बिलासपुर। भाजपा सरकार के समय अधिकारियों ने 50-50 हजार रुपए लेकर अपात्रो को गरीबों के लिए बने आवास पर कब्जा दिला दिया। अब निगम आयुक्त को पदभार ग्रहण किए 3 दिन भी नही हुए हाईकोर्ट से नोटिस जारी हो गया। माल कोई और कमा लिया और हाईकोर्ट का चक्कर कोई और काटे।

हाईकोर्ट ने शहरी निर्धन आवास आबंटन में गड़बड़ी को लेकर पेश याचिका में बिलासपुर नगर निगम आयुक्त को नोटिस जारी कर जवाब मांगा है।
चाटीडीह निवासी देवकुमार निर्मलकर को नगर निगम बिलासपुर ने शहरी निर्धन आवास योजना के तहत मई 2014 में लिंगयाडीह में आवास क्रमांक के 4 आबंटित किया गया। किंतु उक्त आवास में किसी अन्य व्यक्ति का कब्जा था। हितग्राही ने मकान का कब्जा दिलाने निगम आयुक्त को आवेदन दिया। 6 साल निगम का चक्कर लगाने के बाद उसे अक्टूबर 2020 में आवास क्रमांक एन 01 आबंटित किया गया किंतु इस मकान में भी दूसरे का कब्जा है। निगम के इस रवैया से परेशान हो कर हितग्राही ने अधिवक्ता अब्दुल वहाब खान के माध्यम से हाई कोर्ट में याचिका दाखिल की। याचिका में कहा गया कि सम्पूर्ण किश्त दिए जाने के बाद भी मकान नही दिया गया है। हाई कोर्ट की नोटिस के बाद निगम ने याची को आवास क्रमांक के 4 आबंटित करने करवाई किए जाने की जानकारी दी। जस्टिस गौतम भादुड़ी निगम के जवाब से असंतुष्ट होते हुए निगम से पूछा है कि याची को आवास क्रमांक 1 क्यो नही दिया गया। वर्तमान में आवास के 4 की क्या स्थिति है। कोर्ट ने आवास एन 1 व के 4 के आबंटन व याची के आबंटन निरस्त करने पर रोक लगाई है।
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