह है कि इसके पूर्व भी यहां कोई ना कोई बस्ती रहा होगा! जहां भगवान ठहरे थे! इसे माता शबरी की पुण्य धरा होने का भी गौरव प्राप्त है। इस नगर का नाम भक्त और भगवान के नाम पर सबरी नारायण पड़ा जिसे वर्तमान में लोग शिवरीनारायण के रूप में याद करते हैं। जिस स्थान पर स्वयं परमात्मा की ही चरण धुली पड़ा हो उस स्थान की महिमा को शब्दों में व्यक्त नहीं किया जा सकता*! यहां केवल दर्शन मात्र से जीवात्मा को मोक्ष की प्राप्ति हो जाती है। गोस्वामी तुलसीदास जी महाराज ने श्री रामचरितमानस में लिखा है कि – सन्मुख होई जीव मोहि जबहिं । जन्म कोटि अघ नासहिं तबाहिं*।। माघी पूर्णिमा के अवसर पर भगवान श्री जगन्नाथ जी अपने मूल स्थान शिवरीनारायण पधारते हैं, इसलिए आज के दिन लोग भगवान की एक झलक दर्शन प्राप्त करने के लिए लालायित रहते हैं। माघी पूर्णिमा स्नान के साथ ही छत्तीसगढ़ राज्य के सबसे बड़े मेले का शुभारंभ हो गया, अब यह महाशिवरात्रि तक निर्बाध रूप से संचालित होगा। शिवरीनारायण आध्यात्मिक नगरी है, यहां लोग पुण्य अर्जित करने के लिए मेले में आते हैं। रात भर चौक- चौराहों में बैठकर भगवान के नाम का सुमिरन करते हैं। भजन -पूजन, पुण्य अर्जित कर सुबह त्रिवेणी संगम में स्नान करते हैं। शिवरीनारायण के प्रत्येक गली -चौराहों में लोग कीर्तन मंडली, भजन मंडली, रामायण मंडली के साथ भगवान का भजन करते हुए दिखाई दिए। शिवरीनारायण मठ में भी प्रत्येक वर्ष की तरह पूरे रात भर भगवान के भजन में श्रद्धालु भक्तगण तल्लीन थे।
श्री शिवरीनारायण मठ पीठाधीश्वर राजेश्री महन्त रामसुन्दर दास जी महाराज प्रत्येक वर्ष की तरह माघी पूर्णिमा के अवसर पर सुबह 3:00 बजे त्रिवेणी संगम के बाबा घाट में स्नान के लिए अपने सहयोगियों सहित उपस्थित हुए। यहां चित्त्रोत्पला गंगा जी की स्तुति, पूजन तथा दीपदान कर मठ के लिए वापस हुए। लोगों ने बड़ी संख्या में महानदी में दीपदान करके पुण्य लाभ अर्जित किया।सुबह 4:00 स्नान- ध्यान से निवृत होने के पश्चात राजेश्री महन्त जी महाराज सहयोगियों सहित नर -नारायण मंदिर में उपस्थित हुए। मंदिर का पट खुलने के पश्चात भगवान की भव्य मंगल श्रृंगार आरती संपन्न हुआ। बड़ी संख्या में उपस्थित श्रद्धालु भक्तों ने भगवान की स्तुति की, इसके साथ ही आम दर्शनार्थियों की लंबी लाइन भगवान के दर्शन के लिए कतारवध्द होकर अपनी बारी का घंटों प्रतीक्षारत थे, लोगों ने भगवान का दर्शन प्राप्त कर अपना जीवन धन्य बनाया।
00 जगदीश मंदिर में पूजा अर्चना
भगवान नर -नारायण मंदिर में पूजा अर्चना संपन्न होने के उपरांत राजेश्री महन्त जी महाराज मठ मंदिर स्थित भगवान जगन्नाथ जी के मंदिर में उपस्थित हुए। यहां विधिवत पूजा- अर्चना की गई। स्तुति गान के पश्चात श्रद्धालु भक्तों को तुलसी पत्ती का प्रसाद वितरण किया गया।
00 खिचड़ी प्रसाद का वितरण
प्रत्येक वर्ष की तरह मठ मंदिर प्रांगण में नगर के समाज सेवियों के सौजन्य से खिचड़ी प्रसाद का भंडारा आम दर्शनार्थियों के लिए किया गया, इसमें लोगों ने बड़ी संख्या में उपस्थित होकर भगवान जगन्नाथ जी का प्रसाद प्राप्त किया। एक कहावत प्रसिद्ध है *जगन्नाथ के भात को जगत पसारे हाथ* वह दृश्य यहां दिखाई दे रहा था।
00 शाही स्नान की परंपरा का निर्वाह
शिवरीनारायण में शाही स्नान की परंपरा विगत अनेक वर्षों से संचालित है इसका निर्वाह किया गया। सुबह 11:00 बजे राजेश्री महन्त जी महाराज एवं संत -महात्मा तथा नगर वासी बड़ी संख्या में शाही स्नान के लिए महानदी, जोक नदी एवं शिवनाथ नदी के त्रिवेणी संगम तट बाबा घाट पर उपस्थित हुए। स्नान के पश्चात दीपदान किया गया तत्पश्चात सभी लोग बाजे -गाजे के साथ शिवरीनारायण मठ के लिए रवाना हुए। माघी पूर्णिमा के शुभ स्नान, दर्शन -पूजन के साथ ही शिवरीनारायण के विशाल ऐतिहासिक मेले का शुभारंभ हो गया है। यहां न केवल छत्तीसगढ़ राज्य से अपितु देश के अनेक राज्यों से लोग सपरिवार मेले में पहुंचकर भगवान का दर्शन पूजन करके अपना जीवन धन्य बनाते हैं। भगवान श्री कृष्ण ने श्रीमद् भागवत गीता में स्वयं कहा है कि – सर्व धर्मान्परित्यज्य मामेकं शरणं व्रज। अहं त्वम सर्व पापेभ्यो मोक्षयिष्यामि मा शुच:।।
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