प्रदेश में बचा एक मात्र राजकीय पशु, वो भी हो गया है बूढ़ा, हाइब्रिड भैंसों में प्रिंस अंधा हो गया है और आनंद बीमार है, 18 बाड़े से भाग गए

रायपुर। राजकीय पशु वनभैंसा की प्रदेश में बड़ी दयनीय स्थिति है। आज की तारीख में केवल एक वनभैंसा छोटू जिंदा बचा है। वन विभाग ने जिसे वनभैंसा बताकर बाड़े में रखा था वो 18 वनभैसे हाइब्रिड निकले और वो भी बाड़ा तोड़के के भाग गए। हाइब्रिड वनभैंसौ में एक अंधा हो गया है और बीमार है। जबकि वन विभाग वनभैंसों को बचाने और कुनबा बढ़ाने के लिए करोड़ों रुपए खर्च कर चुकी है।

वन विभाग के अधिकारी भी बड़े कमाल के है। प्रदेश वो राजकीय पशु वनभैंसा का कुनबा बढ़ाना तो दूर जो थे उसे भी नही बचा पा रहे है। जबकि वनभैंसौ के संरक्षण और संवर्धन के लिए करोड़ों रुपए फूंक चुके है। विभागीय अधिकारियों के पत्राचार से स्पष्ट हो गया है की छत्तीसगढ़ में शुद्ध रक्तता का सिर्फ एक राजकीय वन भैंसा बचा है। वन विभाग दावा करता है कि छत्तीसगढ़ में 8 वन भैंसे है, जिसमे से 6 उदंती सीतानदी के बाड़े में है तो एक उदंती सीतानदी के जंगल में स्वतंत्र घूम रहा है। जबकि एक जंगल सफारी में है। लेकिन डिप्टी डायरेक्टर उदंती सीतानदी टाइगर रिज़र्व के एक पत्र ने वन विभाग की पोल खोल दी है।
दर असल वन विभाग ने असम से लाई गई पांच मादा वन भैसों से छत्तीसगढ़ के सात नर वन भैसों द्वारा प्रजनन कराने का ब्रीडिंग प्लान बना कर सेन्ट्रल जू अथॉरिटी को भेजा था। साथ में छत्तीसगढ़ के वन भैसों के नामों की सूची भी भेजी थी। लेकिन जू अथॉरिटी ने अपने जवाब में कहा है कि जो नाम भेजे हैं उनमे सिर्फ छोटू वन भैंसा ही शुद्ध नस्ल का है, बाकी सब हाइब्रिड है। इनसे प्रजनन नहीं कराया जा सकता। अथॉरिटी के नियम इसकी ब्रीडिंग करने अनुमति नहीं देगी। जू अथॉरिटी की आपत्ति के बाद 10 अगस्त 2023 से उदंती सीतानदी के बाड़े में बंद हाइब्रिड भैंसों को फ़ूड सप्लीमेंट (दलिया, मक्का, विटामिन सप्लीमेंट) देना बंद कर दिया गया। वन भैंसों को खाना देना बंद करने के 23 दिन बाद 3 सितम्बर की रात भूख के कारण 11 हाइब्रिड वन भैंसे बाड़ा तोड़ कर भाग गए, उसके बाद 24 सितम्बर की रात 5 और 17 अक्टूबर को 2 कुल 18 वन भैंसा जंगल भाग गए।

00 कोलामारका कंजर्वेशन रिजर्व में है शुद्ध नस्ल के वन भैंसे
अब सेंट्रल इंडिया में शुद्ध नस्ल के कुछ ही वन भैंसे स्वतंत्र विचरण करने वाले बचे हैं, जो कि अधिकतर समय महाराष्ट्र के गडचिरोली के कोलामारका कंजर्वेशन रिजर्व में रहते हैं, कभी-कभी इंद्रावती नदी पार करके वह छत्तीसगढ़ में आ जाते हैं। छत्तीसगढ़ वन विभाग दावा करता है कि वह छत्तीसगढ़ के हैं।

00 बाड़े में कौन कौन तीन बचे
1. एक मात्र बचा शुद्ध नस्ल का छोटू वन भैंसा, 23 वर्ष का उम्रदराज वन भैंसा है, बाड़े में वीरा नामक वन भैंसा से हुई लड़ाई के दौरान उसकी दोनों आँख ख़राब हो गई, वह लगभग अँधा है। बताया जाता है कि बाड़े में लगे लोहे के बाहर निकले टुकडों से टकरा कर उसकी आखें ख़राब हो गई।
2.हाइब्रिड प्रिंस पूर्णत: अँधा है बताया जाता है, वह स्वछंद विचरण करता था परन्तु अज्ञात कारणों से उसकी दोनों आँख ख़राब हो गई, उसे अलग बाड़े में रखा गया है।
3.हाइब्रिड आनंद बीमार है। आनंद की वीरा से लड़ाई के दौरान दोनों सिंग ऊपर से टूट गए थे। आज से तीन माह पूर्व उसमे पस पड़ा हुआ था, उसके बाद उसे और कोई डॉक्टर देखने नहीं गया।

रायपुर के वन्यजीव प्रेमी नितिन सिंघवी ने उदंती सीतानदी में वन भैंसों को बाड़ा तोड़कर भागने के लिए मजबूर करने पर वन विभाग को बधाई दी है। उन्होंने चर्चा में बताया कि कुछ साल पहले ग्रामीणों से रम्भा और मेनका नामक हाइब्रिड वन भैंसा ले कर आ गए थे। उन दोनों का परिवार बढ़ गया और सब जंगल में भाग गए। पछले 3 महीने से वे जंगल में स्वच्छंद और स्वतंत्र घूम रहे हैं।

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नीरजधर दीवान /संपादक - मोबाइल नंबर 8085229794
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