बिलासपुर। न्यायधानी के प्रतिष्ठित एसबीआर कॉलेज का खेल मैदान अब नीलाम हो जाएगा। हाईकोर्ट ने देश भर में विज्ञापन प्रकाशित कर इसका नीलामी विज्ञापन छपवाने के निर्देश दिए हैं। एसबीआर कॉलेज को शासकीय जमुना प्रसाद वर्मा स्नातकोत्तर महाविद्यालय के नाम से जाना जाता है। यहां खेल मैदान के लिए 70 साल पहले भूमि ट्रस्ट ने दान की थी। अब ट्रस्ट ने इसे बेचने के लिए हाईकोर्ट में याचिका लगाई थी। जिसमे शासन से भी कोर्ट ने जवाब मांगा था पर कोई जवाब नही आया। जिसके बाद अदालत ने आदेश जारी कर दिया है। इस पूरे मामले में राजस्व विभाग की भूमिका संदिग्ध नजर आ रही है।
जरहाभाठा स्थित शासकीय जमुना प्रसाद वर्मा कॉलेज में हजारों विद्यार्थी पढ़ाई करते हैं। यहां कला एवं वाणिज्य संकाय संचालित है। कॉलेज के सामने ही कालेज से लगी हुई बिलासपुर- रायपुर नेशनल हाइवे पर 2.38 एकड़ जमीन है। जो कॉलेज के खेल मैदान के रूप में काम आता है। इस जमीन को शिव भगवान रामेश्वर लाल चैरिटीबल ट्रस्ट ने कॉलेज को 70 साल पहले दान में खेल मैदान के लिए दी थी। ट्रस्ट ने खसरा नंबर 107/3 रकबा 0.40 हेक्टेयर व खसरा नंबर 108/3 रकबा 0.9222 हैक्टेयर जमीन को खेल मैदान के लिए उपयोग के लिए दिया था। अब ट्रस्ट को जमीन के बिक्री की आवश्यकता महसूस हुई। जिसके लिए ट्रस्ट ने 2019 में एसडीएम के यहां आवेदन दिया। मामले में कालेज का खेल मैदान होने के चलते जमकर विरोध प्रदर्शन हुआ। कॉलेज के छात्रों के अलावा शहर के कई संगठनों ने विरोध प्रदर्शन करना शुरू कर दिया। जिसके बाद उक्त खेल मैदान को बेचने की अनुमति एसडीएम ने नही दी।
कॉलेज के मैदान को बेचने की अनुमति देने के लिए शिव भगवान चैरिटिबल ट्रस्ट के ट्रस्टी कमल बजाज, चिराग बजाज, अनन्या बजाज ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर कॉलेज के खेल जमीन को बेचने की अनुमति देने की मांग की। जिस पर हाईकोर्ट में अरविंद चंदेल की सिंगल बैंच में सुनवाई हुई। जिसमे अदालत ने शासन से सरकार का पक्ष मांगा था। पर शासन ने अपना पक्ष नही रखा।सुनवाई के पश्चात अदालत ने उक्त जमीन को बेचने की अनुमति प्रदान कर दी।
अदालत ने कहा है कि कॉलेज के इंट्रेस के लिए 20 फिट का रास्ता छोड़ना होगा। व पार्किंग के लिए भी 25 फिट जमीन छोड़नी होगी। जिला कलेक्टर कॉलेज के खेल मैदान के जमीन की कीमत का पहले वैल्युशन करवाएंगे। फिर ट्रस्ट की जमीन को बेचने से पहले पूरे देश में बिडिंग के लिए पेपर प्रकाशन करवाया जाएगा। उसके बाद नीलामी में जो सबसे अधिक बोली लगाएगा उसे खेल मैदान की जमीन बिक्री की जाएगी। ज्ञातव्य है कि इस मामले में ट्रस्टी परिवार के अन्य सदस्यों (जो वर्तमान में ट्रस्टी नही है) ने भी आपत्ति दर्ज करवाते हुए अदालत को बताया था कि ट्रस्ट के बायलॉज में नियम है कि पिता के रहते पुत्र को ट्रस्टी नही बनाया जा सकता। जबकि इस ट्रस्ट में कमल बजाज ट्रस्टी है और उनका पुत्र चिराग बजाज भी ट्रस्टी है। चिराग बजाज के द्वारा ही ट्रस्ट की जमीन को बेचने के लिए रजिस्ट्रार पब्लिक ट्रस्ट में लगाया था। जिस पर उच्च न्यायालय ने कहा कि अभी फिलहाल ट्रस्ट की जमीन की बिक्री के लिए अनुमति दी जा रही है। ट्रस्ट में ट्रस्टी कौन कौन होगा इस मुद्दे पर यहां बहस नही हो रही है। उक्त ट्रस्ट में ट्रस्टी बनने हेतु बजाज परिवार के अन्य सदस्यों ने भी जिला न्यायालय में केस दाखिल किया हुआ है।
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