रायपुर। भूपेश सरकार ने भाजपा सरकार के ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक रायपुर के “स्काई वॉक” की जांच ACB/EOW से कराने का निर्णय लिया है। 77 करोड़ में बनने वाले स्काई वॉक को चुनाव आचार संहिता को दरकीनर्कर, नियम कानून को ताक पर रखकर वर्क ऑर्डर जारी किया गया था।
राजधानी रायपुर की बहुचर्चित स्काई वॉक का निर्माण एक बार फिर चर्चा में गया है। बीजेपी सरकार की ड्रीम प्रोजेक्ट में से एक स्काई वॉक के निर्माण में गड़बड़ी सामने आई है। स्काई वॉक निर्माण प्रकरण में प्रथम दृष्टया अनियमितता पाए जाने पर सरकार ने इसकी जांच एसीबी-ईओडब्ल्यू से करने का निर्णय लिया है। अब नए सिरे से दोनों जांच एजेंसियां इसके निर्माण में हुई अनियमितता की जांच करेंगी।
जानकारी के अनुसार 77 करोड़ रुपए की परियोजना का जान बूझकर 2 बार में प्राक्कलन तैयार किया गया, ताकि पीएफआईसी से मंजूरी की आवश्यकता न रह जाए। पीएफआईसी के माध्यम से किसी भी परियोजना के जनहित के संबंध में परीक्षण किया जाता है, जो कि स्काई वॉक निर्माण प्रकरण में नहीं किया गया है। विधानसभा निर्वाचन 2018 की अधिसूचना जारी होने के बाद भी लोक निर्माण विभाग ने पुनरीक्षण प्रस्ताव तैयार कर 5 दिसम्बर 2018 को वित्त विभाग को भेजा गया, जो आचार संहिता का स्पष्ट उल्लंघन था। जिससे ये स्पष्ट है कि यह कार्य विभाग के पदाधिकारियों और ठेकेदार को अनुचित लाभ पहुंचाने के उद्देश्य से किया गया।
लोक निर्माण विभाग ने स्काई वॉक निर्माण की प्रथम निविदा 4 फरवरी 2017 को जारी की गई। निविदा प्रस्तुत करने के लिए मात्र 15 दिनों का समय दिया गया। 4 फरवरी तक प्रकरण में वित्त विभाग से प्रशासकीय स्वीकृति भी प्राप्त नहीं हुई थी। 15 दिनों की निविदा के लिए कोई आवश्यकता और औचित्य नहीं दर्शाया गया है, न सक्षम स्वीकृति प्राप्त की गई है। यह स्काई वाक पूर्ववर्ती रमन सिंह सरकार के समय बनाया जा रहा था, जो अधूरा रह गया। सत्ता परिवर्तन के बाद से ही कांग्रेस सरकार लगातार स्काई वॉक निर्माण और उसकी उपयोगिता पर सवाल उठा रही थी। कुछ समय पहले ही कांग्रेस प्रवक्ता आरपी सिंह ने सीएम भूपेश बघेल को ज्ञापन सौंपकर इस संबंध में जांच करवाने की मांग की थी।
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