बिलासपुर। भारतीय जनता पार्टी का केंद्रीय नेतृत्व छत्तीसगढ़ में पार्टी की स्थिति को लेकर खासे चिंतित है। रमन सिंह और उसकी टीम ने पार्टी की इतनी दुर्गति कर दी है कि उसे फिर से खड़ा करने में केंद्रीय नेतृत्व को पसीना बहाना पड़ रहा है। यही कारण है की लगातार प्रयोग किए जा रहे है लेकिन हर प्रयोग नाकाफी साबित हो रही है। अभी प्रदेश अध्यक्ष और नेता प्रतिपक्ष को बदले चंद महीने ही हुए है की पार्टी एक बार फिर से बड़े बदलाव की ओर बढ़ गई है।
भूपेश बघेल के मुख्यमंत्री बनने के बाद प्रदेश में राजनीति का पूरा ट्रेंड ही बदल गया है। आज की स्तिथि में देखा जाय तो पूरे प्रदेश की राजनीति छत्तीसगढ़िया और गैर छत्तीसगढ़िया जैसे मुद्दे के इर्दगिर्द ही घूम रही है। सारे मुद्दे एक तरफ तो क्षेत्रीयता का मुद्दा अकेले एक तरफ हो गया है। लोगो को भी ये मुद्दा पसंद भी आ रही है। यही कारण है की प्रदेश में राजनीति की हवा को भांपते हुए भाजपा ने भी छत्तीसगढ़िया नेतृत्व को सामने रखकर विधानसभा चुनाव लड़ने की रणनीति बनाई है। इसी को ध्यान में रखकर पार्टी ने प्रदेश में बड़े बदलाव की ओर कदम बढ़ा दिया है। यदि सब कुछ ठीक रहा तो इस महीने के अंत तक प्रदेश भाजपा में आमूलचूल परिवर्तन नजर आएगा। इस परिवर्तन में न केवल प्रदेश अध्यक्ष बदलने की तैयारी है बल्कि पिछड़ा वर्ग को साधने के लिए केंद्र में कुछ चेहरों को मंत्री बनाने की तैयारी हो चुकी है। बताया जा रहा है की आगामी विधानसभा चुनाव को देखते हुए पार्टी को प्रदेश अध्यक्ष के रूप में एक आक्रामक चेहरे की जरूरत है। इसके लिए पूर्व मंत्री अजय चंद्राकर में पार्टी की तलास खत्म हो जा रही है। उनके अलावा कोई दूसरा नेता पार्टी में नजर नहीं आ रहा है जो भूपेश बघेल को उसी के तेवर में जवाब दे सके। पार्टी तेवर का जवाब तेवर से देना चाहती है। लिहाजा शीघ्र ही अजय चंद्राकर की ताजपोशी प्रदेश अध्यक्ष के रूप में हो सकती है। अब सवाल ये उठ रहा है की चंद्राकर प्रदेश अध्यक्ष बनेंगे तो अरुण साव कहां जाएंगे ? तो पार्टी ने इसका भी हल निकाल लिया है। पार्टी सूत्रों की माने तो अरुण साव को केंद्र में मंत्री बनाया जा रहा है। शीघ्र उनको प्रदेश अध्यक्ष के पद से हटाकर केंद्रीय मंत्री के रूप में शपथ दिलाया जाएगा। यह काम भी इस महीने के अंत तक होने की संभावना है।
इसके अलाव पार्टी ने विधानसभा चुनाव में ज्यादातर टिकट छत्तीसगढ़ियों को देने का भी निर्णय लिया गया है। पार्टी सूत्रों की माने तो 90 में से 5 से 7 सीटों पर ही गैर छत्तीसगढ़ियों को टिकट देगी। यही नहीं प्रदेश की राजनीति से संबंधित सारे बड़े फैसले दिल्ली स्तर पर लिए जा रहे है और आगे भी लिए जाएंगे। प्रदेश में पार्टी के बड़े नेताओं को दिल्ली से केवल टास्क दिया जाएगा और उसके अनुसार उन्हें काम करना होगा। क्योंकि पार्टी के केंद्रीय नेतृत्व को समझ में आ गया है की प्रदेश के सारे बड़े चेहरे बेनकाब हो चुके है। उनको सामने रखकर विधानसभा चुनाव में बेहतर परिणाम नहीं लाया जा सकता।
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