बिलासपुर। अटल बिहारी बाजपाई विश्विद्यालय को वहां के कुलपति और कुल सचिव कितनी गंभीरता से चला रहे है इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि यूनिवर्सिटी में गठित अध्ययन मंडल में क्या हो रहा है किसी पता नही है। यूनिवर्सिटी और उससे संबद्ध कालेजों 40 विषयों की पढ़ाई होती है। नियमानुसार सभी विषयों के लिए एक अध्ययन मंडल का गठन करने का प्रावधान है। यूनिवर्सिटी में भी लगभग 40 विषयों के लिए अध्ययन मंडल बनाया गया है, ऐसा माना जा रहा है। लेकिन विवि प्रबंधन के पास अध्ययन मंडल में नियुक्ति का कोई हिसाब किताब नहीं है। मंडल की मीटिंग हो रही है की नहीं हो रही है यह भी किसी को खबर नहीं है। मंडल के सदस्यों की नियुक्ति तीन साल के लिए की जाती इसके बाद नए सदस्यों को अवसर दिया जाता है। लेकिन कई विषयों के लिए बने अध्ययन मंडल में लोग 10-10, 12-12 साल से जमे हुए है। कुछ रिटायरमेंट हो गए है फिर भी बने हुए है। दूसरे यूनिवर्सिटी के प्राध्यापकों को अध्ययन मंडल में शामिल किया गया है। सीनियर प्राध्यापकों को दरकिनार कर जूनियर प्राध्यापकों को अध्ययन मंडल में शामिल किया गया है। अध्ययन मंडल में कई ऐसे प्राध्यापकों को शामिल किया गया है जो UGC के मापदंड पर खरे नहीं उतरते।
मसलन डॉक्टर ए. एल. ध्रुवंशी राजनीति शास्त्र और मनीन्द्र मेहता भौतिक शास्त्र ABU के किसी भी महाविद्यालय में नहीं है। बावजूद इसके अध्ययन मण्डल मे ये शामिल है। इसी तरह हिन्दी विभाग के डीन रह चुके डी.एस ठाकुर, भूगोल विभाग के डीडी कश्यप, अंग्रेजी विभाग की डॉक्टर सावित्री त्रिपाठी सभी लोग पूर्व में सदस्य रह चुके हैं। इस बार भी उन्हें अध्ययन मण्डल मे स्थान दिया गया है। जो नियमों के खिलाफ है।
इसी तरह वंदना तिवारी राजनीति शास्त्र की प्राध्यापक हैं, लेकिन पीजी विभागाध्यक्ष नहीं है। बावजूद इसके इन्हें सदस्य बनाया गया है। इसके अलावा प्रबंधन ने 30 साल से अधिक समय से पठन पाठन करने वाले प्राध्यापकों पर जूनियर को प्राथमिकता दिया है। जैसे वनस्पति शास्त्र के डाक्टर डी के श्रीवास्तव को माइक्रोबायोलॉजी का सदस्य बनाया गया हैं। तीन साल से कभी कालेज नहीं गयी डॉक्टर वर्षा वैद्य को भूगोल की टीम में रखा गया है। अर्थशास्त्र में डाक्टर अनुराधा तिर्की, फिजिक्स मे डाक्टर उषा राठौर को सीनियर प्राध्यापकों पर वरीयता दी गयी है। डीपी विप्र कालेज की डॉक्टर सूची सिन्हा और डॉक्टर बी आर मोटवानी दर्शन शास्त्र के सदस्य है। जबकि डी पी विप्र कालेज मे ये विषय हैं ही नहीं…। सच तो यह है कि विभाग ही बंद हो चुका है।
कॉमर्स मे शरद कुमार देवांगन बहुत जुनियर हैं। शिक्षा मे उल्लाह वारे सेवानिवृत हो चुके हैं। यह जानते हुए भी स्नातक महाविद्यालय मे विभागाध्यक्ष का पद नही होता बावजूद इसके देवांगन और उल्लाह को अध्ययन मण्डल का सदस्य बनाया गया है।
00 UGC की गाइड लाइन
यूजीसी गाइड लाइन 1973 के अनुसार प्रत्येक विश्ववि्द्यालय में सभी विषयों के लिए अलग अलग अध्ययन मण्डल यानि बोर्ड ऑफ स्टडीज का गठन किया जाएगा। टीम में कुलपति के निर्देश पर विश्वविद्यालय के मान्यता प्राप्त महावनिद्यालयों के सीनियर प्राध्यापक गाइड लाइन को पूरा करते हुए अध्ययन मण्डल के सदस्य होंगे। प्रत्येक अध्ययन मण्डल में 6- 7 सदस्य होंगे। प्रत्येक मंडल का कार्यकाल तीन साल का होगा। तीन साल बाद नए सदस्यों के साथ नई टीम का गठन किया जाएगा। अध्ययन मण्डल टीम को संबधित विभाग के बच्चों के लिए सिलेबस तैयार करने से लेकर कई प्रकार के काम छात्र हित में करना होता है।
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