बिलासपुर। सबकी नजर छत्तीसगढ़ में सरकार के गठन पर लगी हुई है तो शिक्षा विभाग में जिन अधिकारियों ने ट्रांसफर घोटाले को अंजाम दिया है उनकी नजर स्कूल शिक्षा मंत्री पर है। गिरोह के सारे अधिकारी अपना मामला सेटल करने के जुगत में है। बताया जा रहा है की घोटालेबाजों ने शिक्षामंत्री को नजराना भेंट करने के लिए मोटी रकम की व्यवस्था कर ली है। सूत्रों की माने तो ये रकम 25 करोड़ रुपए के आसपास है।
चुनाव खत्म हो गए है, मुख्यमंत्री के रूप में विष्णुदेव साय बुधवार को शपथ लेंगे। मुख्यमंत्री के साथ मंत्री मंडल के 13 सदस्य भी शपथ लेंगे। सरकार बनने-बनाने के इस खेल में किस नेता को कौन सा मंत्रालय मिल रहा है इस पर सबकी नजर टिकी हुई है। इसमें वे अधिकारी भी शामिल है जो तिकड़म करके धन संग्रह में लिप्त है। लेकिन सबसे ज्यादा बेचैनी शिक्षा विभाग के उन अधिकारियों में देखी जा रही है जो चुनाव के ठीक पहले सुनियोजित तरीके से ट्रांसफर पोस्टिंग घोटाले को अंजाम दिया था और प्रदेश भर से लगभग सौ करोड़ रुपए की अवैध उगाही की थी। घोटाला उजागर के होने कारण फिलहाल सब निलंबित है, लेकिन बहाली के लिए सब छटपटा रहे है। सबकी नजर स्कूल शिक्षा मंत्री कौन बन रहा है इस पर लगी हुई है। बताया जा रहा है की घोटालेबाजों अधिकारी नई सरकार में नया मंत्री बनते ही मामला सेटल करने के जुगत में लगे हुए है। इसके लिए सबने मिलकर लगभग 25 करोड़ रुपए का कलेक्शन किया है। जैसे ही शिक्षा मंत्री चार्ज लेंगे 25 करोड़ रुपए उन्हें नजराने के रूप में भेट कर दिया जाएगा। नजराने में मोटी रकम मिलते ही मंत्री उस गिरोह की गिरफ्त होगा। इसके बाद पूरे पांच साल शिक्षा विभाग में इसी गिरोह का जलवा रहेगा। ट्रांसफर, पोस्टिंग से लेकर खरीदी, बिक्री, निर्माण कार्य सब इसी गिरोह के इशारे पर होगी। शिक्षा विभाग के इस गिरोह ने योजना तो ठीक ही बनाया है, लेकिन इस पर कितना अमल कर पाएंगे ये मंत्री पर निर्भर करेगा। फिलहाल मंत्री के लिए 25 करोड़ रुपए का पैकेज तैयार है।
गौरतलब है की विधानसभा चुनाव के ठीक पहले शिक्षा विभाग में ट्रांसफर-पोस्टिंग घोटाले का भंडाफोड़ हुआ था। जिसके बाद सरकार ने 2713 शिक्षकों का ट्रांसफर संशोधन निरस्त कर दिया था।
चारो संभाग में पदस्थ संयुक्त संचालकों और उनके करीबी बाबुओं ने मिलकर संशोधित आदेश निकलकर लगभग सौ करोड़ रुपए की उगाही की थी। जब घोटाला फूटा तो पूरे प्रदेश में बवाल मच गया और एक के बाद एक चार संयुक्त संचालक समेत दर्जनभर अधिकारियों और कर्मचारियों को निलंबित करना पड़ा था। मंत्री ने सभी संभागों के कमिश्नरों को मामले की जांच करने के निर्देश दिए थे और उनकी जांच में घोटाले की पुष्टि हुई थी। संयुक्त संचालकों और कर्मचारियों का निलंबन होने के बाद आगे की कार्रवाई अटकी हुई थी।
प्रमोशन और ट्रांसफर घोटाले की जांच के आधार पर 10 अफसरों को स्कूल शिक्षा विभाग सस्पेंड कर दिया गया था। इनमें लोक शिक्षण संचनालय के संयुक्त संचालक, जिला शिक्षा अधिकारी, ब्लॉक शिक्षा अधिकारी सहित कई अन्य बड़े अफसरों के नाम है। इनमें रायपुर संभाग के संयुक्त संचालक के कुमार, बिलासपुर के संयुक्त संचालक एसके प्रसाद, सरगुजा के संयुक्त संचालक हेमंत उपाध्याय और दुर्ग के संयुक्त संचालक जीएस मरकाम शामिल है। गरियाबंद में भी जिला शिक्षा अधिकारी डीएस चौहान को निलंबित किया गया है।
पोस्टिंग घोटाले में ये अधिकारी हो चुके हैं सस्पेंड
के. कुमार, तत्कालीन संयुक्त संचालक (शिक्षा) रायपुर
सीएस ध्रुव, जिला शिक्षा अधिकारी बलौदाबाजार-भाटापारा
डीएस ध्रुव, सहायक संचालक संभागीय शिक्षा कार्यालय रायपुर
शैल सिन्हा, सहायक संचालक
उषा किरण खलखो, सहायक संचालक
हेमंत उपाध्याय- प्रभारी संयुक्त संचालक सरगुजा
डीएस चौहान, प्रभारी डीईओ गरियाबंद
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