डेस्क न्यूज। गुजरात के मोरबी शहर में रविवार की शाम बड़ा हादसा हो गया है। मच्छु नदी में बना केबल ब्रिज के अचानक टूट जाने से पांच सौ से अधिक लोग नदी में गिर गए। इनमें से 50 से अधिक लोगों के मरने की सूचना है। जबकि शेष लोगों को नदी से निकालने के लिए रेस्क्यू ऑपरेशन जारी है। कई लोगों को बचा लिया गया है।
गुजरात के मोरबी जिले में मणि मंदिर के पास मच्छु नदी पर बना केबल ब्रिज टूट गया है। अचानक पुल (हैंगिंग ब्रिज) के टूटने से बड़ी संख्या में उस पर मौजूद लोग पानी में गिर गए हैं। जिस वक्त पुल गिरा उस समय उस पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। इस हादसे में अभी तक 50 लोगों की मौत हो चुकी है। मृतकों की संख्या में इजाफा हो सकता है। पुल के गिरने के बाद तुरंत मौके पर पुलिस और जिला प्रशासन के लोग रेस्क्यू ऑपरेशन में जुट गए है। गांधीनगर से मोरबी के लिए एनडीआरएफ की दो टीमें रवाना हो गई हैं। राजकोट से भी एसडीआरएफ की टीम भेजी गई है। खुद मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल भी मौके पर पहुंचने वाले हैं।
हादसे को लेकर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने गुजरात के मुख्यमंत्री भूपेंद्र पटेल और राज्य के अधिकारियों से बात की है। उन्होंने बचाव अभियान के लिए टीमों को तत्काल भेजे जाने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्थिति की बारीकी से निगरानी करने और प्रभावित लोगों को हर संभव मदद देने को कहा है।
00 मुआवजे का ऐलान
मुख्यमंत्री पटेल ने कहा, ‘मैं मोरबी की त्रासदी में जान गंवाने वाले नागरिकों के परिवारों के प्रति संवेदना व्यक्त करता हूं। राज्य सरकार प्रत्येक मृतक के परिवार को 4 लाख रुपये और घायलों को 50,000 रुपये देगी।’स्थानीय विधायक एवं राज्य मंत्री बृजेश मेरजा ने कहा, पुल टूटने से कई लोग नदी में गिर गए। बचाव अभियान जारी है। ऐसी जानकारी है कि इसमें कई लोग घायल हुए हैं। उन्हें अस्पताल ले जाया जा रहा है।
2 करोड़ की लागत से हुआ था पुल का निर्माण
बताया जा रहा है कि नए साल के मौके पर मोरबी का केबल ब्रिज दर्शकों के लिए खोल दिया गया था। 2 करोड़ रुपए की लागत से इसका जीर्णोद्धार किया गया था। रिनोवेशन के बाद भी इतना बड़ा हादसा होने पर अब कई तरह के सवाल खड़े हो रहे हैं।
00 जानिए केबल ब्रिज का क्या है इतिहास?
इस केबल ब्रिज का उद्घाटन 20 फरवरी 1879 को मुंबई के गवर्नर रिचर्ड टेम्पल ने किया था। यह उस समय लगभग 3.5 लाख की लागत से 1880 में बनकर तैयार हुआ था। इस समय पुल बनाने का सामान इंग्लैंड से आया था। यह पुल दरबारगढ़ को नजरबाग से जोड़ने के लिए बनाया गया था। हालांकि,अब यह लटकता हुआ कुंड महाप्रभुजी के आसन और पूरे समाकांठा क्षेत्र को जोड़ता है। मोरबी का यह केबल ब्रिज 140 साल से भी ज्यादा पुराना है और इसकी लंबाई करीब 765 फीट है। यह केबल ब्रिज गुजरात के मोरबी ही नहीं बल्कि पूरे देश के लिए ऐतिहासिक धरोहर है।
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