बिलासपुर। अटल बिहारी बाजपाई विश्वविद्यालय के कुलपति वैसे है तो जाने माने शिक्षाविद है। देश – दुनिया में ठीक ठाक पहचान रखते है। ये बात अलग है अभी तक उनके व्यक्तित्व का लाभ विश्वविद्यालय को उतना नहीं मिला जितना मिलना चाहिए। लेकिन अपनी कार्यशैली को लेकर अक्सर वे चर्चा में जरूर रहते है। जब वे पहली बार पदभार ग्रहण करने आए थे तो जमीन में बैठकर पूजा – पाठ करने के बाद ही विश्वविद्यालय के भवन में प्रवेश किया था। यानी एंट्री ही उन्होंने धमाकेदार तरीके से किया था और चर्चा में आ गए थे। इसके बाद काम शुरू हुआ फिर पूरे देश को कोरोना ने घेर लिया, लिहाजा उन्होंने मिलने के लिए आने वाले सभी लोगों के लिए नीम की पत्ती चबाना अनिवार्य कर दिया। जो भी व्यक्ति उनके चेंबर में जाता उसे नीम की पत्ती चबाना पड़ता, चाहे वो विश्वविद्यालय का कर्मचारी हो या स्टूडेंट। लिहाजा एक बार फिर से उन्होंने सुर्खियां बटोरी। तीसरी बार उन्होंने सुर्खियां तब बटोरी जब चेंबर के लिए आए शानदार चेयर हटवा दिए और अपने बैठने के लिए “तखत” मंगवा ली और उसी बैठकर कार्यालयीन कार्य करने लगे। सुबह से शाम तक शुटबुट और टाई में रहने वाले श्री बाजपाई भारतीय परिवेश और संस्कृति का पूरा ख्याल रखते है। अपने आचरण और व्यवहार से स्पष्ट कर दिया की भारतीय संस्कृति, पूजापाठ, जीवन पद्धति से किसी तरह का कोई समझौता नहीं किया जाएगा।
आजकल श्री बाजपाई इलेक्ट्रिक कार यानी ई रिक्शा के लिए सुर्खियों बटोर रहे है। हाल ही में हुए दीक्षांत समारोह में महामहिम राज्यपाल बतौर मुख्य अतिथि के रूप में पधारे थे। उनको चलने में होने वाली परेशानी को देखते हुए विश्वविद्यालय ने एक इलेक्ट्रिक कार खरीदी जिसे शहर में आजकल ई रिक्शा कहा जाता है। ये ई रिक्शा कितने में खरीदा गया ये अलग मामला है। फिलहाल दीक्षांत समारोह खत्म होने के बाद इस ई रिक्शा का काम खत्म हो गया। इसके बाद इसका सदुपयोग खुद कुलपति अपने लिए कर रहे है। वे अपने बंगले से विश्विद्यालय तक तो कार में आते है फिर उसमे से वे उतरकर ई रिक्शा में बैठते है। ई रिक्शा उन्हें लेकर उनके चेंबर के दरवाजे तक आकर छोड़ते है। कुलपति को अपनी कुर्सी तक जाने के लिए बमुश्किल चार – पांच कदम ही पैदल चलना पड़ता है। गाहे बगाहे इस ई रिक्शा में बैठने का मजा कुछ खास कर्मचारियों को भी प्रसाद स्वरूप मिल जाता है। कुलपति के ई रिक्शा की यात्रा को लेकर कर्मचारियों और छात्रों में जमकर चर्चा हो रही है। कोई उनके उम्रदराज होने का हवाला देकर उचित बता रहे है तो कई लोग इसे “राजसी ठाठ” बताकर पीठ पीछे आलोचना भी कर रहे है। कई कर्मचारी और प्रोफेसर ई रिक्शा की खरीदी पर ही स्वालिया निशान लगा रहे है। फिलहाल श्री बाजपाई ई रिक्शा का आनंद ले रहे है।
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