स्पष्टीकरण : चांपी जलाशय से पानी छोड़ने का मामला, नहीं हुई जल की बर्बादी, तीन ब्यपवर्तन, दो एनिकट और पांच तालाबों को भरा गया

बिलासपुर। चांपी जलाशय से पानी छोड़ने के मामले सिंचाई विभाग के अधिकारियों ने अपना स्पष्टीकरण जारी किया है। जिसमे अधिकारियों में कहा है की गेट की मरम्मत के लिए डेम से पानी छोड़ा गया है। पानी बरबाद नहीं किया गया है बल्कि डेम से निकलकर तीन ब्यपवर्तन परियोजना, दो एनिकट और पांच तालाबों में पानी को भरा गया है।
चांपी जलाशय में डेम सेफ्टी पेनल की टीम के निरीक्षण में हेड स्लूस के मेशोनरी दीवार से अत्याधिक पानी का रिसाव होना पाया गया। मुख्य अभियंता हसदेव कछार जल संसाधन विभाग ने बताया कि पानी के रिसाव से गेट एवं स्ट्रक्चर्स धीरे-धीरे और कमजोर हो रहे थे, जिसके लिए पानी के स्तर को कम कर मरम्मत कराने हेतु 1 करोड़ 27 लाख 16 हजार रूपए का प्राक्कलन तैयार कर निविदा आमंत्रित की गयी। निविदा में हेड स्लूस के जैकेटिंग के अलावा नहर में स्केप एवं चैनल निर्माण का कार्य भी शामिल था। इस कार्य के लिए मेसर्स पावर टेक इंडिया बिलासपुर को अनुबंधित किया गया। ठेकेदार द्वारा नहर के कार्य पूर्णता की ओर होने पर स्लूस के कार्य को कराने हेतु सक्षम अधिकारी से स्वीकृति प्राप्त कर स्लूस गेट में जल स्तर कम करने हेतु 28 मार्च 23 को हेड स्लूस का गेट खोलकर नहर से होते हुये काल्हामार व्यपवर्तन, सिलदहा व्यपवर्तन एवं लक्षनपुर व्यपवर्तन के अलावा दो एनीकट एवं पांच तालाबों-जोगीड़बरी तालाब, साही तालाब, अमहा तालाब, गेवलाही तालाब एवं दुलहरा जलाशय में जल भरा गया।
अरपा नदी में निगम द्वारा निर्माणाधीन तटबंध में व्यवधान होने की आशंका से उनके अधिकारियों द्वारा मना करने से पानी को आगे के एनीकटों में ना ले जाकर 24 अप्रैल को हेड स्लूस का गेट बंद कर दिया गया। जलाशय से हेड स्लूस के द्वारा ही पानी नहर में छोड़ा जाता है, जिससे निस्तारी तालाबों को भरने के बाद नदी में निर्मित एनीकट एवं व्यपवर्तन को भरा गया और पानी का किसी भी तरह से दुरुपयोग नही किया गया। जलाशय में गेट बंद करने के उपरांत 40 प्रतिशत जल भराव रहा। जरूरत पड़ने पर निस्तारी हेतु पुनः तालाबों को भरा जा सकता है। चांपी जलाशय लो परसेंटेज जलाशय होने के कारण एक दो बारिश में ही भर जाता है। उन्होने बताया कि हेड स्लूस के रिपेयरिंग को कराये जाने हेतु बांध का लेवल कम किये जाने पर ही कार्य को भविष्य में किया जाना संभव होगा। जलाशय का लेवल स्लूस के माध्यम से कम किये जाने पर किसी भी स्थिति में जल की बर्बादी होने की संभावना नही रहती है।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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