पत्थलगांव। शासकीय स्कूलो मे आयी अनुदान राशि से एक ही फर्म द्वारा खरीदी करने के मामले मे जांच रिपोर्ट अफसरो के एक टेबल से दूसरे टेबल मे घुम रही है। मामले मे बी.आर.सी.सी के दोषी कर्मचारी को जिले के बडे अफसर बचाने का जुगाड बना रहे है। पिछले एक माह से जांच रिपोर्ट अधिकारीयों के टेबल का चक्कर लगा रही है, लगभग एक माह पूर्व राजीव गांधी शिक्षा मिशन के डी.एम.सी एवं शिक्षा विभाग के सहायक संचालक की संयुक्त टीम ने यहा आकर अनुदान राशि मे से एक ही फर्म का सामान खरीदी करने के मामले की जांच करी थी,जिसमे उनके द्वारा संकुल समन्वयको के लिखित मे बयान लिए गये थे, परंतु एक माह का समय बीत जाने के बाद भी आज तक जांच की रिपोर्ट नही आ पायी है, जिसके कारण पीडित पक्ष मे हताशा देखने को मिल रही है। शिकायतकर्ता कुछ प्राचार्यो ने जांच के तरीके पर पहले ही सवाल उठाये थे, उस पर अब लंबा समय बीतने के बाद रिपोर्ट ना आना पीडित पक्ष की शंका को सही साबित कर रही है। दरअसल स्कूलो मे प्रत्येक वर्ष समग्र शिक्षा विभाग की ओर से मूलभूत राशि के रूप मे निश्चित रूपयो का आबंटन दिया जाता है,उन रूपयो से स्कूल मे मरम्मत कार्य के अलावा शिक्षा संबंधित सामग्री एवं अन्य प्रकार के सामानो की खरीदी की जाती है, इस वर्ष भी ब्लाक के 380 प्राथमिक एवं माध्यमिक शालाओ मे लाखो रूपये की अनुदान राशि समग्र शिक्षा विभाग की ओर से भेजी गयी थी। यह राशि जैसे ही प्राचार्यो के खाते मे जमा हुयी वैसे ही राशि का बंदरबांट करने के लिए बाजार के कुछ व्यापारी एवं बी.आर.सी.सी कार्यालय मे बैठे कुछ कर्मचारी योजना बनाने लगे। उनके द्वारा बाजार के एक व्यापारी से सांठ-गांठ कर घटिया सामान को अधिक दर पर एक ही जगह से खरीदी करने का फरमान मोबाईल के जरिये सभी प्राचार्यो के पास फारवर्ड कर दिया,जिसके बाद उस मैसेेज ने प्राचार्यो के बीच खलबली मचा दी।
दोषी को कटा मात्र् शो काज नोटिस-ःस्कूल एवं वहा अध्ययनरत बच्चो के सर्वांगीण विकास के लिए आने वाली अनुदान राशि मे बंदरबंाट की नजर रखने वाले बी.आर.सी.सी कार्यालय के दोषी कर्मचारी को अब तक मात्र् शो काज नोटिस ही तामिल हो सका है। जिला शिक्षा अधिकारी जे.के.प्रसाद ने बताया कि बी.आर.सी.सी के कर्मचारी द्वारा समन्वयको के माध्यम से प्राचार्यो को जो एक ही फर्म से खरीदी करने का मैसेज भेजा था,उस संबंध मे कर्मचारी को शो काज नोटिस दिया गया है। जवाब मिलने के बाद कर्मचारी पर कार्यवाही की जायेगी। दरअसल बी.आर.सी.सी के उक्त कर्मचारी द्वारा समन्वयको को माध्यम बनाकर प्राचार्यो के पास मोबाईल के जरिये एक ही फर्म से सामान खरीदी करने का फरमान जारी किया था। इस कृत्य मे कही न कही ब्लाक के समन्वयक भी दोष की श्रेणी मे आते है।।
शिक्षा नीति हो रही दीमक की तरह खोखली-ःउच्च शिक्षा को लेकर राज्य शासन द्वारा बनायी जाने वाली नीतियां शिक्षा विभाग मे आकर दीमक की तरह खोखली हो जाती है,यहा सालोसाल से जमे कर्मचारीयों द्वारा योजनाओ पर कालिक पोत दी जाती है। यहा का बी.आर.सी.सी कार्यालय हमेंशा से विवादित रहा है,शिक्षको के बीच अवैध वसूली को लेकर यहा के कर्मचारीयों पर अनेक मर्तबा आरोप लग चुके है। पिछले दिनो कर्मचारीयों के एक दल ने बी.आर.सी.सी के कर्मचारी द्वारा अवैध वसूली की शिकायत लिखित मे जिला कलेक्टर को दी थी,जिससे सहज ही अंदाजा लगाया जा सकता है कि शिक्षा को लेकर राज्य शासन की नीतियों को संबंधित विभाग किस तरह खोखला कर रहे है।।
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