बिलासपुर। पठान फिल्म का विरोध करने के बहाने बजरंग दल का एक नेता जमीन कब्जा करने पहुंचा गया था। लेकिन समय रहते वहां पहुंचे कार्यकर्ताओं को इसकी भनक लग गई। लिहाजा नेता अपने इरादे पर सफल होता इसके पहले सारे कार्यकर्ता उसे छोड़ कर भाग गए। कुल मिलाकर बजरंग दल के नेता की दाल नहीं गली, अब पद भी जाने का खतरा बढ़ गया है।
शुक्रवार को विवादित फिल्म पठान पूरे देश में रिलीज हुई। बिलासपुर में PVR और अन्य सिनेमाघरों में हुआ। राष्ट्रीय स्तर पर लिए गए निर्णय के अनुसार बजरंग दल के सभी कार्यकर्ताओं को सिनेमाघरों के सामने धरना, प्रदर्शन करना था। तय कार्यक्रम के अनुसार बिलासपुर में बजरंग दल के अलावा अनुशांगिक संगठनों के कार्यकर्ता सैकड़ों की संख्या में श्रीकांत वर्मा मार्ग स्थित मैग्नेटो मॉल के सामने एकत्रित हुए। वहां पर सभा के लिए एक ऐसा स्थल का चयन किया गया था जिसपर बजरंग दल के एक पदाधिकारी की नजर बनी हुई है और सीमांकन के लिए आवेदन कर रखा था। सीमांकन के पहले वह उस जमीन पर काबिज होना चाह रहा था। पठान फिल्म का विरोध करने के बहाने सभा हुई जो समाप्त होने वाली थी। तभी बजरंग दल के नेता ने सभा स्थल पर श्रमदान करने की अपील की लिहाजा सभी भोले भाले कार्यकर्ता श्रमदान करने लगे। अब श्रमदान भी खत्म हो गया लेकिन बजरंग दल के नेता का ईट, रेती, सीमेंट नहीं आया था तो सभी कार्यकर्ताओं से अपील किया की कुछ देर भजन करते है। लिहाजा सभी भोले भाले कार्यकर्ता भजन करने लगे। तभी नेताजीजी गाडियां रेत, सीमेंट और ईंट लेकर पहुंच गई। पहले से ऐसे धंधे से जुड़े नेताओं को माजरा समझते देर नहीं लगी लिहाजा पठान फिल्म का विरोध तो दूर आपस में ही बवाल हो गया। पहुंचे कार्यकर्ताओं ने आरोप लगा दिया की हम पंडों की तरह लठैत बनकर नहीं आए है पठान फिल्म का विरोध करने आए है। देखते ही देखते इस बात को लेकर जमकर बहस हुई। बात तू-तू,मै-मैं तक पहुंच गयी। मौके पर मौजूद पुलिस ने बीच बचाव कर बहस को किसी तरह शांत कराया। खबर मिलते ही तहसील प्रशासन भी मौके पर पहुंच गया। नायब तहसीलदार राहुल शर्मा ने भी दोनो पक्षों को जरूरी निर्देश दिया। पठान फिल्म का विरोध के बहाने जमीन पर कब्जा षड्यंत्र उजागर हो चुका था। पुलिस को बीच बचाव करना पड़ा।
आखिर क्या है मामला…
नायब तहसीलदार राहुल शर्मा ने बताया जूना बिलासपुर हल्का खसरा नम्बर 730 और 732 का सीमांकन मामला। दोनो पक्षों का अपना अलग अलग दावा है। मामला अभी कोर्ट में है। इसलिए इस पर कुछ कहा जाना उचित नहीं होगा। बताया जा रहा है कि बजरंग दल के लोग फिल्म का विरोध करने आए थे। लेकिन इसी बीच जानकारी मिली कि जमीन पर कब्जा किया जा रहा है। दोनो पक्षों को समझाकर लौटा दिया गया है।
किसकी है जमीन
जानकारी के अनुसार जिस जमीन पर कब्जा का प्रयास किया गया…दरअसल जमीन आबकारी विभाग से रिटायर्ड अधिकारी मिस्टर वर्मा की है। वर्मा विद्यानगर में रहते है। उनके बेटों का नाम आदित्य, आलोक और अमित वर्मा है। चूंकि जमीन बहुत दिनों से खाली है। इसी दौरान जमीन की स्थिति को लेकर विवाद हो गया। मामला तहसील कोर्ट तक पहुंचा। जिस पर अभी सुनवाई चल रही है।
कब्जा का प्रयास
वर्मा परिवार की तरफ से मिली जानकारी के अनुसार जमीन पर बलात कब्जा का प्रयास किया गया। शुक्र है कि बजरंगियों ने ही इसका विरोध किया। वर्मा पुलिस और प्रशासन देखती रह जाती और जमीन पर कब्जा हो जाता है। बहरहाल जमीन कब्जा किए जाने के नायाब तरीका को लेकर शहर में जमकर चर्चा है।
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