कोरबा। दर्री पुलिस ने एक ऐसे च्वाइस सेंटर का भंडाफोड़ किया है जहां पीआर फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाने का काम धड़ल्ले से चल रहा था। पुलिस ने सेंटर के संचालक को गिरफ्तार किया है और 74 कार्ड समेंत कंप्यूटर, प्रिंटर, स्कैनर, लैपटॉप जब्त किया है।

मामले की जानकारी देते हुए अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक अभिषेक वर्मा ने स्थानीय मीडिया को बताया कि जिले में कुछ दिनों से फर्जी वोटर आईडी बनाकर उनके विभिन्न स्थानों पर परिचय पत्र के रूप में उपयोग किए जाने की सूचनाएं मिल रही थी। इस संबंध में पुलिस अधीक्षक संतोष सिंह के द्वारा सभी थानों को पता साजी के लिए निर्देश दिए गए थे। इसी तारतम्य में दर्री थाने को सूचना मिली की प्रेमनगर जेलगांव चौक के पास संचालित गज्जू डिजिटल नामक च्वाइस सेंटर का संचालक गजेंद्र साहू फर्जी वोटर आईडी कार्ड बना रहा है। जिनका उपयोग विभिन्न माइक्रो फाइनेंस कंपनी, बैंक एवम अन्य जगहों पर परिचय पत्र के रूप में किया जा रहा है। सूचना पर दर्री पुलिस की टीम ने गज्जू चॉइस सेंटर पर निगरानी रखना शुरू किया। जब पुलिस को चॉइस सेंटर में फर्जी वोटर आईडी कार्ड बनाने की पूरी जानकारी मिली तो गज्जू डिजिटल सर्विसेज में छापा मारा। जहां उसके संचालक गजेंद्र साहू ने पहले तो ऐसे किसी कार्य को करने से साफ इंकार कर दिया, लेकिन् जब पुलिस के द्वारा उसके सामने उसके द्वारा किए गए ऐसे कृत्यों की जानकारी प्रस्तुत की तो उसने स्वीकार किया की वो फर्जी वोटर आईडी बनाता है और अभी तक सैकड़ों ऐसे कार्ड बना चुका है। दर्री पुलिस ने चॉइस सेंटर से मोबाइल तथा कंप्यूटर से 74 फर्जी बनाए हुए वोटर आईडी कार्ड जप्त किए है। दर्री पुलिस ने इस प्रकरण में अपराध क्रमांक 269/22 धारा 420, 467, 468, 471 आईपीसी, दर्ज करते हुए आरोपी के कब्जे से 74 नग फर्जी वोटर आईडी, मोबाइल, लैपटॉप, डेस्कटॉप, सीपीयू प्रिंटर – स्कैनर ,लेमिनेटर जप्त करके आरोपी को गिरफ्तार लिया है।
00 एसडीएम का हस्ताक्षर करता था स्कैन
मतदाता पहचान पत्र सीधे मतदाता के पते पर भेजने के निर्देश जारी किए गए हैं। लेकिन गजेंद्र साहू अपने चॉइस सेंटर की आईडी से किसी मतदाता परिचय पत्र का एपिक नंबर निकाल लेता था और उस कार्ड में फोटो तथा एड्रेस किसी और का प्रिंट कर देता था।निर्वाचन अधिकारी के हस्ताक्षर वाले स्थान पर ये एसडीएम कटघोरा के हस्ताक्षर को स्कैन करके प्रिंट कर देता था। ये वोटर आईडी कार्ड एकदम सही प्रतीत होते थे, जब तक एपिक नंबर को कोई चेक न करें। इनका उपयोग विभिन्न फाइनेंस कंपनियों ,बैंको में खाता एवम लोन के लिए तथा संस्थानों में गेट पास बनवाने किया जा रहा है। इसके लिए कुछ और लोगो के नाम भी जानकारी में आए हैं, जो एजेंट का कार्य करते हुए फोटो एवम डाटा कलेक्ट करके गजेंद्र साहु को देते थे। निर्वाचन कार्यालय से भी जानकारी प्राप्त की जा रही है।
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